लिक्विड नाइट्रोजन:खतरा ऐसा कि आंखों की रोशनी जा सकती है

लिक्विड नाइट्रोजन:खतरा ऐसा कि आंखों की रोशनी जा सकती है

पशुपालन विभाग खुद अपने कार्मिकों की जान खतरे में डाल रहा है। मेरठ से आने वाली अमोनियम नाइट्रोजन को बिना सुरक्षा उपकरण के टैंकरों से कैनों में खाली कराया जाता है। -196 डिग्री तापमान की यह अमोनियम नाइट्रोजन इतनी खतरनाक है कि इससे स्किन फ्रिजिंग बर्न (चमड़ी जलने) तो हो ही सकता है

इससे उठने वाली भाप से आंखों की रोशनी तक जा सकती है। लंबे समय से चले आ रहे इस काम को आज भी ऐसे ही अंजाम दिया जाता है। पशुपालन विभाग में अमोनियम नाइट्रोजन को सीरम को सुरक्षित रखने के काम में लिया जाता है।

जरूरत के अनुसार मेरठ से इसके लिए टैंकर आते हैं। इसे क्राइस्टेशन के माध्यम से नली से कैनों में डलवाते हैं। भास्कर संवाददाता बुधवार को विभाग के संयुक्त निदेशक कार्यालय पहुंचा तो वहां पशु चिकित्सक डॉ. देवीसिंह और सरस डेयरी से आए पशु चिकित्सक डॉ. प्रेम टैंकर से आ रही नली पकड़कर इसे कैनों में भर रहे थे।

जिम्मेदारों के जवाब सुनिए....
इंसान संपर्क में नहीं आतालिक्विड नाइट्रोजन सीरम को सुरक्षित करने के काम आता है। इसे पहले टैंकर से सायलो में खाली कराते हैं। इंसान इसके संपर्क में नहीं आता। जिससे किसी तरह का नुकसान नहीं होता।
- रमेश मीणा, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग, अलवर

पर्यावरण में वैसे तो 78 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है। यह जानलेवा तो नहीं होती। लेकिन इतनी अधिक लिक्विड नाइट्रोजन को खाली करते समय सुरक्षा उपकरणों की जरूरत होती है।
- जगमोहन मीणा, इंस्पेक्टर, फैक्ट्री एंड बॉयलर, अलवर

हाथ जकड़ जाते हैं, कभी कोई सुरक्षा किट नहीं दी

पशु चिकित्सक डॉ. देवीसिंह ने बताया कि 20 हजार लीटर का आता है। जितनी आवश्यकता होती है उसे सायलो (छोटे टैंकर) में निकलवा लेते हैं। इस सायलों से लिक्विड नाइट्रोजन कैनों में डाली जाती है। ऐसा करते समय नली को हाथ से पकड़कर रखना पड़ता है। इसे दौरान हाथ ठंड के कारण जकड़ जाते हैं। विभाग की ओर से कभी किसी तरह की सुरक्षा किट नहीं दी गई। जब अधिक दिक्कत आती है तो हाथों में कपड़ा पकड़ इसे खाली करते हैं।

हैजार्ड की श्रेणी में आती है, एसओपी की पालना जरूरी

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भरतपुर के क्षेत्रीय अधिकारी विवेक कुमार गोयल ने बताया कि इस तरह की अमोनियम नाइट्रोजन हैजार्ड की श्रेणी में आती है। जब भी लिक्विड नाइट्रोजन को खाली करें तो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसेजर (एसओपी) के नियमों का पालन जरूरी है। जिसमें पीपीई किट पहनना, दस्ताने एवं आंखों की सुरक्षा जरूरी है। स्किन फ्रिजिंग बर्न हो सकती है। आंखों की रोशनी तक जा सकती है।