महज एक सैलरी काफी नहीं:नौकरी के साथ युवा मनपसंद काम कर बना रहे अपनी पहचान, 57% पार्ट टाइम जॉब भी कर रहे
महज एक सैलरी काफी नहीं:नौकरी के साथ युवा मनपसंद काम कर बना रहे अपनी पहचान, 57% पार्ट टाइम जॉब भी कर रहे
दुनियाभर के युवाओं खासकर ‘जेन जी’ में करियर को लेकर बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। अब युवा केवल एक नौकरी के भरोसे रहने के बजाय अपनी कमाई और शौक के लिए ‘दूसरे रास्ते’ तलाश रहे हैं। अमेरिका में हुए सर्वे (हैरिस पोल) के अनुसार जहां 57% युवा पार्ट टाइम जॉब, फ्रीलांसिंग या साइड हसल (जैसे पॉडकास्ट, कंटेंट क्रिएशन या इलस्ट्रेशन) कर रहे हैं, ताकि उन्हें आर्थिक स्थिरता के साथ अपने सपनों को जीने की आजादी भी मिल सके। न्यूयॉर्क में इंजीनियर भारतीय मूल की आशना दोषी नौकरी के साथ पॉडकास्ट और सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाती हैं। यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, जहां युवा मुख्य नौकरी के अलावा असली पहचान अपने जुनून वाले कामों से बना रहे हैं। ट्रेंड: ‘कई हुनर-कई कमाई’ का फॉर्मूला अपना रहे युवा आशना जैसी युवा प्रोफेशनल्स के लिए यह अतिरिक्त काम एक ‘सुरक्षा कवच’ की तरह है। टेक सेक्टर में बढ़ती छंटनी और एआई के कारण अनिश्चितता ने जेन-जी को डरा दिया है। उन्हें लगता है कि आज नौकरी है, शायद कल न रहे; ऐसे में खुद का कोई काम उन्हें आत्मनिर्भर बनाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवा अलग-अलग प्रोजेक्ट्स के जरिए अपना ‘फ्यूचर पोर्टफोलियो’ तैयार कर रहे हैं। इससे न केवल आमदनी बढ़ती है, बल्कि मानसिक सुकून भी मिलता है। निजी काम आजादी और रचनात्मकता ज्यादा देता है न्यूयॉर्क की सेन हो ड्यूटी के बाद डिजिटल पेंटिंग और ग्राफिक्स का काम करते हैं। वे दिन में स्टोर की नौकरी और रात में अपने हुनर को क्लाइंट्स तक पहुंचाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक भविष्य में कंपनियां केवल वेतन पर युवाओं को नहीं रोक पाएंगी, उन्हें काम में लचीलापन देना ही होगा।
दुनियाभर के युवाओं खासकर ‘जेन जी’ में करियर को लेकर बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। अब युवा केवल एक नौकरी के भरोसे रहने के बजाय अपनी कमाई और शौक के लिए ‘दूसरे रास्ते’ तलाश रहे हैं। अमेरिका में हुए सर्वे (हैरिस पोल) के अनुसार जहां 57% युवा पार्ट टाइम जॉब, फ्रीलांसिंग या साइड हसल (जैसे पॉडकास्ट, कंटेंट क्रिएशन या इलस्ट्रेशन) कर रहे हैं, ताकि उन्हें आर्थिक स्थिरता के साथ अपने सपनों को जीने की आजादी भी मिल सके। न्यूयॉर्क में इंजीनियर भारतीय मूल की आशना दोषी नौकरी के साथ पॉडकास्ट और सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाती हैं। यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, जहां युवा मुख्य नौकरी के अलावा असली पहचान अपने जुनून वाले कामों से बना रहे हैं। ट्रेंड: ‘कई हुनर-कई कमाई’ का फॉर्मूला अपना रहे युवा आशना जैसी युवा प्रोफेशनल्स के लिए यह अतिरिक्त काम एक ‘सुरक्षा कवच’ की तरह है। टेक सेक्टर में बढ़ती छंटनी और एआई के कारण अनिश्चितता ने जेन-जी को डरा दिया है। उन्हें लगता है कि आज नौकरी है, शायद कल न रहे; ऐसे में खुद का कोई काम उन्हें आत्मनिर्भर बनाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवा अलग-अलग प्रोजेक्ट्स के जरिए अपना ‘फ्यूचर पोर्टफोलियो’ तैयार कर रहे हैं। इससे न केवल आमदनी बढ़ती है, बल्कि मानसिक सुकून भी मिलता है। निजी काम आजादी और रचनात्मकता ज्यादा देता है न्यूयॉर्क की सेन हो ड्यूटी के बाद डिजिटल पेंटिंग और ग्राफिक्स का काम करते हैं। वे दिन में स्टोर की नौकरी और रात में अपने हुनर को क्लाइंट्स तक पहुंचाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक भविष्य में कंपनियां केवल वेतन पर युवाओं को नहीं रोक पाएंगी, उन्हें काम में लचीलापन देना ही होगा।
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