हादसे पर सवाल:105 एमएम गन का गोला टारगेट से पहले हवा में फटा; जवान की मौत, 2 साथी घायल
पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में अभ्यास के दौरान हुए हादसे में बीएसएफ के एक जवान की मौत हो गई वहीं दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए पहले पोकरण अस्पताल और बाद में जोधपुर स्थित मिल्ट्री अस्पताल रेफर कर दिया गया।
मंगलवार की देर शाम पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में गुजरात फ्रंटियर की 1077 बटालियन अभ्यास कर रही थी। 105 एमएम गन से फायर किए जा रहे हैं। अचानक एक गन से हुआ फायर टारगेट तक नहीं पहुंचा और रास्ते में हवा में फट गया। गोला बारूद के साथ उसके टुकड़े चारों तरफ बिखरे जिसमें से कुछ टुकड़े जहां से फायर हुआ था उसके पास स्थित एक और गन के पास आकर गिरे। गन से फायर की तैयारी में लगे सतीश कुमार के सीने में आकर लगे। जिससे उनकी मौत हो गई।
80 से 100 मीटर पीछे तक गोला बारूद बिखरा है
मंगलवार की देर शाम अभ्यास के दौरान तीन चार गनों से फायर किए जा रहे थे। 105 एमएम गन से जब फायर किया गया तो करीब 80 से 100 मीटर पर ही हवा में विस्फोट हो गया। जहां से फायर किया उसके पास स्थित गन पर तैनात गनर को गोला बारूद आकर लगा और उसकी मौत हो गई।
चार दिन पहले भी एक ही दिन में दो हादसे हुए थे
गत शनिवार को इसी फायरिंग रेंज में 105 एमएम गन का बैरल फटा था और एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गया था। गनीमत रही कि उस हादसे में किसी की मौत नहीं हुई। वहीं उसी दिन जम्मू कश्मीर में भी 105 एमएम गन के बैरल फटने की घटना हुई थी।
आगरा के रहने वाले थे शहीद सतीश कुमार,पार्थिव देह पैतृक गांव रवाना की
हादसे में मारे गए जवान सतीश कुमार उत्तरप्रदेश के आगरा के रहने वाले थे। बुधवार सुबह घटना की जानकारी के बाद लाठी पुलिस थाने से सहायक उपनिरीक्षक दीपाराम मय जाब्ते के घटनास्थल पहुंचे। शव का बुधवार सुबह पोकरण चिकित्सालय से पोस्टमार्टम करने के बाद बीएसएफ के अधिकारियों को सुपुर्द कर दिया गया। बीएसएफ ने सशस्त्र सलामी देने के बाद शव को पैतृक स्थान पर भिजवा दिया गया है। वहीं अन्य दो घायल जवानों आबिद अली और महेशचंद्र को प्राथमिक उपचार के बाद जोधपुर स्थित सेना के हॉस्पिटल के लिए रेफर कर दिया गया है।
सवाल: आखिर कब तक होगी हादसों की अनदेखी
जानकारी के अनुसार 105 एमएम गन 1972 में बनी थी। इसे इंडियन फ्लाइंग गन कहा जाता है। इसकी मारक क्षमता 17 किमी तक है। उस समय से लेकर अब तक आर्मी व बीएसएफ इसका उपयोग कर रही है। लेकिन अब यह गन खतरा बनती जा रही है। लगातार हादसे होने से अब इस गन को सेना में शामिल रखने पर गंभीरता से विचार करने व जांच करने की जरूरत है।


