किम जोंग उन की मिस्ट्री ट्रेन के किस्से:हर कोच बुलेटप्रूफ, टॉप स्पीड 59 किमी/घंटा

किम जोंग उन की मिस्ट्री ट्रेन के किस्से:हर कोच बुलेटप्रूफ, टॉप स्पीड 59 किमी/घंटा

नॉर्थ कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन मंगलवार को रूस पहुंचे। इस दौरे की वजह से उनकी प्राइवेट ट्रेन एक बार फिर सुर्खियों में है। प्योंगयांग से रूस के व्लादिवोस्तोक शहर तक का सफर उन्होंने इसी ट्रेन से तय किया। 1180 किमी के इस सफर में उन्हें 20 घंटे लगे।

किम जोंग-उन फ्लाइट के बजाय ट्रेन से ही क्यों सफर करते हैं?

  • नॉर्थ कोरियाई ट्रांसपोर्ट मामलों के जानकार अहन ब्युंग-मिन के मुताबिक किम जोंग-उन और उनके परिवार के ट्रेन से सफर करने को लेकर स्पष्ट वजह अब तक नहीं बताई गई है।
  • हवाई सफर के दौरान हमले का डर ज्यादा होता है इसलिए संभव है कि सुरक्षा कारणों से वो ट्रेन का सफर करते हों। किम जोंग-उन के इस तरह के दौरे में कई ट्रेनों की जरूरत होती हैं।
  • किम जोंग-उन के दादा और पिता भी ट्रेन से ही विदेश दौरा करते थे। हो सकता है उसी परंपरा को निभाने के लिए किम जोंग-उन ट्रेन से सफर करते हों।

किम जोंग के दादा और पिता भी ट्रेन से सफर करते थे

लंबी दूरी या विदेश जाने के लिए ट्रेन से यात्रा करने की परंपरा किम जोंग-उन के दादा किम इल-सुंग ने शुरू की थी। उन्होंने वियतनाम और पूर्वी यूरोप की यात्राओं के लिए अपनी ट्रेन का इस्तेमाल किया था।

एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक किम जोंग-उन के दादा हवाई यात्रा करने से डरते थे। इस बात की संभावना है कि उनके अंदर ये डर तब पैदा हुआ जब एक बार उनके जेट में विस्फोट हो गया था।

किम जोंग-उन के पिता किम जोंग-इल ने उत्तर कोरिया पर 1994 से 2011 तक शासन किया था। इस दौरान 2001 में मॉस्को के लिए उन्होंने 10 दिन की यात्रा ट्रेन से की थी।

सोवियत यूनियन ने गिफ्ट में दी थी पहली ट्रेन
साउथ और नॉर्थ कोरिया के बीच 1950 से शुरू होकर 1953 तक जंग चली। इसी समय रूस के शासक जोसेफ स्टालिन ने नॉर्थ कोरिया के शासक को एक ट्रेन गिफ्ट में दी थी।

उन्होंने इस ट्रेन को वॉर हेडक्वार्टर के तौर पर इस्तेमाल किया। इसी ट्रेन के जरिए जंग को लेकर रणनीति बनाई जाने लगी। बाद में इस ट्रेन को शाही ट्रेन के तौर पर जाना गया।

सिर्फ ट्रेन नहीं, चलता-फिरता किला
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट मुताबिक, किम जोंग-उन की ट्रेन को जमीन और आसमान से सुरक्षा दी जाती है। ट्रेन के आगे 100 से ज्यादा तेज-तर्रार सुरक्षा बलों का एक दस्ता चलता है।

हर स्टेशन पर बारीकी से सुरक्षा बल ट्रेन की जांच करते हैं। उस रूट से गुजरने वाली सभी ट्रेनों को डायवर्ट कर दिया जाता है। किसी भी तरह के आसमानी हमले को रोकने के लिए नॉर्थ कोरिया एयर फोर्स का सोवियत मेड IL-76 एयरक्राफ्ट और Mi-17 हेलिकॉप्टर इस ट्रेन के साथ-साथ उड़ान भरते हैं।

किम जोंग-उन की ट्रेन के आगे एक ट्रेन एडवांस सिक्योरिटी यानी ट्रैक और बाकी दूसरे खतरों को चेक करते हुए आगे बढ़ती है। इन ट्रेनों पर सुरक्षा एजेंटों की कड़ी निगरानी होती है जो बम और अन्य खतरों के लिए मार्गों और आगामी स्टेशनों को स्कैन करते हैं।

किम जोंग-उन की ट्रेन के पीछे एक ट्रेन अतिरिक्त सुरक्षाबलों के जवान और बॉडीगार्ड को लेकर चलती है।

बुलेटप्रूफ के भार की वजह से धीमी चलती है
किम जोंग उन की ट्रेन सामान्य ट्रेनों की तुलना में ज्यादा भारी होती है। यही वजह है कि ये ट्रेन एक घंटे में अधिकतम 59 किलोमीटर की दूरी तय कर पाती है। भारत में सामान्य ट्रेनें भी 100-120 किलोमीटर की रफ्तार पकड़ लेती हैं।

इसके अलावा यह ट्रेन सोवियत यूनियन के वक्त की बनी है, जिसमें कई सारे बदलाव किए गए हैं। यह भी उसके कम रफ्तार की एक वजह है। टोलरोया बताते हैं कि किम जोंग-उन इस ट्रेन के सिर्फ दो कोच एक पर्सनल और दूसरा ऑफिशियल उद्देश्यों से इस्तेमाल करते हैं।

विदेशी खाने और मनोरंजन का भी इंतजाम
रूसी सेना के अधिकारी कॉन्स्टेंटिन पुलिकोव्स्की किम जोंग-इल के साथ इस ट्रेन में सफर कर चुके हैं। उन्होंने अपनी किताब 'ओरिएंट एक्सप्रेस' में बताया है कि ये ट्रेन पुतिन की ट्रेन से भी ज्यादा आरामदायक है। इसमें रूसी, चीनी, कोरियाई, जापानी… तमाम तरह के विदेशी भोजन का इंतजाम होता है।

पीली पट्टी और हरे रंग वाली इस ट्रेन के कॉन्फ्रेंस रूम और बेडरूम किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं हैं। सैटेलाइट टीवी और फोन के जरिए नॉर्थ कोरिया के शासक अपने देश के सीनियर अधिकारियों से हमेशा संपर्क में रहते हैं।

पुलिकोव्स्की का कहना है कि लंबे सफर के दौरान बोरियत से बचने के लिए पेरिस से लाई गई कीमती वाइन भी उन्हें परोसी गई। ट्रेन में मनोरंजन के लिए लेडी कंडक्टर्स की तैनाती खास तौर पर की गई है। ये सिंगिंग और डांसिंग करती हैं।