पिता राज मिस्त्री, मां अनपढ़, बेटा बनेगा अफसर:​​​​​​​नर्मदापुरम के युवक ने टीनशेड के किचन में पढ़ाई कर क्लियर किया UPSC का एग्जाम

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के 16 अप्रैल को आए रिजल्ट में नर्मदापुरम के नीलेश अहिरवार ने 916 रैंक हासिल की है। यह उनका तीसरा प्रयास था। नीलेश की सफलता की चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि उनके परिवार की 7 पीढ़ियों में कोई इतना नहीं पढ़ा। दूसरी क्लास तक पढ़े पिता राज मिस्त्री हैं। मां और दादी-नानी ने तो स्कूल की शक्ल तक नहीं देखी। कच्चे घर में रहने वाले नीलेश का अफसर बनने तक का सफर आसान नहीं था। दैनिक भास्कर की टीम नर्मदापुरम से 70 किलोमीटर दूर ईशरपुर गांव पहुंची। यहां नीलेश के माता-पिता ने बेटे के संघर्ष की कहानी बताई। पहले नीलेश के घर का माहौल जानिए गांव में 12 बाय 26 वर्गफीट का 2 कमरे का कच्चा घर है। कबेलू-टीन की छत डली है। टूटी-फूटी दीवारें हैं। बोरियों में भरी रेत की सीढ़ियां बनाई हैं। घर से 25 फीट दूर कच्चा टॉयलेट है। किचन में ही मिट्‌टी और गैस के चूल्हे के पास स्टडी टेबल और कुर्सी रखी है। इस पर किताबें रखी हैं। यह किचन कम स्टडी रूम ज्यादा है। दीवार पर डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर व स्लोगन लिखे हैं। इसी कमरे में रोजाना करीब 8 घंटे से ज्यादा पढ़ते हैं नीलेश। दूसरे कमरे में सभी लोग सोते हैं। छोटा भाई हर्ष अहिरवार भोपाल में रहकर पढ़ाई करता है। माता-पिता बोले- पढ़े नहीं, लेकिन बेटों को अफसर बनाने की ठानी नीलेश के पिता रामदास अहिरवार कहते हैं, ‘मेरे लिए यह सबसे बड़ा खुशी का मौका है। जब रिश्तेदारों के बीच बैठता था, तो दूसरे बताते थे कि बेटा पढ़ाई करने कोई ग्वालियर में है, तो कोई कहता भोपाल में है। यह सुनकर मुझे लगता था कि हमारे बेटों को हम क्यों पीछे रखें। मैंने बच्चों से कहा- आप पढ़ाई करो। खर्च हम उठा लेंगे। आर्थिक रूप से परेशानियां आईं, लेकिन पीछे नहीं हटा। ज्यादा मेहनत की। घरेलू उपयोग के सामान खरीदने पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। वहीं, कई राज मिस्त्री शराब पीकर पैसों की बर्बादी करते हैं। मेरी अपील है कि बच्चों को पढ़ाएं।' नीलेश की मां जानकी बाई बताती हैं, 'आर्थिक तंगी के कारण शिक्षा से वंचित रहे। जिंदगी अभाव में जी। घर में कोई भी चीज करने के बजाय बेटों की पढ़ाई पर खर्च किया। उसे मोबाइल, टैबलेट दिलाया, ताकि पढ़ाई में दिक्कत न हो। नीलेश बोले- अधिकतर समय सेल्फ स्टडी में लगाया यूपीएससी क्रैक करने वाले नीलेश ने बताया-’ 'बीटेक के बाद घर पर ही सिविल सर्विस की तैयारी शुरू कर दी थी। 2 साल अधिकतर समय सेल्फ स्टडी में लगाया। इंटरनेट की मदद ली। घर पर ही 2 कमरे के मकान में से किचन को स्टडी रूम बना लिया। यहां तपती धूप और चूल्हे, गैस-चूल्हे की तपन के बीच टीन की छत वाले कमरे में खुद को तपाया। गांव में गर्मियों में लाइट ज्यादा काटी जाती है। ऐसे में स्टडी नहीं हो पाती। जिस कारण 2021 और 2022 में प्री परीक्षा दी, पर फेल हो गया।' 'सोशल मीडिया पर मिले उत्तर प्रदेश के मित्र विपुल गर्ग ने पढ़ाई के लिए भोपाल जाने की सलाह दी। इसके बाद 2023 में भोपाल में किराए से कमरा लेकर रहने लगा। एक-दो सब्जेक्ट्स की कोचिंग की। मई 2023 में प्रीलिम्स क्लियर हो गया। इसके बाद कुछ साथियों ने बताया- मेन्स की तैयारी के लिए दिल्ली जाने की सलाह दी। दिल्ली में 3 महीने की कोचिंग ली। इसके बाद वापस गांव आ गया। 8 दिसंबर 2023 को एग्जाम दिया। फिर इंटरव्यू की तैयारी के लिए भी दोबारा दिल्ली गया।’ लक्ष्य के पीछे लगे रहो- नीलेश नीलेश बताते हैं ‘ 'पहले 2 बार प्रीलिम्स पास कर पाए थे। तीसरी बार में सफलता हासिल हुई है। एजुकेशन ही ऐसा सेक्टर है, जहां हम अपना स्तर उठा सकते हैं। आर्थिक, सामाजिक समस्याएं हैं, सामाजिक सशक्तिकरण के लिए व्यक्तिगत रूप से आगे बढ़ने के लिए यह अच्छा जरिया है। पढ़ाई के लिए सबसे बड़ी समस्या बिजली रही। गांव में माहौल भी ऐसा नहीं मिल पाता। घर में किचन कम स्टडी रूम ज्यादा रहा है। टेलीविजन से दूरी बनाकर रखी। सोशल मीडिया जैसे टेलीग्राम, यूट्यूब का सदुपयोग किया। कहना चाहूंगा कि जो भी हमारा लक्ष्य है, उसके पीछे लगे रहना चाहिए।' परीक्षा पास करने के बाद घर पहुंचा नीलेश 24 साल के नीलेश अहिरवार के इसी घर में इन दिनों खुशी का माहौल है। गांववाले भी खुश हैं। पूछने पर एक शख्स ने तुरंत नीलेश के घर का पता बता दिया। यहां पहुंचे, तो पता चला कि यूपीएससी क्रैक करने के बाद नीलेश भी पिता के साथ पहली बार भोपाल से घर पहुंचा था। यहां आंगन में मां जानकी बाई आंगन में झाडू लगा रही थीं। वह बेटे को देखते ही चेहरे पर चमक आ गई। नीलेश ने दौड़कर मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। खुशी के मारे मां की आंखें भर आईं। पिता ने बेटे को गले से लगा लिया। इसी बीच, हमने भी घर पहुंचकर अपना परिचय दिया। मां ने कहा- बेटे ने हमारे परिवार का नाम रोशन किया है। गांव, परिवार के लोगों को गर्व नीलेश की नानी कमलाबाई बताती हैं, ‘नाती ने हमारा सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। हम तो नहीं पढ़े। घर के मोड़ा-मोड़ी (बेटे-बेटी) पढ़ते रहे और आगे बढ़े।’ गांव के हरपाल सिंह तोमर बताते हैं कि यह गांव के लिए बड़ी उपलब्धि है। नीलेश के पिता मजदूरी करते थे। नीलेश के चाचा भाईजी अहिरवार ने कहा- परिवार में 7 पीढ़ी में कोई व्यक्ति इतना पढ़ा-लिखा नहीं था। यह भी पढ़ें- आईएएस की बेटी छाया सिंह को UPSC में 65वीं रैंक संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने मंगलवार को सिविल सर्विसेस परीक्षा 2023 का रिजल्ट घोषित कर दिया है। इसमें भोपाल की छाया सिंह ने 65वां स्थान हासिल किया है। छाया सिंह, आईएएस छोटे सिंह की बेटी हैं। भोपाल के डॉक्टर सचिन गोयल को 209वीं और समीर गोयल को 222वीं रैंक मिली है। दोनों सगे भाई हैं। पढ़ें पूरी खबर

पिता राज मिस्त्री, मां अनपढ़, बेटा बनेगा अफसर:​​​​​​​नर्मदापुरम के युवक ने टीनशेड के किचन में पढ़ाई कर क्लियर किया UPSC का एग्जाम
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के 16 अप्रैल को आए रिजल्ट में नर्मदापुरम के नीलेश अहिरवार ने 916 रैंक हासिल की है। यह उनका तीसरा प्रयास था। नीलेश की सफलता की चर्चा इसलिए हो रही है, क्योंकि उनके परिवार की 7 पीढ़ियों में कोई इतना नहीं पढ़ा। दूसरी क्लास तक पढ़े पिता राज मिस्त्री हैं। मां और दादी-नानी ने तो स्कूल की शक्ल तक नहीं देखी। कच्चे घर में रहने वाले नीलेश का अफसर बनने तक का सफर आसान नहीं था। दैनिक भास्कर की टीम नर्मदापुरम से 70 किलोमीटर दूर ईशरपुर गांव पहुंची। यहां नीलेश के माता-पिता ने बेटे के संघर्ष की कहानी बताई। पहले नीलेश के घर का माहौल जानिए गांव में 12 बाय 26 वर्गफीट का 2 कमरे का कच्चा घर है। कबेलू-टीन की छत डली है। टूटी-फूटी दीवारें हैं। बोरियों में भरी रेत की सीढ़ियां बनाई हैं। घर से 25 फीट दूर कच्चा टॉयलेट है। किचन में ही मिट्‌टी और गैस के चूल्हे के पास स्टडी टेबल और कुर्सी रखी है। इस पर किताबें रखी हैं। यह किचन कम स्टडी रूम ज्यादा है। दीवार पर डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर व स्लोगन लिखे हैं। इसी कमरे में रोजाना करीब 8 घंटे से ज्यादा पढ़ते हैं नीलेश। दूसरे कमरे में सभी लोग सोते हैं। छोटा भाई हर्ष अहिरवार भोपाल में रहकर पढ़ाई करता है। माता-पिता बोले- पढ़े नहीं, लेकिन बेटों को अफसर बनाने की ठानी नीलेश के पिता रामदास अहिरवार कहते हैं, ‘मेरे लिए यह सबसे बड़ा खुशी का मौका है। जब रिश्तेदारों के बीच बैठता था, तो दूसरे बताते थे कि बेटा पढ़ाई करने कोई ग्वालियर में है, तो कोई कहता भोपाल में है। यह सुनकर मुझे लगता था कि हमारे बेटों को हम क्यों पीछे रखें। मैंने बच्चों से कहा- आप पढ़ाई करो। खर्च हम उठा लेंगे। आर्थिक रूप से परेशानियां आईं, लेकिन पीछे नहीं हटा। ज्यादा मेहनत की। घरेलू उपयोग के सामान खरीदने पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। वहीं, कई राज मिस्त्री शराब पीकर पैसों की बर्बादी करते हैं। मेरी अपील है कि बच्चों को पढ़ाएं।' नीलेश की मां जानकी बाई बताती हैं, 'आर्थिक तंगी के कारण शिक्षा से वंचित रहे। जिंदगी अभाव में जी। घर में कोई भी चीज करने के बजाय बेटों की पढ़ाई पर खर्च किया। उसे मोबाइल, टैबलेट दिलाया, ताकि पढ़ाई में दिक्कत न हो। नीलेश बोले- अधिकतर समय सेल्फ स्टडी में लगाया यूपीएससी क्रैक करने वाले नीलेश ने बताया-’ 'बीटेक के बाद घर पर ही सिविल सर्विस की तैयारी शुरू कर दी थी। 2 साल अधिकतर समय सेल्फ स्टडी में लगाया। इंटरनेट की मदद ली। घर पर ही 2 कमरे के मकान में से किचन को स्टडी रूम बना लिया। यहां तपती धूप और चूल्हे, गैस-चूल्हे की तपन के बीच टीन की छत वाले कमरे में खुद को तपाया। गांव में गर्मियों में लाइट ज्यादा काटी जाती है। ऐसे में स्टडी नहीं हो पाती। जिस कारण 2021 और 2022 में प्री परीक्षा दी, पर फेल हो गया।' 'सोशल मीडिया पर मिले उत्तर प्रदेश के मित्र विपुल गर्ग ने पढ़ाई के लिए भोपाल जाने की सलाह दी। इसके बाद 2023 में भोपाल में किराए से कमरा लेकर रहने लगा। एक-दो सब्जेक्ट्स की कोचिंग की। मई 2023 में प्रीलिम्स क्लियर हो गया। इसके बाद कुछ साथियों ने बताया- मेन्स की तैयारी के लिए दिल्ली जाने की सलाह दी। दिल्ली में 3 महीने की कोचिंग ली। इसके बाद वापस गांव आ गया। 8 दिसंबर 2023 को एग्जाम दिया। फिर इंटरव्यू की तैयारी के लिए भी दोबारा दिल्ली गया।’ लक्ष्य के पीछे लगे रहो- नीलेश नीलेश बताते हैं ‘ 'पहले 2 बार प्रीलिम्स पास कर पाए थे। तीसरी बार में सफलता हासिल हुई है। एजुकेशन ही ऐसा सेक्टर है, जहां हम अपना स्तर उठा सकते हैं। आर्थिक, सामाजिक समस्याएं हैं, सामाजिक सशक्तिकरण के लिए व्यक्तिगत रूप से आगे बढ़ने के लिए यह अच्छा जरिया है। पढ़ाई के लिए सबसे बड़ी समस्या बिजली रही। गांव में माहौल भी ऐसा नहीं मिल पाता। घर में किचन कम स्टडी रूम ज्यादा रहा है। टेलीविजन से दूरी बनाकर रखी। सोशल मीडिया जैसे टेलीग्राम, यूट्यूब का सदुपयोग किया। कहना चाहूंगा कि जो भी हमारा लक्ष्य है, उसके पीछे लगे रहना चाहिए।' परीक्षा पास करने के बाद घर पहुंचा नीलेश 24 साल के नीलेश अहिरवार के इसी घर में इन दिनों खुशी का माहौल है। गांववाले भी खुश हैं। पूछने पर एक शख्स ने तुरंत नीलेश के घर का पता बता दिया। यहां पहुंचे, तो पता चला कि यूपीएससी क्रैक करने के बाद नीलेश भी पिता के साथ पहली बार भोपाल से घर पहुंचा था। यहां आंगन में मां जानकी बाई आंगन में झाडू लगा रही थीं। वह बेटे को देखते ही चेहरे पर चमक आ गई। नीलेश ने दौड़कर मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। खुशी के मारे मां की आंखें भर आईं। पिता ने बेटे को गले से लगा लिया। इसी बीच, हमने भी घर पहुंचकर अपना परिचय दिया। मां ने कहा- बेटे ने हमारे परिवार का नाम रोशन किया है। गांव, परिवार के लोगों को गर्व नीलेश की नानी कमलाबाई बताती हैं, ‘नाती ने हमारा सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। हम तो नहीं पढ़े। घर के मोड़ा-मोड़ी (बेटे-बेटी) पढ़ते रहे और आगे बढ़े।’ गांव के हरपाल सिंह तोमर बताते हैं कि यह गांव के लिए बड़ी उपलब्धि है। नीलेश के पिता मजदूरी करते थे। नीलेश के चाचा भाईजी अहिरवार ने कहा- परिवार में 7 पीढ़ी में कोई व्यक्ति इतना पढ़ा-लिखा नहीं था। यह भी पढ़ें- आईएएस की बेटी छाया सिंह को UPSC में 65वीं रैंक संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने मंगलवार को सिविल सर्विसेस परीक्षा 2023 का रिजल्ट घोषित कर दिया है। इसमें भोपाल की छाया सिंह ने 65वां स्थान हासिल किया है। छाया सिंह, आईएएस छोटे सिंह की बेटी हैं। भोपाल के डॉक्टर सचिन गोयल को 209वीं और समीर गोयल को 222वीं रैंक मिली है। दोनों सगे भाई हैं। पढ़ें पूरी खबर