डॉ. एम. चंद्रशेखर का कॉलम:स्टार्टअप्स को बेसिक चीजों से कभी समझौता नहीं करना चाहिए

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डॉ. एम. चंद्रशेखर का कॉलम:स्टार्टअप्स को बेसिक चीजों से कभी समझौता नहीं करना चाहिए
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स्टार्ट अप्स ने शुरुआती दिनों में ग्राहक जोड़ने के लिए गुणवत्ता और अच्छी सर्विस सुनिश्चित करते हुए इसमें काफी पैसा खर्च किया। उन्होंने ग्राहकों का फीडबैक सुना, उसका सम्मान किया और एक तयशुदा समय में कदम उठाए। हर स्टार्टअप के लिए शुरुआती दिन निर्णायक होते हैं, इसलिए वे ग्राहकों की संतुष्टि, सुरक्षा और उन्हें खुश रखने की हरसंभव कोशिश करते हैं।

इस तरह की आदतों से बड़ी संख्या में ग्राहक बनते हैं और लंबे समय तक साथ जुड़े रहते हैं। इस ‘ग्राहक केंद्रित कार्यशैली’ का कुछ स्टार्टअप अभी भी पालन कर रहे हैं, जबकि कई ऐसे स्टार्टअप भी हैं, जिन्होंने शुरुआती सफलता के बाद ग्राहकों की संतुष्टि और उनके फीडबैक को हाशिए पर रख दिया है।

स्टार्टअप की सफलता का अंदाजा सिर्फ बैलेंस शीट देखकर लगाना उचित नहीं, क्योंकि यह उनके सीखने और आगे बढ़ने का दौर है। कई स्टार्टअप ने अपने बिजनेस को विविधतापूर्ण बनाते हुए निवेशकों को खुश रखा है, पर सिर्फ इतने से बात नहीं बनने वाली। नए उत्पाद-सेवाएं शुरू करने की ललक के चलते स्टार्टअप आगे तो बढ़ते हैं, पर इस दौरान वे अपने शुरुआती या मूल उत्पाद पर ध्यान देना कम कर देते हैं, जिन पर उनकी साख टिकी होती है।www.jaimamart.com

उदाहरण के तौर पर कुछेक ने शुरुआती दौर की एडऑन सर्विस देना बंद कर दी हैं। शीर्ष पर पहुंचने के बाद स्टार्टअप संसाधनों का सही तरह से प्रबंधन नहीं करते, खासकर वर्कफोर्स के संबंध में। यहीं से चुनौतियां बढ़ना शुरू हो जाती हैं। सबसे जरूरी बात कि इस लगातार बदलती दुनिया में स्टार्टअप अपनी सुविधा से नौसिखिए जैसा व्यवहार नहीं कर सकते। कैब, ऑटो या मोटरसाइकिल से जुड़े कुछ स्टार्टअप्स ने ग्राहकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना बंद कर दिया है। गाड़ियों की हालत, ग्राहकों की रेटिंग पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, नतीजतन ग्राहक भी विकल्प तलाशने लगे हैं।

बाजार धीमा है, ऐसे में फंडिंग को लेकर भी समस्याएं हो रही हैं। केपिटल मार्केट कंपनी ट्रैक्सएन टेक्नोलॉजीज़ की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 में 2404 स्टार्टअप ने अपना कामकाज समेट दिया। यह 2021 के मुकाबले लगभग दोगुना है। इनमें 266 स्टार्टअप तो ऐसे थे, जिन्हें संस्थागत निवेशक, वेंचर कैपिटलिस्ट और एंजिल इन्वेस्टर भी मिले थे।

स्टार्टअप कर्मचारी, उनकी तनख्वाह, भत्ते और कामकाजी घंटों को लेकर भी भ्रमित हैं। लगातार हो रहे अधिग्रहण से इन स्टार्टअप में काम करने वाले युवा भी लगातार कंफ्यूज बने रहते हैं। इस प्रक्रिया में फीडबैक लगातार नजरअंदाज होता रहता है। ये सारी छोटी-छोटी चीजें आगे चलकर स्टार्टअप के इकोसिस्टम पर असर डालती हैं।

स्टार्टअप्स को बेसिक चीजों से समझौता नहीं करना चाहिए। अंतिम उत्पाद अच्छा हो, ग्राहकों का फीडबैक सुना जा रहा हो, उनकी संतुष्टि का ख्याल रखा जा रहा हो, तो उनकी सफलता सुनिश्चित है।

अंतिम उत्पाद अच्छा हो, ग्राहकों के फीडबैक पर बराबर ध्यान दिया जा रहा हो और उनकी संतुष्टि का ख्याल रखा जाना बेहद जरूरी है। स्टार्टअप्स को बेसिक चीजों से समझौता नहीं करना चाहिए।