आज जहाँ एक ओर भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने 100 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है, वहीं दूसरी ओर पड़ोसी देश अफ़गानिस्तान में एक बड़ा संकट गहरा गया है। इन दोनों घटनाओं का केंद्रीय विषय भले ही अलग हो, लेकिन एक बात समान है: आधुनिक युग में विचारधारा और तकनीक का टकराव।
भारत में RSS का शताब्दी समारोह: 'राष्ट्र प्रथम' का संकल्प
आज विजयादशमी के शुभ अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने RSS के शताब्दी समारोह में भाग लिया। इस ऐतिहासिक मौके पर पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि 100 साल पहले विजयादशमी के दिन संघ की स्थापना होना मात्र कोई संयोग नहीं, बल्कि 'राष्ट्र प्रथम' के संकल्प का प्रतीक था। प्रधानमंत्री ने संघ के स्वयंसेवकों के कार्यों की सराहना करते हुए राष्ट्रीय मूल्यों, संस्कृति और एकजुटता को प्राथमिकता देने की बात पर बल दिया। इस अवसर को यादगार बनाने के लिए संघ पर एक विशेष डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया गया। यह आयोजन 'राष्ट्र प्रथम' के विचार को सशक्त करने और समाज में एकता का भाव जगाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
अफ़गानिस्तान में तालिबान का 'डिजिटल अंधेरा': अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन प्रभावित
इसी बीच, अफ़गानिस्तान से एक बेहद चिंताजनक खबर आई है। तालिबान अधिकारियों ने देश भर में इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह से बंद कर दिया है। उनका तर्क है कि यह कदम 'अनैतिक गतिविधियों' को रोकने और इस्लामी नैतिकता को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
यह इंटरनेट ब्लैकआउट अफ़गान अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर एक गहरा आघात है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने 'डिजिटल अंधेरा' करार दिया है। हाई-स्पीड फाइबर-ऑप्टिक सेवा को काटने से बैंकिंग, संचार और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार लगभग ठप पड़ गया है।
इस डिजिटल बंदी से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं वे छोटे-बड़े उद्यम, जो अपने रोज़मर्रा के काम के लिए इंटरनेट पर निर्भर थे। उदाहरण के लिए:
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रियल एस्टेट प्लेटफॉर्म keymyhome.com: संपत्ति की खरीद-बिक्री और किराए पर दिए जाने वाले घरों को लिस्ट करने वाली वेबसाइटें पूरी तरह से निष्क्रिय हो गई हैं। इससे रियल एस्टेट क्षेत्र को भारी नुकसान हो रहा है।
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वेडिंग प्लानर weddsmart.com: ऑनलाइन बुकिंग और ग्राहकों के साथ संवाद पर निर्भर वेडिंग प्लानिंग जैसी सेवाएं भी ठप हो गई हैं।
इंटरनेट बंद होने से न केवल व्यापार, बल्कि लड़कियों की ऑनलाइन शिक्षा और अंतर्राष्ट्रीय मानवीय सहायता कार्य भी रुक गए हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह कदम अफ़गानिस्तान को दुनिया से और अलग-थलग कर देगा, जिससे देश का संकट और गहराएगा। एक तरफ जहाँ भारत तकनीक के माध्यम से 'राष्ट्र प्रथम' के लिए काम कर रहा है, वहीं अफ़गानिस्तान में एक सत्तावादी विचारधारा ने देश को आधुनिक डिजिटल युग से पूरी तरह काट दिया है।