हेयर ऑयल से 80 करोड़ का बिजनेस
‘2020 की बात है। कोरोना महामारी में अमूमन उन लोगों के भी बाल झड़ने लगे थे, जिन्हें पहले से इसकी शिकायत नहीं थी। मेरी मां के साथ भी ऐसा ही हुआ। उनके बाल बहुत तेजी से झड़ने लगे। घर में हर कोई परेशान कि ये क्या हुआ। ऐसे तो सिर पर एक भी बाल नहीं बचेंगे।
इसी दौरान नानाजी ने एक आयुर्वेदिक ऑयल बनाया। बचपन से उनकी आयुर्वेद में दिलचस्पी रही है। जब नानाजी ने मां से कहा कि ये ऑयल लगाकर देखो, तो मां डर गई। मां का कहना था कि पता नहीं, सिर पर जो भी बाल हैं, इस ऑयल के लगाने के बाद ऐसा न हो कि सारे बाल झड़ जाएं या कोई बीमारी हो जाए।
मां के डर को देखकर नानाजी ने अपने सिर पर हेयर ऑयल लगाना शुरू किया। आप यकीन नहीं करेंगे, 87 साल की उम्र में, पूरा सिर चिकना हो चुका था, उसमें नए बाल का उगना…। करीब 2 महीने बाद उनके सिर पर नए बाल उगने शुरू हो गए। तब मां ने ऑयल लगाना शुरू किया।’
दोपहर के 12 बज रहे हैं। अभी मैं सूरत के पांडेसरा इंडस्ट्रियल एरिया में हेयर ऑयल बनाने वाली कंपनी ‘Avimee Herbal’ की फैक्ट्री में हूं।
मशीन की चलती आवाजों के बीच हजारों बॉटल में दर्जनों महिलाएं हेयर ऑयल भर रही हैं। एक सेक्शन में बादाम, अंगूर, अनार जैसे अलग-अलग तरह के सीड्स से ऑयल निकाला जा रहा है। यहीं पर इस कंपनी के को-फाउंडर सिद्धांत अग्रवाल शुरुआती दिनों की बातें बता रहे हैं।
सिद्धांत कहते हैं, ‘कंपनी को शुरू किए हुए बमुश्किल तीन साल हुए हैं। साल 2020 में घर के आंगन से हेयर ऑयल बनाने की शुरुआत हुई थी। आज देश के अलावा विदेशों में भी Avimee herbal ऑयल की डिमांड है।
आपके सामने दुबई के लिए पैकेजिंग चल रही है। हम US में भी एक्सपोर्ट कर रहे हैं। अब यूरोप की बारी है।
दरअसल, इस तरह के ऑयल की अब हर घर को जरूरत है। बदलते खान-पान और रूटीन की वजह से हेयर फॉल की समस्या अब हर उम्र के लोगों में है। हर कोई हेयर फॉल की वजह से परेशान है। हम इसी सॉल्यूशन पर काम कर रहे हैं।’
… तो आप लोग नानाजी के साथ ही रहते हैं?
सिद्धांत कहते हैं, ‘हम लोग बिहार के भागलपुर के रहने वाले हैं। नानाजी का सिल्क के कपड़ों का कारोबार रहा है। शादी के बाद मम्मी-पापा दिल्ली शिफ्ट हो गए थे। वजीरपुर में पापा का स्टेनलेस स्टील का बिजनेस था।
सब कुछ अच्छे से चल रहा था। मेरी उम्र तकरीबन 12 साल रही होगी। 2003-04 की बात है। पापा को कैंसर डायग्नोस हुआ। मम्मी ने पापा को न जाने कहां-कहां दिखवाया। उम्मीद थी कि पापा जल्द ठीक हो जाएंगे। कैंसर को मात दे देंगे, लेकिन कुछ साल बाद ही वो हम सब को छोड़कर चले गए।
इलाज में बहुत ज्यादा खर्च होने की वजह से घर की स्थिति खराब हो गई। उस समय मेरी पढ़ाई चल रही थी। कई बार तो स्कूल फीस भरने तक के पैसे नहीं होते थे हमारे पास। जब स्थिति खराब होने लगी, तो नानाजी भागलपुर से दिल्ली आ गए, ताकि कम से कम घर का कोई तो सहारा हो। फिर 2011 में हम लोग सूरत शिफ्ट हो गए।’
कहते-कहते सिद्धांत भावुक हो जाते हैं।
कुछ देर ठहरने के बाद कहते हैं, ‘लाखों रुपए का कर्ज हो चुका था। जिन कर्जदार को पापा पैसा दे चुके थे, वे उनके गुजर जाने के बाद दुबारा मांगने लगे। वो दौर हमारी जिंदगी का सबसे भयावह दौर था।
पापा के चले जाने के बाद अब संकट रोजी-रोटी, पढ़ाई-लिखाई का था। सूरत में हमारे कुछ रिश्तेदार पहले से रहते थे। बिजनेस का यहां माहौल था। नानाजी ने सुझाव दिया कि सूरत चलकर ही आगे की जिंदगी जीते हैं। यहां आने के बाद भी शुरुआत में मुश्किलें कम नहीं हुई।
कहते हैं न, जब आपके पास कुछ होता है, तभी कोई सपोर्ट करता है। खुद से सारी चीजें शुरू करनी पड़ीं। मेरा बैकग्राउंड कॉमर्स का था। CA हूं। शुरुआत में कुछ साल तक अपने एक जानने वाले के साथ काम किया। फिर साड़ी-कपड़े का बिजनेस।’
बातचीत के बीच ही सिद्धांत कहते हैं, ‘नानाजी जी आ चुके हैं। चलिए आपको उनसे मिलवाता हूं।’
मेरे सामने 87 साल के राधा कृष्ण चौधरी हैं। जिस अंदाज में वो अपनी कहानी बता रहे हैं, बिल्कुल भी उनकी उम्र का अंदाजा नहीं लग रहा है। साथ में सिद्धांत की मां विनीता अग्रवाल भी हैं।
राधा कृष्ण चौधरी कहते हैं, ‘आपको ये सब चमत्कार की तरह लग रहा होगा न ! जिस उम्र में लोग रिटायर हो जाते हैं। बिछावन पकड़ लेते हैं। उस उम्र में मैं चलने के लिए छड़ी का भी सहारा नहीं लेता।
सब आयुर्वेद का कमाल है। बचपन से मैं आयुर्वेद को पढ़ता रहा हूं। इसमें मेरी दिलचस्पी रही है। मुझे याद है, स्कूल-कॉलेज के दिनों में मैं सिर्फ किताबें खरीदता था। उसे पढ़ता रहता था। कई बार ऐसा भी होता कि किसी से किताब लेता और उसे एक दिन में ही खत्म कर वापस कर देता।
इच्छा थी कि डॉक्टर बनूंगा, लेकिन MA की पढ़ाई के दौरान ही पिता जी ने कहा- अब बहुत हो गया पढ़ना-लिखना, बिजनेस संभालो। उसी के बाद बिजनेस में आना पड़ा। विनीता के साथ जब ये हादसा हुआ, तो दिल्ली आना पड़ा। उसके बाद से हम लोग साथ में ही हैं।’
…आपने आयुर्वेद की भी पढ़ाई की है?
राधा कृष्ण हल्की मुस्कुराहट के साथ कहते हैं, ‘मैंने दो शादी की है।’
दो शादी?
‘एक से जो मेरी पत्नी है, दूसरा किताबों से। मुझे पढ़ने का बहुत शौक रहा है। बिजनेस में आने के बाद भी मैं अलग-अलग तरह के रिसर्च पेपर, आयुर्वेद की किताबें… ये सब पढ़ता रहा हूं। किससे क्या होता है? कैसे बनता है? क्यों ऐसा होता है?… इस तरह के अनगिनत सवाल मेरे मन में हमेशा उठते रहे हैं।
इसी का नतीजा ये ऑयल और कंपनी है। जब मेरी बेटी (विनीता) के हेयर फॉल होने शुरू हुए, तो मैंने सोचा कि आयुर्वेद पर मैंने इतने सारे रिसर्च किए हैं। भले ही मेरे पास कोई डिग्री नहीं है, लेकिन ये सब किस दिन काम में आएगा।
मैंने लगभग 250 तरह की जड़ी-बूटियों को मिलाकर एक ऑयल तैयार किया, जो आज केशपल्लव के नाम से हमारी कंपनी का स्टार प्रोडक्ट है।’
सिद्धांत कहते हैं, ‘नानाजी का ऑयल बनाने का फॉर्मूला हम पेटेंट करवा चुके हैं। शुरुआत में तो घर पर ही ऑयल बनाया जाता था। कुछ प्रोसेस ऐसे भी होते थे, जिसमें कई-कई दिनों तक जड़ी-बूटियों को पकाया जाता है। इससे बदबू भी आती थी।
एक उदाहरण आपको देता हूं। भृंगराज का इस्तेमाल ऑयल बनाने में होता है। जब हम घर पर इसका प्रोसेस करते थे, तो पूरा इलाका महकने लगता था। आस-पास के लोगों ने विरोध करना शुरू किया। इसके बाद हमने धीरे-धीरे करके एक-एक का सॉल्यूशन निकाला। 2021 में फैक्ट्री लगाई।’
सिद्धांत की मां विनीता कुछ प्रोडक्ट दिखाती हैं। कहती हैं, ‘जब हेयर ऑयल बनकर तैयार हो गया, तो शुरुआत में हम लोग अपनी गली मोहल्लों, जानने वालों को बेचते थे। जब सोशल मीडिया पर प्रोडक्ट की फोटो और रिलेटेड जानकारी को हमने शेयर करना शुरू किया, तो धीरे-धीरे इसकी डिमांड बढ़ने लगी।
लोग हमें एडवांस में पेमेंट करते थे। इतने ऑर्डर मिलने शुरू हो गए कि दिनभर चूल्हे पर हेयर ऑयल बनाने में इस्तेमाल होने वाले तेल, जड़ी-बूटियां गर्म होती रहती थीं। खाना बाहर से मंगवाना पड़ता था।’
सिद्धांत से मैं कहता हूं, ‘एक बार पूरी फैक्ट्री घूम लेते हैं।’
सिद्धांत की यूनिट के ग्राउंड फ्लोर पर पैकेजिंग और रॉ मटेरियल से ऑयल तैयार करने का प्रोसेस चल रहा है। सिद्धांत का दावा है कि वो सिर्फ रॉ मटेरियल को दूसरी जगहों से मंगवाते हैं। वो बताते हैं, ‘इस सेक्टर में दूसरी कंपनियां सिर्फ ब्रांड की वजह से फेमस हैं, जबकि उनके प्रोडक्ट की क्वालिटी बहुत ही खराब है।
आप ही बताइए, मार्केट में बादाम की कीमत 800 रुपए किलो है। जबकि इसका तेल 200 रुपए किलो में मिल जाता है। समझ सकते हैं कि इस बादाम ऑयल की क्वालिटी कैसी होगी। यही काम अमूमन हर कंपनी कर रही है। हेयर फॉल रोकने के नाम पर करोड़ों का बिजनेस चल रहा है, जबकि इससे कस्टमर को एक पाई का भी फायदा नहीं हो रहा।
हम अंगूर, बादाम, अनार, कद्दू के बीज… अलग-अलग तरह के सभी रॉ मटेरियल को मंगवाते हैं। रॉ मटेरियल में तो कोई मिलावट नहीं करेगा न। रेसिपी के हिसाब से प्रोसेस के बाद सभी का ऑयल निकाला जाता है और फिर इससे फाइनल प्रोडक्ट तैयार होता है। सब कुछ आपके सामने ही है।’
सिद्धांत बताते हैं, 'हम अभी अपनी वेबसाइट, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए ही पैन इंडिया सेल कर रहे हैं। डिमांड इतनी है कि हम इसे पूरा नहीं कर पा रहे हैं। कंपनी में 100 से अधिक लोग काम कर रहे हैं। जबकि हर रोज 4 हजार यूनिट ऑर्डर सेल कर रहे हैं।
प्रोडक्ट की इतनी डिमांड है कि अगले कुछ महीने में हम फैक्ट्री को इससे बड़ी लोकेशन पर शिफ्ट कर रहे हैं। कंपनी का सालाना टर्नओवर 80 करोड़ से अधिक है। अगले एक से दो साल में हमारी कंपनी हजार करोड़ की हो जाएगी।
अपने प्रोडक्ट की बदौलत ही हम कहते हैं- बाल तो उगा के ही छोड़ूंगा।'
Kumkum sharma 

