टॉपर्स मंत्रा - UPSC AIR 1 आदित्य श्रीवास्तव के टिप्स:रील्स देखकर रिलैक्स किया, शादियां अटेंड की; तीनों अटेम्प्ट में इंटरव्यू तक पहुंचा
टॉपर्स मंत्रा - UPSC AIR 1 आदित्य श्रीवास्तव के टिप्स:रील्स देखकर रिलैक्स किया, शादियां अटेंड की; तीनों अटेम्प्ट में इंटरव्यू तक पहुंचा
मेरा नाम आदित्य श्रीवास्तव है और 16 अप्रैल को जारी हुए UPSC के रिजल्ट में मेरी ऑल इंडिया रैंक 1 आई है। मैं लखनऊ का रहने वाला हूं और यह मेरा तीसरा अटेंप्ट था। सिविल सर्विस के पहले अटेंप्ट में मेरा सिलेक्शन नहीं हो सका था। दूसरे अटेंप्ट में मेरा सिलेक्शन हो गया था और मुझे इंडियन पुलिस सर्विस अलॉट हुई थी। हालांकि, हमेशा से ही मुझे IAS ऑफिसर बनने की इच्छा थी। इसलिए अंडर ट्रेनिंग होने के बावजूद एक अटेंप्ट और दिया और इस बार IAS के लिए चुन लिया गया हूं। कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़ की सिविल सर्विस की तैयारी
IIT कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में B.Tech-M.Tech का डुअल डिग्री कोर्स करने के बाद मेरा प्लेसमैंट अच्छी कंपनी में हुआ था। कुछ कॉर्पोरेट में नौकरी की भी। लेकिन मेरा मन नहीं लगा। डेस्क जॉब में कोई डायवर्सिटी थी ही नहीं। इसलिए एक दिन नौकरी छोड़ UPSC की तैयारी करने का मन बना लिया। घर पर पेरेंट्स को बताया तो उन्होंने भी सपोर्ट किया तो नौकरी छोड़ दी।
कॉर्पोरेट जॉब का भी एक अलग चार्म हैं, लेकिन जो चीजें मुझे चाहिए थी वो डेस्क जॉब से मिलना मुश्किल लग रहा था। आपको सोसाइटी के लिए काम करना है या ह्यूमन इंटरैक्शन वाला काम करना है तो वो आप कर सकते हैं वीकेंड पर, लेकिन कॉर्पोरेट में रहते हुए ये फुल टाइम पॉसिबल नहीं था। इसलिए, मैंने जॉब छोड़कर UPSC की तैयारी फुल टाइम करने का फैसला किया। IPS के लिए सिलेक्शन, फिर भी दिया एग्जाम
मुझे कॉर्पोरेट में काम करने के बाद इस तरह की नौकरी चाहिए थी जिसमें पीपल इंटरफेस हो और ग्रासरूट कनेक्ट हो। डायवर्सिटी इस तरह की हो कि पर्सनैलिटी डेवलपमेंट भी होता रहे। इन सभी पैरामीटर्स के लिए IPS भी एक प्रेस्टीजियस सर्विस है, लेकिन मुझे IAS बेहतर लगा। इन सभी फैक्टर्स को कंसीडर करते हुए मैंने IPS में सिलेक्शन के बावजूद तीसरी बार फॉर्म भरा था। ट्रेनिंग के साथ तैयारी करना चैलेंजिंग था
जब तक ट्रेनिंग शुरू हुई, प्रीलिम्स और मेन्स हो चुका था। नवंबर में जब ट्रेनिंग शुरू हुई तब तक सिर्फ इंटरव्यू बचा था। लेकिन तैयारी तो इंटरव्यू की भी करनी ही थी, जिसमें मुझे काफी दिक्कत हुई। क्योंकि 2-3 घंटे ही मिलते थे तैयारी के लिए, इसलिए टार्गेटेड स्टडी करनी पड़ी थी।
बाकी, IPS की ट्रेनिंग के साथ प्रीलिम्स और मेन की तैयारी पॉसिबल नहीं है, क्योंकि ट्रेनिंग जॉइन करते ही आपको क्लॉज साइन करना होता है कि जब तक आप ट्रेनिंग कर रहे हैं, आप एग्जाम नहीं लिख सकते। लेकिन क्योंकि मेरा प्रीलिम्स और मेन्स पहले ही हो चुका था और इंटरव्यू UPSC की ओर से एक समन की तरह होता है, तो वहां जाना अलाउड होता है। उसके लिए छुट्टी भी मिल जाती है। इंटीग्रेटेड अप्रोच से करें प्रीलिम्स और मेन्स की तैयारी
प्रीलिम्स की तैयारी मैं फरवरी से शुरू करता था, उसके पहले मेन्स के लिए पढ़ता था क्योंकि ज्यादातर कोर्स लगभग सेम ही होता है। मुझे लगता है कि इंटीग्रेटेड अप्रोच के साथ चलें तो दोनों की तैयारी साथ में कर सकते हैं।
प्रीलिम्स में फैक्ट्स पर फोकस करना होता है। एक्जैक्ट वर्ड्स, एक्जैक्ट नेम्स आपको पता होने चाहिए क्योंकि ऑप्शन्स उसी तरह से होते हैं। दूसरी ओर मेन्स में ब्रॉड अंडरस्टैंडिंग जरूरी है, क्योंकि वहां पर आपको दो पन्ने या कई पन्ने भरने होते हैं। मेन्स में भी आपको एक्जैक्ट फैक्ट्स डालने होते हैं, लेकिन एक ब्रॉड अंडरस्टैंडिंग भी जरूरी है। इसलिए पढ़ने का तरीका थोड़ा बदल जाता है। इंट्रेस्ट और स्कोरिंग एबिलिटी के आधार पर चुनें ऑप्शनल
UPSC में मेनली चार सब्जेक्ट अपने थ्योरिटिकल हैं, जिनमें आपको याद करना है फैक्ट्स और डाटा। इसलिए मैंने सोचा ऑप्शनल भी थ्योरिटिकल नहीं लेना चाहिए। साथ ही पर भी ध्यान देना चाहिए। ध्यान से देखें कि किस सब्जेक्ट्स में आप ऐसा परफॉर्म कर पा रहे हैं कि उसमें आपको बेहतर स्कोर मिल रहा है। आपको ऑप्शनल चुनने से पहले इंट्रेस्ट प्लस स्कोरिंग एबिलिटी कंसीडर करनी चाहिए। इंटरव्यू के लिए ये हैं टॉपर आदित्य श्रीवास्तव के टिप्स… इंटरव्यू में नहीं पूछे जाते सोशल मीडिया पर वायरल ‘अजीब’ सवाल
इंटरव्यू में ज्यादातर सवाल बैकग्राउंड से पूछे जाते है। जैसे इस बार पुलिसिंग से मैक्सिमम सवाल पूछे गए, क्योंकि मैं IPS में था पहले से ही। कुछ सवाल मेरी रीडिंग अबाउट डायनासोर की हॉबी से रिलेटेड पूछे गए। बाकी कुछ सवाल थे कि IAS में क्यों जाना है, IFS में क्यों नहीं जाना है। 2022 में भी इसी तरह इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, डायनासोर और मेरी हॉबी से रिलेटेड सवाल थे।
बाकी, सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले सवालों के बारे में ये नहीं कहूंगा कि बिल्कुल नहीं पूछे जाते, लेकिन मुझसे नहीं पूछे गए और मेरे साथ एग्जाम देने वाले जितने कैंडिडेट्स उनमें से भी किसी से इस तरह के सवाल नहीं पूछे गए। हालांकि इस तरह के सवाल पूछ सकते हैं जिसमें आपका प्रेंजेस ऑफ माइंड टेस्ट होता है। डायनासोर के बारे में पढ़ना अच्छा लगता है
डायनासोर के बारे में पढ़ना मुझे पसंद है। DAF में मैंने इसे एक हॉबी की तरह लिखा भी था। ये काफी पहले शुरू हुआ था। नर्सरी या KG में मैंने जुरासिक पार्क, गॉडजिला जैसी फिल्में देखी थीं। उस समय मुझे पता भी नहीं था कि गॉडजिला डॉयनोसॉर नहीं है। धीरे-धीरे वहां से मेरा इंट्रेस्ट डेवलप हुआ। फिर डायनासोर की मूवीज के बारे में पढ़ा, वहां से डायनासोर में इंट्रेस्ट डेवलप हुआ और डायनासोर के बारे में पढ़ना शुरू किया। इस तरह इंट्रेस्ट डेवलप होता चला गया। UPSC के लिए मैंने नहीं की कोई कोचिंग
UPSC की तैयारी मैंने बिना कोचिंग के सेल्फ स्टडी के सहारे ही की। सिर्फ टेस्ट सीरीज जॉइन की थी। इसके अलावा मैं ऐसे कई सीनियर्स को जानता हूं जिन्होंने घर से ही तैयारी की थी। बहुत से दूसरे लोग हैं जिन्होंने बिना कोचिंग के एग्जाम क्रैक किया है। तो बिल्कुल बिना कोचिंग के एग्जाम क्लियर किया जा सकता है। बस डिपेंड करता है कि आप कितने डेडिकेटेड और मोटिवेटेड हैं। आंख मूंदकर UPSC के पीछे न लगे रहें
UPSC डेफिनेटली एक रिस्क तो है।
मेरा नाम आदित्य श्रीवास्तव है और 16 अप्रैल को जारी हुए UPSC के रिजल्ट में मेरी ऑल इंडिया रैंक 1 आई है। मैं लखनऊ का रहने वाला हूं और यह मेरा तीसरा अटेंप्ट था। सिविल सर्विस के पहले अटेंप्ट में मेरा सिलेक्शन नहीं हो सका था। दूसरे अटेंप्ट में मेरा सिलेक्शन हो गया था और मुझे इंडियन पुलिस सर्विस अलॉट हुई थी। हालांकि, हमेशा से ही मुझे IAS ऑफिसर बनने की इच्छा थी। इसलिए अंडर ट्रेनिंग होने के बावजूद एक अटेंप्ट और दिया और इस बार IAS के लिए चुन लिया गया हूं। कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़ की सिविल सर्विस की तैयारी
IIT कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में B.Tech-M.Tech का डुअल डिग्री कोर्स करने के बाद मेरा प्लेसमैंट अच्छी कंपनी में हुआ था। कुछ कॉर्पोरेट में नौकरी की भी। लेकिन मेरा मन नहीं लगा। डेस्क जॉब में कोई डायवर्सिटी थी ही नहीं। इसलिए एक दिन नौकरी छोड़ UPSC की तैयारी करने का मन बना लिया। घर पर पेरेंट्स को बताया तो उन्होंने भी सपोर्ट किया तो नौकरी छोड़ दी।
कॉर्पोरेट जॉब का भी एक अलग चार्म हैं, लेकिन जो चीजें मुझे चाहिए थी वो डेस्क जॉब से मिलना मुश्किल लग रहा था। आपको सोसाइटी के लिए काम करना है या ह्यूमन इंटरैक्शन वाला काम करना है तो वो आप कर सकते हैं वीकेंड पर, लेकिन कॉर्पोरेट में रहते हुए ये फुल टाइम पॉसिबल नहीं था। इसलिए, मैंने जॉब छोड़कर UPSC की तैयारी फुल टाइम करने का फैसला किया। IPS के लिए सिलेक्शन, फिर भी दिया एग्जाम
मुझे कॉर्पोरेट में काम करने के बाद इस तरह की नौकरी चाहिए थी जिसमें पीपल इंटरफेस हो और ग्रासरूट कनेक्ट हो। डायवर्सिटी इस तरह की हो कि पर्सनैलिटी डेवलपमेंट भी होता रहे। इन सभी पैरामीटर्स के लिए IPS भी एक प्रेस्टीजियस सर्विस है, लेकिन मुझे IAS बेहतर लगा। इन सभी फैक्टर्स को कंसीडर करते हुए मैंने IPS में सिलेक्शन के बावजूद तीसरी बार फॉर्म भरा था। ट्रेनिंग के साथ तैयारी करना चैलेंजिंग था
जब तक ट्रेनिंग शुरू हुई, प्रीलिम्स और मेन्स हो चुका था। नवंबर में जब ट्रेनिंग शुरू हुई तब तक सिर्फ इंटरव्यू बचा था। लेकिन तैयारी तो इंटरव्यू की भी करनी ही थी, जिसमें मुझे काफी दिक्कत हुई। क्योंकि 2-3 घंटे ही मिलते थे तैयारी के लिए, इसलिए टार्गेटेड स्टडी करनी पड़ी थी।
बाकी, IPS की ट्रेनिंग के साथ प्रीलिम्स और मेन की तैयारी पॉसिबल नहीं है, क्योंकि ट्रेनिंग जॉइन करते ही आपको क्लॉज साइन करना होता है कि जब तक आप ट्रेनिंग कर रहे हैं, आप एग्जाम नहीं लिख सकते। लेकिन क्योंकि मेरा प्रीलिम्स और मेन्स पहले ही हो चुका था और इंटरव्यू UPSC की ओर से एक समन की तरह होता है, तो वहां जाना अलाउड होता है। उसके लिए छुट्टी भी मिल जाती है। इंटीग्रेटेड अप्रोच से करें प्रीलिम्स और मेन्स की तैयारी
प्रीलिम्स की तैयारी मैं फरवरी से शुरू करता था, उसके पहले मेन्स के लिए पढ़ता था क्योंकि ज्यादातर कोर्स लगभग सेम ही होता है। मुझे लगता है कि इंटीग्रेटेड अप्रोच के साथ चलें तो दोनों की तैयारी साथ में कर सकते हैं।
प्रीलिम्स में फैक्ट्स पर फोकस करना होता है। एक्जैक्ट वर्ड्स, एक्जैक्ट नेम्स आपको पता होने चाहिए क्योंकि ऑप्शन्स उसी तरह से होते हैं। दूसरी ओर मेन्स में ब्रॉड अंडरस्टैंडिंग जरूरी है, क्योंकि वहां पर आपको दो पन्ने या कई पन्ने भरने होते हैं। मेन्स में भी आपको एक्जैक्ट फैक्ट्स डालने होते हैं, लेकिन एक ब्रॉड अंडरस्टैंडिंग भी जरूरी है। इसलिए पढ़ने का तरीका थोड़ा बदल जाता है। इंट्रेस्ट और स्कोरिंग एबिलिटी के आधार पर चुनें ऑप्शनल
UPSC में मेनली चार सब्जेक्ट अपने थ्योरिटिकल हैं, जिनमें आपको याद करना है फैक्ट्स और डाटा। इसलिए मैंने सोचा ऑप्शनल भी थ्योरिटिकल नहीं लेना चाहिए। साथ ही पर भी ध्यान देना चाहिए। ध्यान से देखें कि किस सब्जेक्ट्स में आप ऐसा परफॉर्म कर पा रहे हैं कि उसमें आपको बेहतर स्कोर मिल रहा है। आपको ऑप्शनल चुनने से पहले इंट्रेस्ट प्लस स्कोरिंग एबिलिटी कंसीडर करनी चाहिए। इंटरव्यू के लिए ये हैं टॉपर आदित्य श्रीवास्तव के टिप्स… इंटरव्यू में नहीं पूछे जाते सोशल मीडिया पर वायरल ‘अजीब’ सवाल
इंटरव्यू में ज्यादातर सवाल बैकग्राउंड से पूछे जाते है। जैसे इस बार पुलिसिंग से मैक्सिमम सवाल पूछे गए, क्योंकि मैं IPS में था पहले से ही। कुछ सवाल मेरी रीडिंग अबाउट डायनासोर की हॉबी से रिलेटेड पूछे गए। बाकी कुछ सवाल थे कि IAS में क्यों जाना है, IFS में क्यों नहीं जाना है। 2022 में भी इसी तरह इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, डायनासोर और मेरी हॉबी से रिलेटेड सवाल थे।
बाकी, सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले सवालों के बारे में ये नहीं कहूंगा कि बिल्कुल नहीं पूछे जाते, लेकिन मुझसे नहीं पूछे गए और मेरे साथ एग्जाम देने वाले जितने कैंडिडेट्स उनमें से भी किसी से इस तरह के सवाल नहीं पूछे गए। हालांकि इस तरह के सवाल पूछ सकते हैं जिसमें आपका प्रेंजेस ऑफ माइंड टेस्ट होता है। डायनासोर के बारे में पढ़ना अच्छा लगता है
डायनासोर के बारे में पढ़ना मुझे पसंद है। DAF में मैंने इसे एक हॉबी की तरह लिखा भी था। ये काफी पहले शुरू हुआ था। नर्सरी या KG में मैंने जुरासिक पार्क, गॉडजिला जैसी फिल्में देखी थीं। उस समय मुझे पता भी नहीं था कि गॉडजिला डॉयनोसॉर नहीं है। धीरे-धीरे वहां से मेरा इंट्रेस्ट डेवलप हुआ। फिर डायनासोर की मूवीज के बारे में पढ़ा, वहां से डायनासोर में इंट्रेस्ट डेवलप हुआ और डायनासोर के बारे में पढ़ना शुरू किया। इस तरह इंट्रेस्ट डेवलप होता चला गया। UPSC के लिए मैंने नहीं की कोई कोचिंग
UPSC की तैयारी मैंने बिना कोचिंग के सेल्फ स्टडी के सहारे ही की। सिर्फ टेस्ट सीरीज जॉइन की थी। इसके अलावा मैं ऐसे कई सीनियर्स को जानता हूं जिन्होंने घर से ही तैयारी की थी। बहुत से दूसरे लोग हैं जिन्होंने बिना कोचिंग के एग्जाम क्रैक किया है। तो बिल्कुल बिना कोचिंग के एग्जाम क्लियर किया जा सकता है। बस डिपेंड करता है कि आप कितने डेडिकेटेड और मोटिवेटेड हैं। आंख मूंदकर UPSC के पीछे न लगे रहें
UPSC डेफिनेटली एक रिस्क तो है। आपके यूथ के प्राइम इयर्स इसकी प्रिपेरेशन में निकल जाते हैं, तो आपको हमेशा एक बैलेंस्ड स्ट्रैटेजी अपनानी चाहिए। यह नहीं करना है कि आंख मूंदकर इसके पीछे लग जाना है। डिसाइड करें कि 2 या 3 अटेंप्ट देने हैं, उसमें अपनी सारी शक्ति झोंक दें। लेकिन ऐसा नहीं है कि 6-7 साल लगे ही हुई है, एग्जाम दिए जा रहे हैं। क्योंकि एक उम्र के बाद जीवन में और चीजें भी जरूरी होती है। आप पढ़ते नहीं रह सकते। जब लगे कि आपका टार्गेट पूरा हो गया है, चाहे सिलेक्शन हुआ हो या नहीं, उसके बाद अलटरनेटिव करियर पर ध्यान दें। साथ ही अपना प्लान B हमेशा रेडी रखें। स्मार्ट वर्क v/s हार्ड वर्क
प्रीलिम्स के पहले अटेंप्ट में मैंने सारी बुक्स कवर की थी और अच्छे से अटेंप्ट देकर आया था। 90-92 सवाल अटेंप्ट किए था, लेकिन मेरा स्कोर 82 बना था और मैं 2-3 नंबर से मिस कर गया था। फिर मैंने अपनी गलती पहचानी कि ये सिर्फ हार्ड वर्क था, इसमें स्मार्ट वर्क मिसिंग था। तब दूसरे अटेंप्ट के लिए मैंने प्रीवियस ईयर क्वेश्चन्स को ढंग से देखा, 10 साल के पेपर देखे। आखिरी तीन साल के पेपर अच्छी तरह एनालाइज किए। स्टेटमेंट किस तरह से लिखें हैं, किस तरह की चीजें हर बार ही गलत लिखीं जा रही हैं, किस तरह के स्टेटमेंट हर बार सही हैं। इस तरह के ऑब्जर्वेशन किए और वहां से डिसाइड किया कि अब जो सवाल नहीं आते होंगे, मेरी नॉलेज जहां सपोर्ट नहीं करेगी, वहां इन ऑब्जर्वेशन्स का सहारा लूंगा। इससे नंबर ऑफ ऑप्शन्स को नैरो डाऊन करूंगा। इतना करने से मेरे मार्क्स 84 से 114 हो गए थे।
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