अलवर के राजगढ़-टहला तहसील में भ्रष्टाचार:एसडीएम ने बांट दी 2 हजार बीघा सरकारी, निजी भूमि, 7 माह से एसीबी जांच की मंजूरी नहीं
अलवर से 70 किमी दूर राजगढ़ और टहला तहसील में ‘प्रशासन गांवों के संग’ अभियान का लाभ उठाते हुए प्रशासन ने दो हजार बीघा सरकारी व निजी जमीन ‘चेहेतों’ को बांट दी। 10 हजार करोड़ रुपए का यह घोटाला एसीबी और कलेक्टर दोनों के संझान में है।
वे कार्रवाई के लिए सरकार को लिख भी चुके हैं, पर हैरत की बात है कि जांच तक की मंजूरी नहीं मिल रही। 16 ग्राम पंचायतों के 50 गांवों के लोग कलेक्टर व एसीबी के दफ्तर तक चक्कर लगा रहे हैं।
एसीबी के आईजी 7 माह पहले भ्रष्टाचार की जांच को सरकार से स्वीकृति मांग चुके हैं। आरोप तत्कालीन एसडीएम केशव मीणा पर है। एसडीएम राजगढ़ में मंदिर ढहाने के मामले में 25 अप्रैल 2022 को निलंबित किए गए थे, लेकिन राजनीतिक दबाव के कारण फिर थानागाजी में लगा दिया गया। अलवर कलेक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने हाल ही इसी क्षेत्र में 10 आवंटन निरस्त किए थे।
उन्होंने अपने नोटिस में स्पष्ट लिखा है कि एसडीएम राजगढ़ की ओर से आवंटन विधि सम्मत नहीं है। इसलिए निरस्त होने चाहिए। हालांकि, इसके बाद भी अब तक कार्रवाई नहीं हो पा रही है। कुल आवंटन में से 789 टहला तहसील और 24 राजगढ़ तहसील में हैं। ग्रामीणों ने हाल में एसओजी काे ज्ञापन दिया है। माना जा रहा है कि अब एसओजी इसकी जांच कर सकती है।
‘प्रशासन गांवों के संग’ अभियान में ऐसे की गड़बड़ी
- टहला की घेवर पंचायत का नैडोली गांव- यहां एक परिवार की 4 बेटियों के पास साढ़े छह बीघा जमीन कई दशक से है। इसे दूसरों को आवंटित कर दिया।
- इसी गांव में पहाड़ से लगती जमीन आवंटित कर दी। तहसीलदार ने जमीन जबरन जुतवाई। विरोध करने वालों को शांति भंग में गिरफ्तार करवाया।
- नांगलदास में जिस जमीन में लेखराज का कुआं-मकान बना है, वह चहेतों को अलाॅट किया।
- दो हजार बीघा जमीन के आवंटन में वन विभाग व खनिज विभाग की जमीन भी दे दी गई। एनओसी नहीं ली।
- दूसरे जिले के लोगों को भी जमीन आवंटित की गई। पहचान प्रमाण नहीं लिया। आरोप है कि ये आवेदन एक ही स्थान पर बैठकर कुछ लोगों ने दूसरों के नाम से तैयार किए। कई ऐसे भी हैं, जिन्हें एक से अधिक बार आवंटन हुआ।
- आवंटन कमेटी की बैठक एक ही दिन में कई स्थानों पर की गई। इसमें विधायक, प्रधान व सरपंच के हस्ताक्षर हैं, पर तिथि अंकित नहीं है।
Naresh Chouhan 

