रॉयल एनफील्ड (Royal Enfield) ब्रितानी है? जानें इस शानदार बाइक का इतिहास

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रॉयल एनफील्ड (Royal Enfield) ब्रितानी है? जानें इस शानदार बाइक का इतिहास
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खास बात यह है कि कई बार लोग इस कंपनी को विदेशी समझते हैं और इसका विरोध भी करते हैं. उनकी राय में यह बाइक गुलामी की निशानी है. आज के वैश्विक युग में अब ऐसा कहना और सोचना दोनों ही गलत है. कारण इस खबर में आपको आगे बता दिया जाएगा.

Is Royal Enfield Indian or British Know history of this bike? रॉयल एनफील्ड ब्रितानी कंपनी है. ऐसा सभी को लगता है. रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिल (Royal Enfield motorcycle company owner) आज युवाओं की सबसे पसंदीदा बाइक बन गई है. अधिकतर युवा इसे चलाने में शान महसूस करते है. बाइक है भी शानदार. इस बाइक की बनावट से लेकर बाइक की आवाज तक सबका अपना अंदाज है जो युवा ही नहीं हर उम्र के लोगों के लिए खास है. खास बात यह है कि कई बार लोग इस कंपनी को विदेशी समझते हैं और इसका विरोध भी करते हैं. उनकी राय में यह बाइक गुलामी की निशानी है. आज के वैश्विक युग में अब ऐसा कहना और सोचना दोनों ही गलत है. कारण इस खबर में आपको आगे बता दिया जाएगा.www.keymyhome.com

भारत में रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिल (Royal Enfield Bike manufacturing in India)भारत में 1949 से बेची जा रही है. इससे पहले अंग्रेज इसे अपनी सरकारी सहूलियत और जरूरतों के हिसाब से देश में लेकर आए. 1955 में भारत सरकार को अपनी पुलिस फोर्स और सेना के लिए उचित बाइक की जरूरत हुई और सरकार के नुमाइंदे इसके खोज में लग गए. सेना को जहां बॉर्डर इलाकों तक पेट्रोलिंग के लिए इसकी जरूरत महसूस हुई वहीं पुलिस फोर्स को भी पेट्रोलिंग और दूरदराज के इलाकों में जाने के लिए एक दमदार बाइक की जरूरत महसूस हुई. मार्केट में रिसर्च के बाद बुलेट 350 (Royal Enfield Bike 350cc) का चयन किया गया जिसे सेना और पुलिस दोनों की जरूरतों के हिसाब से सबसे सटीक पाया गया.

भारत सरकार ने रॉयल एनफील्ड के निर्माताओं को 800 बाइक के ऑर्डर दिए. यह ऑर्डर रॉयल एनफील्ड की 350 सीसी वाली बाइक के दिए गए. इसके लिए 1955 में रेडिच कंपनी ने मद्रास मोटर्स के साथ हाथ मिलाया जिस कंपनी का नाम एनफील्ड इंडिया(Enfield India) रखा गया. बता दें कि इस रॉयल एनफील्ड बाइक को ब्रिटेन के रेडिच में पहली बनाया गया था. यहीं पर रॉयल एनफील्‍ड की मोटरसाइकिलों को बनाना शुरू किया गया था. इस क्लासिक 350 Redditch सीरीज मोटरसाइकिल में रॉयल एनफील्ड रेडिच का वही मोनोग्राम प्रयोग किया गया है जिसे 1939 में 125 सीसी प्रोटोटाइप रॉयल बेबी में यूज किया गया था.

एग्रीमेंट के तहत बनी इस नई कंपनी एनफील्ड इंडिया को बाइक के अलग अलग पार्ट आयात करके यहीं भारत में एसेंबल करने का काम करना था. इसके लिए इस कंपनी को बाकायदा लाइसेंस जारी कर अधिकृत किया गया था. खास बात यह है कि इस एग्रीमेंट के तहत मद्रास मोटर्स (Madras Motors) के पास मेजोरिटी शेयर थे यानि 50 फीसदी से ज्यादा शेयर मद्रास मोटर्स के पास थे. देखा जाए तो मालिकाना हक मिल गया था. लेकिन यहां पार्ट्स का निर्माण नहीं हो रहा था बाइक केवल एसेंबल की जा रही थी. 1956 में मद्रास के करीब तिरुवोत्तियूर प्लांट में एक साल में करीब 163 बुलेट को एसेंबल किया जाने लगा था.