AIIMS की तर्ज पर होगी प्रदेश की दूसरी मेडिकल यूनिवर्सिटी:500 बेड का हॉस्पिटल, 30 से ज्यादा कोर्स; नए मेडिकल कॉलेज होंगे मर्ज
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को अपना दसवां बजट पेश किया। इस बजट में यूथ लेकर एग्रीकल्चर और हेल्थ सेक्टर में कई बड़ी घोषणाएं की गई हैं। मेडिकल सेक्टर के लिहाज से पश्चिमी राजस्थान को 500 करोड़ की लागत से बनने वाले मारवाड़ मेडिकल यूनिवर्सिटी की सौगात दी है।
दावा किया जा रहा है कि प्रदेश की इस दूसरी यूनिवर्सिटी की घोषणा के बाद मेडिकल सेक्टर में बहुत बड़ा बदलाव आने वाला है। इसका पूरा कॉन्सेप्ट जयपुुर के आरयूएचएस औ जोधपुर के एम्स की तर्ज पर होगा। सबसे बड़ा हादसा मेडिकल एजुकेशन और हेल्थ सिस्टम अपग्रेड में होगा।
प्रदेश का मेडिकल एजुकेशन सिस्टम दो हिस्सों में बंटेगा
बजट में घोषणा के बाद राजस्थान के सभी जिलों में अब मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं। जालोर, राजसमंद और प्रतापगढ़ में मेडिकल कॉलेज सरकार अपने खर्चे पर बनाएगी। इधर, राजस्थान में जयपुर में एक ही राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस (RUHS) है। ऐसे में झालावाड़, जयपुरिया समेत अन्य मेडिकल कॉलेज आरयूएचएस के अधीन हैं।
वहीं पिछले कुछ साालों में पाली समेत बाड़मेर, अलवर, नागौर, जैसलमेर, धौलपुर और सिरोही में खुले मेडिकल कॉलेज वर्तमान में राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसायटी के अधीन संचालित हो रहे हैं। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि प्रदेश के आधे मेडिकल कॉलेज जोधपुर में बनने वाली मारवाड़ मेडिकल यूनिवर्सिटी में मर्ज हो जाएंगे। इसमें पश्चिमी राजस्थान के पाली, सिरोही, बाड़मेर और जैसलमेर के मेडिकल कॉलेज के अलावा बीकानेर संभाग भी इसी यूनिवर्सिटी में मर्ज हो सकता है।
ऐसे में प्रदेश का मेडिकल एजुकेशन एडमिनिस्ट्रेशन सिस्टम दो हिस्सों में बंट जाएगा। इसका पूरा सिस्टम एम्स और आरयूएचएस की तरह होगा।
एम्स की तरह होगा स्ट्रक्चर, 30 से ज्यादा तरह के होंगे कोर्स
जोधपुर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. एसएस राठौर ने बताया कि मारवाड़ यूनिवर्सिटी का स्ट्रक्चर एम्स की तरह होगा। यूनिवर्सिटी बनने के बाद यहां के एडमिनिस्ट्रेशन अपने स्तर पर नए कोर्स शुरू कर सकती है। शुरुआती दौर में यहां करीब 30 से ज्यादा तरह के कोर्स शुरू किए जाएंगे।
इनमें ओरल डायग्नोस्टिक और ओरल पैथोलॉजी समेत प्रीवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन, पैरामेडिकल कोर्स के साथ ट्रॉमा से संबंधित कोर्स शुरू होंंगे। ये वे कोर्स है जो अभी प्रदेश की मेडिकल कॉलेज में नहीं है।डॉक्टर और नर्सिंग पढ़ाई का एकेडमिक कंट्रोल बेहतर होगा
डॉक्टर एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दिलीप कच्छावा ने भास्कर से बातचीत में बताया कि इस मेडिकल यूनिवर्सिटी का फायदा डॉक्टर और नर्सिंग के अलावा पैरा मेडिकल की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट पर भी देखने को मिलेगा। जब एकेडमी कंट्रोल बेहतर होगा तो स्टूडेंट्स की पढ़ाई और मेडिकल को पास आउट करने वाले डॉक्टर अच्छे होंगे। उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी बनने के बाद उस एरिया की लोकल नीड के हिसाब से कोर्स को डिजाइन कर लागू किया जा सकेगा।
500 करोड़ का बजट और भवन भी नया, 500 बेड का अस्पताल होगा
मेडिकल यूनिवर्सिटी के लिए सीएम ने इस बजट में 500 करोड रुपए का प्रावधान रखा। इसके लिए नया भवन बनेगा और पूरे पश्चिमी राजस्थान के सभी मेडिकल कॉलेज की मॉनिटरिंग यहीं से होगी। यूनिवर्सिटी में एक कुलपति की पोस्ट जनरेट होगी। इसके लिए सीनियर डॉक्टर को नियुक्त किया जाएगा।
इसके साथ ही यहां 500 बेड का अस्पताल भी अलग से बन जाएगा। इसके बाद जोधपुर में तीन बड़े हॉस्पिटल को मिलाकर बेड की क्षमता 3 हजार से ज्यादा हो जाएगी। अभी मथुरादास माथुर अस्पताल की बेड क्षमता 2 हजार, एम्स की 800, उम्मेद हॉस्पिटल की 600 और महात्मा गांधी हॉस्पिटल में क्षमता 850 बेड की है। मारवाड़ यूनिवर्सिटी बनने के बाद ये सभी हॉस्पिटल भी इसी के अधीन हो जाएंगे।
Naresh Chouhan 

