लेपर्ड ने बच्चे को मारा, दादा शव लिए बैठे रहे:बेटे को बचाने 1 किलोमीटर तक दौड़ी मां, पिता बोले- अब जी कर क्या करेंगे
जयपुर से 40 किलोमीटर दूर जमवारामगढ़ का बासना गांव। 1500 की आबादी वाले इस गांव में शनिवार को भास्कर टीम पहुंची तो मातम का सन्नाटा था।
वजह- शुक्रवार रात एक लेपर्ड मां के सामने से डेढ़ साल के बच्चे कार्तिक को उठा ले गया। बच्चे को बचाने के लिए मां 1 किलोमीटर तक लेपर्ड के पीछे भागी। जैसे-तैसे जंगल में पहुंची तो देखा बेटा बेसुध पड़ा है। कुछ देर में ग्रामीण भी आ गए और बच्चे को हॉस्पिटल ले गए, जहां डॉक्टर्स ने बताया कि कार्तिक की मौत हो गई है।
भास्कर टीम ने इलाके के लोगों से बात की तो उन्होंने बताया कि 5 महीने से गांव में लेपर्ड का मूवमेंट था। घटना के बाद से इलाके के लोगों में इतना डर है कि कोई अपने बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने दे रहा।
गांव के लोगों से बात करने के बाद भास्कर टीम बच्चे के घर पहुंची। दादा लालाराम जोगी अपनी गोद में पोते का शव लेकर बैठे थे। आस-पास के लोग पिता बलराम को सांत्वना दे रहे थे...। तभी एक कोने से रोने की आवाज आई...ये आवाज थी कार्तिक की मां कालीबाई की...मेरे बच्चे को कोई लेकर आ जाए....अब मेरे हाथ से कौन खाना खाएगा।
भास्कर टीम ने कालीबाई से बात की और जाना शुक्रवार रात आखिर हुआ क्या था? पढ़िए उन्हीं की जुबानी...
शाम के 7 बजे थे। मैं घर के आंगन में बर्तन धो रही थी। कार्तिक मेरे पास ही बैठा खेल रहा था। हमले से कुछ देर पहले गांव में लोगों की आवाज आई थी। मुझे नहीं पता था कि गांव में लेपर्ड घुस गया है। कार्तिक खेलते हुए बार-बार मेरी तरफ देख रहा था और हंस रहा था।
तभी घर की दीवार फांदकर लेपर्ड आया और एक झटके में मेरी आंखों के सामने से मेरे बेटे को उठाकर ले गया। उसके हमला करते ही कार्तिक जोर-जोर से रोने लगा। मैं भी चिल्लाने लगी...मेरे बेटे को बचा लो...।
तभी मेरी आवाज सुन एक बाइक वाला वहां पहुंचा। मैंने उसे बताया लेपर्ड बेटे को उठा ले गया और इसके बाद मैंने लेपर्ड का पीछा करना शुरू किया। वह बहुत स्पीड में जंगल की तरफ भागा। बाइक वाले ने घरवालों और ग्रामीणों को बताया।
अंधेरा हो चुका था। कार्तिक के बारे में पता नहीं चल पा रहा था। कुछ देर में दौड़ते हुए कार्तिक के दादा और पिता भी आ गए। करीब 1 किलोमीटर तक लेपर्ड का पीछा किया। इसी दौरान जंगल में लेपर्ड के पैरों के निशान दिखे।
रात करीब सवा आठ बजे होंगे। झाड़ियों में हमें कार्तिक की आवाज सुनाई दी। देखा तो उसके सिर और मुंह से खून बह रहा था। वहां से उसे लेकर गांव में आए और रात करीब सवा 9 बजे कूकस के निम्स हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टर ने बताया कि उसकी मौत हो चुकी है।
दादा अपने पोते को गोद में लेकर बैठे रहे
शनिवार सुबह कार्तिक का अंतिम संस्कार किया गया। गांव के बाहर श्मशान पर टीम पहुंची तो दादा और पिता बार-बार कार्तिक का चेहरा देख उसे उठने को कह रहे थे। अंतिम क्रिया तक कार्तिक अपने दादा की गोद में ही था। कार्तिक के दादा ने बताया कि हमारे घर की खुशियां चली गई हैं। कार्तिक घर का इकलौता वारिस था। वह परिवार का पहला बच्चा था। अब जब वही इस दुनिया में नहीं रहा, तो हम भी जी कर क्या करेंगे। हम गरीब परिवार से आते हैं। इसलिए हमारी सुनवाई नहीं हो रही।
अपने इकलौते बेटे की मौत के बाद पिता बलराम का रो-रो कर बुरा हाल है। बेटे कार्तिक को आखिरी विदाई देने पहुंचे बलराम से चला तक नहीं जा रहा था। बेसुध बलराम ना किसी से बात कर रहे हैं, और ना ही कुछ खा-पी रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बलराम खुद मजदूरी करते हैं।
दिल्ली-जयपुर हाईवे जाम करेंगे
बासना गांव के रहने वाले महेंद्र योगी ने बताया कि शाम 6 बजे के बाद हमें अपने घर से बाहर निकलने में भी डर लगने लगा है। लेपर्ड आए दिन गांव की सड़कों पर घूमते दिखाई देते हैं। हम कई बार उनका वीडियो बनाकर प्रशासन तक भी अपनी समस्या पहुंचा चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पिछले दिनों गांव में भोमिया जी के मेले में भी 4 बच्चों को लेपर्ड ने घेर लिया था। बमुश्किल ग्रामीणों ने उन्हें बचाया। आज कार्तिक की मौत हुई है। कल किसी और बच्चे की मौत होगी। ऐसे में हम चुप नहीं बैठेंगे। अगर जल्द से जल्द लेपर्ड को नहीं पकड़ा गया, तो अब हम सब मिलकर दिल्ली-जयपुर हाईवे जाम करेंगे।
6 महीने से 5 बार मूवमेंट
बासना गांव के पूर्व सरपंच जगदीश प्रसाद मीणा ने बताया कि ये पहली बार नहीं है कि लेपर्ड का मूवमेंट लगातार बढ़ रहा है। पिछले 6 महीने में 5 बार लेपर्ड गांव में आ चुका है। जनवरी के आखिरी सप्ताह में लेपर्ड गांव की दो बकरियों को अपना शिकार बना चुका है। वहीं फरवरी के पहले सप्ताह में लेपर्ड गांव की पहाड़ियों पर घूमता दिखाई दे चुका है।
गांव के धर्मेंद्र ने बताया कि लेपर्ड अब तक गांव के 60 से ज्यादा मवेशियों को अपना शिकार बना चुका है। पिछले दिनों मेरी माताजी मवेशियों को चराने गई थीं। तब लेपर्ड उनके नजदीक पहुंचा और बकरे को उठाकर ले गया था।
घरों से बाहर नहीं निकल रहे
ग्रामीणों ने बताया कि वे कितना लेपर्ड के आतंक से परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना था कि शाम के बाद तो घर से बाहर भी निकलने में डर लगता है। न जाने कब लेपर्ड उन पर हमला कर दे। इस दौरान गांव के लोगों ने गांव के नजदीक ही गुफा दिखाया। बताया कि इन्हीं गुफाओं से लेपर्ड निकल गांव में आता है। ग्रामीणों ने बताया कि वे कई बार वीडियो तक बनाकर अधिकारियों को दे चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी आज दिन तक कार्रवाई नहीं की।
Naresh Chouhan 

