मुख्यमंत्री चन्नी के कहने से भी नहीं माने केपी, कहा चुनाव तो जरूर लड़ेंगे, लेकिन कहां से यह समर्थक तय करेंगे
इस बार कांग्रेस के टिकटों के आवंटन बाद पंजाब भर बहुत कम बगावत देखने को मिल रही है लेकिन जहां पर भी मिल रही है वहां पर लोग सीधा मोर्चा ही खोल रहे हैं। जालंधर में पूर्व सांसद मोहिंदर सिंह केपी भी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। आदमपुर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी का टिकट न मिंलने पर नाराज चल रहे केपी ने कहा है कि वह चुनाव तो जरूर लडेंगे लेकिन किस पार्टी से और किस विधानसभा क्षेत्र से लड़ेंगे इसका फैसला उनके समर्थक करेंगे।
जालंधर में आज राहुल गांधी आ रहे हैं। उससे पहले बुधवार को गणतंत्र दिवस के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में झंडा फहराने आए सूबे के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी अपने रिश्तेदार मोहिंदर सिंह केपी के साथ मुलाकात की। गणतंत्र दिवस समारोह की समाप्ति के बाद वह केपी को अपनी गाड़ी में साथ लेकर गए। उनसे बातचीत की। मान मनौवल की सारी कोशिशें की लेकिन वह अभी तक नहीं मानें हैं। मुख्यमंत्री के कहने पर इतना जरूर है कि वह राहुल गांधी के जालंधर दौरे तक आजाद या फिर किसी अन्य दल में शामिल होकर चुनाव लड़ने की घोषणा से रूके हुए हैं। लेकिन राहुल गांधी के जाते ही वह अपने समर्थकों के साथ बैठक कर चुनाव लड़ने की घोषणा कर देंगे।
बता दें कि चन्नी से पहले कैबिनेय मंत्री राजकुमार वेरका भी मोहिंदर सिंह केपी को मनाने के लिए उनके घर पर पहुंचे थे। केपी और वेरका की देर रात तक काफी लंबी मीटिंग चली थी। वेरका ने कांग्रेस पार्टी से बागी हुए मोहिदंर सिंह केपी को मनाने की बहुत कोशिश की लेकिन केपी नहीं माने। वेरका के आने के बाद एक दो दिन वह शांत रहे लेकिन उसके बाद फिर से उन्होंने बागावती सुर निकालने शुरू कर दिए।

जालंधर कैंट क्षेत्र में परगट के खिलाफ प्रचार
पूर्व सांसद जिन्हें पिछले विधानसभा चुनाव में आदमपुर से टिकट देकर मैदान में उतारा था और पवन कुमार टीनू से बहुत कम वोटों से हार गए थे जालंधर कैंट में मंत्री परगट सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। वह कैंट विधानसभा क्षेत्र में जाकर परगट सिंह के खिलाफ अपने समर्थकों के माध्यम से लोगों में लाकर प्रचार कर रहे हैं। दरअसल केपी को शक है कि उनकी टिकट पर भांजी मारने का काम परगट सिंह ने किया है। परगट सिंह नहीं चाहते थे कि केपी को टिकट मिले। संभावना यह भी जताई जा रही है कि यदि मोहिंदर सिंह केपी आजाद भा चुनाव लड़े तो वह कैंट विधानसभा क्षेत्र से ही अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे और परगट सिंह को किसी न किसी तरह डेंट डालने की कोशिश करेंगे। वैसे उन्होंने परगट को नुकसान पहुंचाने की गतिविधियां शुरू भी कर दी हैं।
सीएम से रिश्तेदारी भी नहीं आई काम
बता दें कि केपी को पूरा भरोसा था कि उन्हें चन्नी से रिश्तेदारी का पूरा फायदा मिलेगा। वह इस बार आदमपुर की बजाय जालंधर वेस्ट से चुनाव लड़ना चाहते थे, और रिंकू को आदमपुर से टिकट के लिए भी उन्होंने पूरा जोर लगाया। लेकिन उनके सारे दांव उल्टे पड़ गए, न उन्हें वेस्ट से टिकट मिली और आदमपुर से भी पार्टी ने बसपा से अभी हाल ही में एक माह पहले आए सुखविंदर सिंह कोटली को टिकट दे दिया। रिकूं का क्षेत्र बदलवाने के चक्कर में मोहिंदर सिंह केपी अपना टिकट भी गवा बैठे। चन्नी से नजदीकियां भी केपी के काम नहीं आई, चन्नी चाह कर भी अपने रिश्तेदार को टिकटच नहीं दिलवा सके। इसके पीछे जो वजह थी वह यह है कि कांग्रेस पार्टी ने टिकटों के आवंटन से पहले पंजाब में एक सर्वे करवाया था जिसमें केपी का स्कोर और फीडबैक ठीक नहीं आई। जिसकी वजह से उन्हें कांग्रेस के टिकट से वंचित होना पड़ा।
satveer 

