17 की उम्र में दो दोस्तों ने ज्वेलरी कंपनी बनाई:लोग कहते थे- बच्चे हैं, टाइम पास कर रहे; शार्क टैंक से मिले एक करोड़

17 की उम्र में दो दोस्तों ने ज्वेलरी कंपनी बनाई:लोग कहते थे- बच्चे हैं, टाइम पास कर रहे; शार्क टैंक से मिले एक करोड़

आपसे कहूं कि किसी बिजनेस या स्टार्टअप को शुरू करने की सही उम्र क्या होती है? 20 साल… 22 साल… 25 साल… अपनी पूरी स्टडी कंप्लीट करने के बाद…या म्यूच्योर होने के बाद, मार्केट समझने के बाद? लेकिन यदि मैं कहूं कि बिजनेस शुरू करने की कोई उम्र ही नहीं होती है। इंडिया में वोटर बनने की एज से पहले भी आप करोड़ों का बिजनेस खड़ा कर सकते हैं। फिर...?

पिछले दिनों जब ‘शार्क टैंक इंडिया सीजन-2’ में 19 साल के दो दोस्त- आदित्य फतेहपुरिया और राघव गोयल टीवी पर अपने रैपर्स ज्वेलरी प्रोडक्ट्स के साथ दिखे, तो सभी दंग रह गए। जज से लेकर व्यूअर तक…। जहां बड़े-बड़े बिजनेसमैन फंड नहीं ले पाते हैं, वहां इन दोनों को एक करोड़ का फंड मिला। दोनों ज्वेलरी बनाने वाली कंपनी जिल्लिओनैरे (zillionaire) के को-फाउंडर हैं।

इन्हीं दोस्तों की कहानी और इनके बिजनेस प्रोसेस को समझने के लिए मैं जयपुर के रामगंज बाजार पहुंचा। ‘पिंक सिटी’ के बीच आदित्य का घर है और इसी के सबसे टॉप पर इन्होंने फैक्ट्री लगा रखी है।

प्रोडक्शन यूनिट में आदित्य बन रहे ज्वेलरी की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। कारीगर अलग-अलग तरह की ज्वेलरी तैयार करने में लगे हुए हैं। दिलचस्प है कि आदित्य अपनी टीम में सबसे छोटे हैं। अभी तक उनकी ठीक से दाढ़ी-मूछ भी नहीं आई है, लेकिन ज्वेलरी बिजनेस के बारे में पूछने पर वो ऐसे बात करते हैं जैसे अच्छी-खासी उम्र और लंबा तजुर्बा हो।

आदित्य के साथ मेरी बातचीत का दौर शुरू होता है। शुरुआती दिनों के बारे में वो बताते हैं, ‘अभी तो हम 19 साल के हैं, लेकिन जब इस बिजनेस की शुरुआत की थी तो महज 17 साल के थे। इसके बारे में कुछ पता भी नहीं था। हम दोनों स्कूल के दोस्त हैं और अब बिजनेस पार्टनर। अभी राघव अमेरिका स्टडी के लिए गया हुआ है।'

आदित्य कहते हैं, 'बचपन से दुनियाभर के टॉप रैपर्स के दीवाने रहे हैं। स्कूल-घर कहीं भी बैठे-बैठे हम दोनों इन रैपर्स को सुनने लगते हैं। इनके स्टाइल भी हमें काफी इम्पैक्ट करते हैं। 2020 की बात है। कोरोना की वजह से लॉकडाउन लगा था, सभी अपने-अपने घरों में कैद थे।

कभी-कबार हम दोनों मिल भी लेते थे। ऐसे ही एक दिन हम दोनों रैपर्स को सुन रहे थे, उन्हें देख रहा था। तभी हम पर उनकी तरह का कॉस्टयूम पहनने का भूत सवार हो गया। लॉकडाउन में थोड़ी ढिल दी गई, तो हमने ज्वेलरी खोजनी शुरू की। लेकिन पूरे जयपुर में नहीं मिली। ऑनलाइन भी कुछ अच्छे कलेक्शन नहीं मिले। तब हमें लगा कि क्यों न इसे बनाना ही शुरू कर दें। खाली तो बैठे ही थे।'

हमारी बातचीत के बीच आदित्य के पापा ज्वेलरी रिलेटेड कुछ डिब्बे लेकर आते हैं। आदित्य कहते हैं, 'पापा का ज्वेलरी इंडस्ट्री में 3 दशक का अनुभव रहा है। 12वीं के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़कर इस बिजनेस को शुरू कर दिया था, लेकिन वो महिलाओं से रिलेटेड कॉस्टयूम ही बनाते हैं और फॉरेन में एक्सपोर्ट करते हैं।’

आदित्य ने अपनी गर्दन में एक मोटी क्यू शेप टाइप की चेन पहन रखी है। इस पर हाथ फेरते हुए वो कहते हैं, ‘इसे हमने 14 बार ट्राई करने के बाद बनाया था। जब राघव इसे अपने घर पहनकर गया, तो उसकी मम्मी ने डांटते हुए कहा कि क्या लड़कियों वाली चेन पहनकर आ गए हो।

तब मुझे लगा कि इंडिया में यूनिसेक्स ज्वेलरी के बारे में लोगों को पता ही नहीं है। जब मैं फैमिली के साथ फॉरेन ट्रिप पर जाता था, तो वहां के लोगों में रैपर्स को लेकर काफी क्रेज देखता था, जो अब इंडिया में भी दिख रहा है।

मैंने राघव के साथ मिलकर अपने पापा की फैक्ट्री में ही रैपर्स से रिलेटेड अलग-अलग डिजाइन की ज्वेलरी बनानी शुरू की। जब पहला प्रोडक्ट पापा ने देखा तो उन्होंने कहा कि तुम लोगों से कुछ नहीं हो पाएगा।

‘लेकिन हमने एक्सपेरिमेंट करना जारी रखा। कई महीने के बाद कुछ अच्छे प्रोडक्ट्स बना पाए। फाइनल प्रोडक्ट पहनकर जब स्कूल गया, तो दोस्तों को भी अच्छा लगने लगा। मार्केट जाता तो लोग पूछते कि कहां से खरीदे हो? फिर हमें लगा कि क्यों न इसे बेचा जाए।'

कहते-कहते आदित्य चुप हो जाते हैं।

क्या हुआ?

आदित्य कहते हैं कि इन्हीं दोस्तों और जानने वालों को जब मैं बताता था कि रैपर्स ज्वेलरी बना रहा हूं। इसका स्टार्टअप शुरू करूंगा, तो सभी मजाक उड़ाते थे। कहते थे कि कहां टाइमपास कर रहे हो। पढ़ना-लिखना नहीं है क्या? स्कूल टीचर को भी यही लगता था। हालांकि, मम्मी-पापा को भरोसा था कि हम लोग कुछ अच्छा तो जरूर कर लेंगे।

इन्हें बनाने के लिए पैसे थे आप दोनों के पास?

आदित्य बताते हैं, 'शुरुआत तो हमने शून्य से की थी। पापा की फैक्ट्री से ही ज्वेवरी बनाने के कुछ रॉ मटेरियल लिया और फिर उससे एक-दो प्रोडक्ट डिजाइन किया। हमने इंटरनेट से रैपर्स और इनसे जुड़ी ज्वेलरी के डिजाइन को कलेक्ट करना शुरू किया।

जब इंस्टाग्राम पर इसे पोस्ट किया, तो लोगों के रिस्पॉन्स आने शुरू हो गए। हमें नागपुर से पहला ऑर्डर 4 हजार रुपए की एक ज्वेलरी के मिला था। नए थे इसलिए नफा-नुकसान के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं था। हमें महज 600 रुपए का प्रॉफिट हुआ था। धीरे-धीरे हमने इसी पैसे को फिर से बिजनेस में लगाकर बूस्ट करना शुरू कर दिया।'