कई साल से नहीं भरा बिजली बिल, चुकाने हैं 90 लाख; वसूली के लिए डिस्काॅम ने सिर्फ चिट्‌ठी लिखी

कई साल से नहीं भरा बिजली बिल, चुकाने हैं 90 लाख; वसूली के लिए डिस्काॅम ने सिर्फ चिट्‌ठी लिखी
उपभाेक्ताओं पर बिल की बकाया राशि जमा करवाने के लिए राैब जमाने वाली पुलिस पर ही जिले में बिजली बिल के 90 लाख रुपए बकाया चल रहे हैं।
  • आम उपभाेक्ता ध्यान दें, बिल बकाया रखने की ये सुविधा आपके लिए नहीं है, राशि नहीं चुकाने पर बिजली कनेक्शन कटना तय है
  • ट्रैफिक पुलिस पर बकाया हैं 5.92 लाख रुपए, नाल थाने काे चुकाने हैं 11.92 लाख
  • बकाएदाराें की सूची में आईजी ऑफिस और एसपी बंगला भी शामिल

आम उपभाेक्ता समय पर बिजली का बिल नहीं भरे, ताे डिस्काॅम व बिजली कंपनी कनेक्शन काटने में जरा भी देर नहीं लगाती। काेई उपभाेक्ता विराेध या आपत्ति दर्ज करवाता है, ताे उसे पुलिस का भय दिखाते हैं। चाैंकाने वाली बात ये है कि उपभाेक्ताओं पर बिल की बकाया राशि जमा करवाने के लिए राैब जमाने वाली पुलिस पर ही जिले में बिजली बिल के 90 लाख रुपए बकाया चल रहे हैं।

पुलिस की बात आते ही डिस्काॅम के तेवर भी नरम पड़ जाते हैं और वाे सिर्फ रिमाइंडर देने की खानापूर्ति करता है। विभाग ने एक बार फिर पुलिस कप्तान काे बकाया बिल भरवाने के लिए पत्र लिखा है। खास बात ये है कि कई साल से बकाया चल रहे बिजली के बिल काे लेकर अभी तक किसी भी थाने, चाैकी और ऑफिसर्स क्वार्टर या कार्यालय का कनेक्शन नहीं काटा गया है।

भास्कर ने जब बिजली बिल के बकायादाराें की पड़ताल की, ताे कई चाैंकाने वाले तथ्य सामने आए। मालूम चला कि शहर पुलिस में सबसे ज्यादा बकाया ट्रैफिक पुलिस पर है। इस थाने काे बिजली बिल के पांच लाख 92 हजार 575 रुपए चुकाने हैं।

ग्रामीण इलाके की बात करें, ताे नाल थाना 11 लाख 94 हजार 624 रुपए बकाये के साथ टाॅप पर है। सबसे कम सात रुपए का बिजली बिल नयाशहर थाने का बाकी है। गाैरतलब है कि जिले में 26 थाने और मुक्ताप्रसाद, पीबीएम, भीनाशहर, जस्सूसर गेट, इंडस्ट्रियल एरिया सहित पांच पुलिस चाैकियां हैं।
एक्सपर्ट व्यू

बकाया नहीं चुकाने पर कनेक्शन काटने का नियम, लेकिन पुलिस के मामले में इसे नहीं मानता डिस्काॅम

सरकारी नियमाें के अनुसार बिजली का बिल जमा नहीं करवाने पर कनेक्शन काटने का प्रावधान है। ये नियम सरकारी महकमा, सरकारी क्वार्टर और निजी मकानाें सहित सभी पर लागू हाेता है। हर विभाग काे बिजली बिल का बजट अलाॅट है, लेकिन अफसर रकम जमा नहीं करवाते। बिजली के बिल वाला बजट दूसरे मदाें में खर्च कर दिया जाता है, क्याेंकि उन्हें पता रहता है कि कनेक्शन ताे कटेगा नहीं।

ऊर्जा विकास निगम चेयरमैन काे लिखा है पत्र

डीआईजी आयाेजना, आधुनिकीकरण एवं कल्याण जयपुर ने पुलिस विभाग के बकाया बिजली बिलाें के भुगतान के लिए राजस्थान ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के चेयरमैन काे पत्र लिखा है। ताकि क्षेत्राधिकार में जिलेवार समस्त कार्यालयाें की बकाया राशि का विस्तृत विवरण का सत्यापन करवाया जाकर वसूली की वास्तविक राशि से अवगत कराने काे कहा है, जिससे भुगतान संबंधी कार्यवाही की जा सके।

ऐसे समझें पुलिस पर बकाया बढ़ने के कारण
बजट तय है, लेकिन थानेदार ज्यादा खर्च कर देते हैं बिजली

पुलिस के पास बिजली बिल जमा करवाने काे लेकर अक्सर बजट की कमी रहती है। महकमे ने बिजली बिल के लिए भी बजट तय कर रखा है। अफसर गर्मियाें में एसी व सर्दियाें में हीटर काम में लेते हैं, जिससे बिजली की खपत ज्यादा हाेती है और बिल ज्यादा आता है। पुलिस पर करीब दस साल से बिजली बिल की राशि बकाया चल रही है।

बिल की राशि बढ़ने की एक वजह ये भी है कि थानेदाराें के ट्रांसफर हाेते रहते हैं। नया थानेदार आने के बाद पुराने अफसर के उपयाेग ली गई बिजली का बिल जमा नहीं करवाता। ऐसे में बिल बढ़ता रहता है। डिस्काॅम के अफसर बिजली चाेरी के मामले पकड़ने में अक्सर पुलिस की मदद लेते हैं, इसलिए भी पुलिस से वसूली काे लेकर डिस्काॅम सख्ती नहीं करता है।

सरकारी क्वार्टर के पुराने अफसर का बकाया जमा नहीं करवाता नया एसएचओ

पुलिस विभाग में थाने व एसएचओ के क्वार्टर के नाम से बिजली कनेक्शन अलाॅट हैं। कई एसएचओ तबादले के बाद बिजली बिल जमा नहीं करवाते। उस क्वार्टर में नया अफसर आता है, ताे वाे पुराना बकाया जमा नहीं कराता। चुनिंदा अफसर पार्ट पेमेंट में पुराना बिल जमा करवाते हैं। उनका दाे महीने में जितना बिल आता है, जमा करवा दिया जाता है। ऐसे में संबंधित कनेक्शन की आउट स्टैंडिंग कभी खत्म नहीं हाेती।