मां ने सालों तक बेटी को बीमार बनाए रखा:लोगों की सहानुभूति चाहती थी; बेटी ने बॉयफ्रेंड के साथ मां की हत्या की, अब रिहा

Mother kept daughter ill for years: wanted people's sympathy; Daughter murdered mother with boyfriend, now released

मां ने सालों तक बेटी को बीमार बनाए रखा:लोगों की सहानुभूति चाहती थी; बेटी ने बॉयफ्रेंड के साथ मां की हत्या की, अब रिहा

अमेरिका के मिसौरी शहर में अपनी मां की हत्या के आरोप में जेल की सजा काट रही जिप्सी रोज ब्लैंचर्ड को रिहा कर दिया गया है। उसे सजा पूरी होने से पहले ही पैरोल पर रिहाई दी गई।

जून 2015 में जिप्सी ने अपने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर अपनी मां का कत्ल कर दिया था। जुलाई 2015 में उसे 10 साल की सजा हुई। जिप्सी की सजा जुलाई 2025 में पूरी होती, लेकिन कोर्ट ने उसके साथ हुए दुर्व्यवहार को देखते हुए उसे जल्द रिहाई दे दी।

हैरानी की बात यह कि दुर्व्यवहार उसकी मां ने ही किया था। कोर्ट ने माना कि जिप्सी का बचपन किसी सजा से कम नहीं था। इसलिए उसे सजा पूरी होने के दो साल पहले रिहा कर दिया।

जिप्सी का जन्म 1991 में हुआ...नहीं 1993 में हुआ...शायद 1995 में हुआ। कई सालों तक जिप्सी नहीं जानती थी कि वो कब पैदा हुई। जिप्सी के मुताबिक उसकी मां क्लॉडाइन डी डी ब्लैंचर्ड लोगों से कहती थी कि जिप्सी 1995 में पैदा हुई। वो हमेशा जिप्सी की उम्र कम ही बताती थी। इस वजह से जिप्सी को अपनी असल उम्र या बर्थ ईयर नहीं पता था।

एक दिन जब जिप्सी, मां से छुपकर फेसबुक पर अपना अकाउंट बना रही थी, तो कंप्यूटर स्क्रीन पर उसके सामने बर्थ डेट भरने वाला टैब खुला, वो कन्फ्यूज हो गई की आखिर लिखना क्या है। उसने धीरे से मां की अलमारी में बर्थ सर्टिफिकेट ढूंढना शुरू कर दिया। सर्टिफिकेट मिला। इस पर बर्थ ईयर 1991 लिखा था। जिप्सी को यह जानकर शॉक लगा कि उसकी मां उससे इतने सालों से झूठ बोल रही थी।

यह इकलौता झूठ नहीं था जो जिप्सी की मां ने बोला था। BBC के मुताबिक जिप्सी की मां ने बचपन से उसे इस बात पर भरोसा दिलाया कि वो दिव्यांग और बीमारी है। उसे मेडिकल सपोर्ट की जरूरत है। जबकि जिप्सी पूरी तरह से स्वस्थ थी।

उसकी मां हमेशा लोगों से कहती थीं- जिप्सी को मिर्गी आती है। उसकी आंखों में समस्या है। वो ठीक से देख नहीं पाती है। उसे मस्कुलर डिस्ट्रॉफी भी है, इस वजह से वो चल नहीं सकती। कई बीमारियों के कारण उसे खाना खाने में भी तकलीफ होती है। यही वजह थी कि जिप्सी सालों तक मोटा चश्मा पहनती थी और व्हीलचेयर पर बैठी रहती थी। खाना भी फूड पाइप से खाती थी। उसकी व्हीलचेयर पर ऑक्सीजन टैंक लगा रहता था।

एक झूठ से मां पर शक बढ़ा
जिप्सी को जिस दिन पता चला की उसकी मां से उसके बर्थ ईयर को लेकर झूठ बोला है, उस दिन से मां पर उसका शक बढ़ गया। उसे मन में सवाल उठने लगे। पहला सवाल उठा- क्या वो सज में बीमार है या उसकी बीमारियां जो उसकी मां ने लोगों को गिनाई थीं, वो सब झूठ है।

जिप्सी इस सवाल का जवाब ढूंढने लगी। उसे मां से भी पूछा। लेकिन मां ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी और चुप रहने के लिए कहा। धीरे-धीरे जिप्ली को समझ आया कि उसकी मां बेवजह ही उसे कमजोर बताती थी और लोगों से दूर रखती थी। उसके मन में गुस्सा बढ़ने लगा। साथ ही बढ़ने लगी नए लोगों से मिलने और दुनिया घूमने की इच्छा।

इस चाहत को पूरा करने उसने डेटिंग एप पर प्रोफाइल बनाई। यहां उसकी मुलाकात निकोलस गोडजॉन से हुई। वो जिप्सी का बॉयफ्रेंड बन गया। दोनों के-दूसरे पर भरोसा करते थे। इसलिए जिप्सी ने अपनी मां की करतूत अपने बॉयफ्रेंड को बता दीं।

मां को घर में चाकू मारा
मां के झूठ से परेशान जिप्सी ने अपने बॉयफ्रेंड निकोलस के साथ मिलकर मां की हत्या का प्लान बनाया। जून 2015 में जिप्सी की मां मिसौरी स्थित अपने घर पर ही थी जब निकोलस भी वहां पहुंच गया। उसने क्लॉडाइन डी डी ब्लैंचर्ड को चाकू घोंप दिया। जिप्सी की मां की मौके पर ही मौत हो गई। दोनों फरार हो गए।

पुलिस को क्लॉडाइन डी डी की डेडबॉडी बैडरुम में मिली थी। काफी तलाशी के बाद जिप्सी और निकोलस को विस्कॉन्सिन से गिरफ्तार किया गया। यहां निकोलस का घर था। जुलाई 2015 में निकोलस को हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा हुई। हत्या की प्लानिंग करने के लिए जिप्सी को 10 साल की सजा हुई।

दावा- जिप्सी की मां बीमार थी
कुछ लोग दावा करते हैं कि जिप्सी की मां बीमार थीं। उन्हें मुनचूसन सिंड्रोम नाम की बीमारी थी। जिप्सी के वकील ने भी कोर्ट में कहा था कि जिप्सी की मां को मुनचूसन सिंड्रोम था। यह एक मनोवैज्ञानिक स्थिति है जहां कोई व्यक्ति अपनी देखभाल और लोगों का अटैंशन पाने के लिए जानबूझकर बीमारी दिखने की कोशिश करता है। इस केस में जिप्सी की मां लोगों की सहानुभूति हासिल करना चाहती थी इसलिए उसने खुद की बजाय जिप्सी को बीमार बताया।