लौट आओ इन माटी के बर्तनों की ओर !
हजारों सालों से हमारे यहाँ मिट्टी के बर्तनों का उपयोग होता आया है। 30, से 40 सालो पहले तक गाँव की शादियों में तो मिट्टी के बर्तन ही उपयोग में आते थे घरों में दाल पकाने सब्जी बनाने में दूध गरम करने में , दही जमाने चावल बनाने और आचार रखने के लिए मिट्टी के बर्तनों का उपयोग होता रहा है। मिट्टी के बर्तन में जो भोजन पकता है, उसमे सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients) की कमी नही होती हैं जबकि प्रेशर कुकर अन्य बर्तनों में पकाने से सुक्ष्म पोषक तत्वों 85% कम हो जाते हैं जिससे हमारे भोजन की पौष्टिकता कम हो जाती है। खाना धीरे धीरे पकाना चाहिए तभी वह पौष्टिक और स्वादिष्ट पकेगा और उसके सूक्ष्म पोषक तत्व सुरक्षित रहेंगे।
हमारे शरीर को प्रतिदिन 18 प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्व चाहिए जो मिट्टी से ही आते है। जैसे आयरन,फास्फोरस ,कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर,पोटेशियम, कॉपर , आदि मिट्टी के इन्हीं गुण और पवित्रता के कारण हमारे यहाँ भारत के कुछ मंदिरों में आज भी मिट्टी के बर्तनों में प्रसाद बनता है। गुजरात, राजस्थान के बाड़मेर जैसलमेर पाली जिले और भी कई राज्यों में लाखो लोग आज भी मिट्टी के बर्तन में खाना पकाते हैं। मिट्टी उष्मा की कुचालक हैं
अधिकांश लोग जानते हैं कि ऐल्मूनियम के बर्तनों में बना भोजन हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इससे हमारे स्नायु कोश, रक्त कण नष्ट हो जाते हैं। आँते भी काम करना बन्द कर देती हैं और आँतों में पड़े मल पदार्थ सड़ते रहते हैं, पाचन बहुत कमजोर हो जाता है। ऐल्मूनियम से एल्जाईमर, पार्किनसन जैसे गंभीर मानसिक रोग होते हैं। नॉनस्टिक बर्तन रासायनिक परत के कारण और अधिक हानिकारक हो जाते हैं। राष्ट्रवाद के प्रवक्ता श्री राजीव दीक्षित जी ने मधुमेह के सैकड़ो रोगियों को मिट्टी के बर्तनों में बना खाना खाने की सलाह दी। आश्चर्यजनक रूप से वे सभी मधुमेह रोगी पूरी तरह रोग मुक्त हो गए।
ये कारण है की शरीर को आवश्यक माइक्रो न्यूट्रिएंट्स की पूर्ति अगर नियमित रूप से होती रहे तो आपका शरीर ज्यादा दिन तक बिना किसी के मदद लेते हुए काम करता रहता है तो माइक्रो न्यूटिएंटस का पूरा सप्लाई मिलता हैं दाल आपने वो खाई थी जो मिट्टी की हांड़ी में पकी थी और ना सिर्फ वो दाल पकाती हैं मिट्टी की हांड़ी में बल्कि दूध , सब्ज़ी, घी , दही का मठ्ठा भी मिट्टी के हांड़ी का ही श्रेष्ठ होता हैं ।
सबसे अच्छे बर्तन मिट्टी के होते हैं। कांच के बर्तन या वस्तुएं मिट्टी से बनते हैं। शरीर में पाये जाने वाले सभी 18 सूक्ष्म पोषक तत्व मिट्टी में भी होते हैं इसलिए मिट्टी शरीर के आवश्यक सभी सूक्ष्म पोषक तत्वों की माँ है। फास्फोरस सल्फर, जिंक मैग्नीशियम, मैंगनीज, आयरन जैसे तत्व मिट्टी से ही मिलते हैं। मिट्टी ने लाखों-करोड़ों साल से सूर्य की धूप में जो तपस्या की है उसी का ये परिणाम है कि सभी पोषक तत्व मिट्टी में विद्यमान हैं जो किसी भी जीव को चाहिए वो इस मिट्टी से किसी न किसी रूप से जुड़ा है। कैल्शियम और आयरन की कमी के कारण ज्यादातर बच्चे आपरेशन के द्वारा पैदा होते हैं। सीजर करवाने वाली हर स्त्री को दर्द से छुटकारा कभी नहीं मिलता है । उसका कारण ये प्रेशर कुकर एल्युमिनियम स्टील के बर्तन ही हैं ।
आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है। भोजन उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त है मिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे 100 प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है। काली मिट्टी का तवा मक्की की रोटी के लिए सबसे अच्छा होता है। लाल मिट्टी का तवा गेहूँ की रोटी के लिए सबसे अच्छा होता है तथा पीली मिट्टी का तवा बाजरे की रोटी के लिए अच्छा होता है। आज जितनी भी प्रकार की बीमारिया हम देख रहे है उनका मुख्य कारण प्रेशर कुकर, एल्युमिनियम, स्टील बर्तनों में बना भोजन ही है। इन बिमारियों से बचने के लिए हमे अपनी आँख व कान खोलने होंगे व स्टील , एल्युमिनियम से बने बर्तनों को अपने घरो से विदा करना होगा।
इसलिए मित्रो हमारी हजारो वर्ष पुराणी संस्कृति को मत छोड़िए और अपने दोस्तों को भी इस पोस्ट को शेयर कर के बताइए और अगर पोस्ट से सम्बंधित कोई सवाल है तो आप हमें कोम्मेंट के द्वारा पूछ सकते हैं ।


