समझौता वार्ता शुरू होते ही प्रदर्शनकारियों ने शाम 4 बजे आधे खेरवाड़ा पर कब्जा किया

समझौता वार्ता शुरू होते ही प्रदर्शनकारियों ने शाम 4 बजे आधे खेरवाड़ा पर कब्जा किया

शिक्षक भर्ती के अनारक्षित पद एसटी अभ्यर्थियों से भरने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी शनिवार को दिनभर शांत रहे। दूसरी ओर शुक्रवार की पूरी रात खेरवाड़ा से करीब तीन किमी दूर मोथली पुलिया पर डटी पुलिस सुबह यहां से ढाई किमी दूर डूंगरपुर रोड पर भुवाली पुलिया की ओर बढ़ी। शाम सवा चार बजे एक तरफ परसाद में सीडब्ल्यूसी सदस्य रघुवीर मीणा के घर मंत्री अर्जुन बामणिया की मौजूदगी में दोनों पक्षों की बातचीत शुरू हुई ही थी कि इधर आंदोलनकारियों ने दबाव बनाने के लिए आधे खेरवाड़ा को घेरकर तोड़-फोड़ और आगजनी शुरू कर दी।

दो बार झड़प के बाद जाब्ते को भी जान बचाने के लिए भागना पड़ा। उपद्रवियों ने आधे कस्बे के होटल-मकान सहित 5 जगह आगजनी कर दी, जिसके बाद पुलिस ने फायरिंग कर सबको कस्बे से खदेड़ दिया। इससे पहले कस्बेवासियों ने भी पुलिस की मदद और उपद्रवियों के खिलाफ लाठी-पत्थर उठा लिए। हालांकि रात करीब एक बजे प्रदर्शनकारी फिर आ धमके।

इधर, सरकार और प्रतिनिधियाें की बैठक में डूंगरपुर जिले की चौरासी विधानसभा से बीटीपी विधायक राजकुमार रोत सहित पार्टी नेता, सरकार की तरफ से सीडब्ल्यूसी सदस्य मीणा, जनजाति मंत्री अर्जुन बामनिया और पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा थे। विधायक रोत ने कहा कि प्रशासन की लापरवाही और सरकार की कमजोरी से विवाद बढ़ा। न अभ्यर्थियों ने हिंसा की, न कोई बाहरी ताकत आई।

सीडब्ल्यूसी सदस्य मीणा ने कि सीएम से बात कर रास्ता निकालेंगे। अशांति क्षेत्र के लिए ठीक नहीं है। इससे पहले वीसी के जरिए सीएम से बातचीत में बीटीपी प्रदेशाध्यक्ष डॉ. वेलाराम घोघरा ने कहा कि कांग्रेसी नेताओं ने सरकार को सही फीडबैक नहीं दिया।

आईजी बिनीता ठाकुर ने कहा-

लोग उग्र होकर खेरवाड़ा की तरफ बढ़े थे। जाब्ते को वापस तैनात कर उन्हें माेथली पुलिया की तरफ खदेड़ा। पुलिस और प्रशासन मौके पर हैं। कॉलोनी वालों को भी सुरक्षित कर दिया है।

आंदोलन या साजिश? बीटीपी, कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने

आदिवासी हिंसक नहीं, कांग्रेस-भाजपा की चाल: डॉ. वेला राम, प्रदेश अध्यक्ष, बीटीपी

अभ्यर्थियों के इस सामाजिक आंदोलन का बीटीपी समर्थन करती है। पार्टी ने यह मांग बार-बार उठाई। हाल ही गहलोत सरकार को बीटीपी ने 17 सूत्री मांगपत्र के साथ समर्थन दिया था। पहली मांग इन अभ्यर्थियों की ही थी, लेकिन हल नहीं निकाला। जबकि कांग्रेस के पूर्व सांसद भगोरा सहित कई कांग्रेसी नेता इस पर समर्थन दे चुके। सरकार ने नियुक्तियां नहीं दी, तो हम समर्थन वापस ले लेंगे। आदिवासी कभी हिंसात्मक रवैया नहीं अपनाता। हिंसा तो बीजेपी और कांग्रेस की चाल है।

गुजरात-एमपी से आए लोग भड़का रहे हिंसा: रघुवीर मीणा, सीडब्ल्यूसी सदस्य

हिंसा प्रशासन की नाकामी से हुई। मांगें चाहे जो हों, अधिकारियों का दायित्व था कि आंदोलनकारियों से बात करते। आंदोलन में एमपी, गुजरात से बाहरी लोग घुस आए हैं। सरकार ने तो पहल की थी और पहले भी कांग्रेस नेता प्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहे थेे। सीएम गहलोत लगातार मामले की जानकारी ले रहे हैं। भाजपा अगर इसे कांग्रेस-बीटीपी की मिलीभगत कहती है तो यह उसका साेचना है। पार्टी या सरकार क्यों चाहेगी कि खूनी संघर्ष हो। हम लगातार शांति की अपील कर रहे हैं।

बीटीपी और कांग्रेस की मिलीभगत से हुई हिंसा: गुलाबचंद कटारिया, नेता प्रतिपक्ष

जो भी इसके जिम्मेदार हैं, उनकी पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए। बीटीपी ने हिंसा करवाई है, अब बहानेबाजी क्यों। कलेक्टर, आईजी, एसपी सहित पूरा अमला मौके पर था। उनकी आंखों के सामने खेरवाड़ा को जला दिया। सब तमाशा देखते रहे। सरकार ने 17 दिन तक समाधान की दिशा में कोई पहल नहीं की। अब नींद खुली। सरकार की साझेदार पार्टी के लोगों ने खेरवाड़ा को जला दिया और सरकार सोती रही। भाजपा नियमों का समर्थन करती है। नियमों के तहत ही पद भरे जाने चाहिए।

भास्कर लाइव : मोर्चा छोड़ने वालों के खींचे फोटो

भागते जवानों को चीख-चीखकर बुलाती रहीं आईजी और डीएसपी

उदयपुर जिले के खेरवाड़ा में शनिवार को उपद्रवियों ने पथराव किया तो जवान मोर्चा संभाले अपने ही अफसरों को छोड़ भागे। डीएसपी प्रेम धणदे चीख-चीखकर इन्हें लौटने के लिए कहती रहीं।
उदयपुर जिले के खेरवाड़ा में शनिवार को उपद्रवियों ने पथराव किया तो जवान मोर्चा संभाले अपने ही अफसरों को छोड़ भागे। डीएसपी प्रेम धणदे चीख-चीखकर इन्हें लौटने के लिए कहती रहीं।

पथराव से भागी पुलिस माेथली पुलिया पर पहुंची। जवान डरे हुए थे। फ्रंट पर आईपीएस कालू राम रावत, एएसपी गाेपाल स्वरूप मेवाड़ा, इंस्पेक्टर संजीव स्वामी, हिमांशु सिंह सहित अन्य अधिकारी डटे रहे, लेकिन जाब्ता आगे नहीं बढ़ा। आईजी बिनीता ठाकुर, डीएसपी प्रेम धणदे और प्रशिक्षु आईपीएस रंजीता शर्मा ने माेर्चा संभाला। तीनाें चिल्लाते हुए कांस्टेबल काे आगे बढ़ कार्रवाई काे कहती रहीं, लेकिन नाकाम रहीं। यह सब 6.15 बजे से 10 मिनट तक चला। इधर, पथराव पर पुलिस फिर भागी और खेरवाड़ा बस स्टैंड पहुंची। पीछे-पीछे उपद्रवी भी कस्बे में घुस आए। आगजनी की। पुलिस ने फायर कर खदेड़ा।

शाम 5.38 बजे : एकाएक पथराव

सुबह से उपद्रवी हाईवे से सटी पहाड़ियों पर थे। इधर, जाब्ते ने 9 बजे से पहले माेथली पुलिया से 2.5 किमी दूर भुवाली पुल और पास का पेट्राेल पंप कैप्चर किया। पुलिस हाईवे पर थी, जहां दाेनाें तरफ पहाड़ियाें पर उपद्रवी थे। शाम 4.18 बजे पहले 70-80 उपद्रवी उतरे और पथराव शुरू दिया। इधर, जाब्ते ने 100 से ज्यादा पंप एक्शन गन और आंसू गैस के गाेले छाेड़े। एक घंटे यही चला। 5.38 बजे अचानक एक तरफ की पहाड़ी से उपद्रवियाें की संख्या 70 से 300 से ज्यादा पहुंच गई। इस वक्त भी जवानों को एकबारगी कदम पीछे लेने पड़े।