लोन न लो 1.35 लाख किसानों पर बैंक बना रहे कुर्की का दबाव, वसूली 3 हजार कराेड़ की; 9 हजार लोगों की जमीन नीलामी की कार्रवाई शुरू
प्रदेश में कांग्रेस सरकार की किसान कर्जमाफी योजना के बावजूद 1 लाख 35 हजार 151 किसानों पर संपत्ति कुर्की होने का खतरा मंडरा रहा है। दरअसल, कमर्शियल बैंकाें ने इन किसानों के लाेन एनपीए खाताें में डाल दिए हैं। इन किसानों पर 2 हजार 928 कराेड़ रुपए बकाया है। बैंकों ने वसूली के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर राजस्थान एग्रीकल्चरल क्रेडिट ऑपरेशन (रिमूवल ऑफ डिफिक्ल्टीज) एक्ट (राेडा) में केस दर्ज कराए हैं। इनमें से 80 हजार 752 एनपीए खाते एक साल से अधिक पुराने हैं। बैंक इस फंसे ऋण की वसूली में राज्य सरकार से भी मदद मांग चुके हैं।
पिछले माह मुख्यमंत्री अशाेक गहलोत की मौजूदगी में हुई राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की बैठक में भी वसूली का मुद्दा उठा था। बता दें, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने पिछले साल कृषि एनपीए के लिए एकमुश्त निपटान योजना (ओटीएस) के तहत 10% राशि लेकर खाते बंद किए थे। पर राज्य सरकार ने तब इस पर कोई पहल नहीं की। लेकिन अब हुई बैंकर्स कमेटी की बैठक में सीएम ने एनपीए लाेन का 10% लेकर खाताें काे बंद करने के लिए फिर से ओटीएस योजना लाने काे कहा। दूसरी ओर, बैंकों ने 9 हजार किसानों की जमीन नीलामी की कार्रवाई शुरू कर दी है। यह जानकारी उस रिपोर्ट में है जो राजस्व विभाग ने मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपी है। यह रिपोर्ट प्रदेश के सभी एसडीएम कोर्ट में दर्ज केसों के आधार पर तैयार हुई है।
प्रदेश के सभी 33 जिलों में किसान और बैंकों के बीच विवाद के 1 लाख 11 हजार 727 केस दर्ज हैं। इनमें से 9 हजार 109 किसानों की कुर्की के आदेश जारी हो चुके हैं। यानी इतने किसानों की जमीन नीलाम करने की कार्रवाई सरकार के स्तर पर शुरू की जा चुकी है। हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश के बाद सभी जगह नीलामी की कार्रवाई स्थगित कर दी गई है। साथ ही कलेक्टरों से उनके ओवरड्यू ऋणों की जानकारी ली गई है। प्रदेश में कृषि बजट आने वाला है। गहलोत सरकार इसमें कोई मास्टर स्ट्रोक खेल सकती है।
संभावना है कि यदि केंद्र सरकार वन टाइम सेटलमेंट स्कीम लागू नहीं करता तो गहलोत सरकार खुद ही इस कर्ज को अपने उपर लेले। इसके अलावा सरकार कोऑपरेटिव सेक्टर के किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण फैसले करने जा रही है। इसमें भूमि विकास बैंकों में 31 मार्च तक ओवरड्यू हो चुके ऋणों तथा ब्याज में मिलने वाली छूट की अवधि को 31 मार्च तक बढ़ाए जाने का प्रस्ताव भी तैयार कर लिया गया है।

राज्य सरकार कर्ज वसूली टाल तो सकती है, पर कमर्शियल बैंकों को नहीं रोक सकती
प्रदेश में किसानों की संपत्ति की कुर्की क्यों हो रही है?
प्रदेश सरकार ने सहकारी बैंकों के किसानाें की कर्जमाफी के बाद कमर्शियल बैंकों के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना लाने का ऐलान किया था। दिसंबर 2018 तक कमर्शियल बैंकों का 2 लाख किसानों पर करीब 6 हजार करोड़ रुपए ओवरड्यू हो चुका था। सरकार के ऐलान के बाद किसानों ने यह राशि बैंकों को चुकानी बंद कर दी। लेकिन योजना केंद्र और राज्य के बीच फुटबाॅल बन गई और किसान कुर्की की चपेट में आ गए हैं।
अभी कृषि एनपीए खाते कैसे बंद कराए जा सकते हैं?
एसबीआई समेत अन्य बैंक फंसे कृषि लाेन की 30-50% राशि लेकर एनपीए खाते सेटल कर रहे हैं। राज्य सरकार योजना के तहत न्यूनतम 30% राशि देकर खाते बंद करा सकती है। हालांकि इससे 1,500 कराेड़ रुपए तक का बाेझ आएगा। अभी ऐसी काेई पहल नहीं हुई है। बीते साल एसबीआई ने ओटीएस स्कीम से 1,500 कराेड़ रु. के वसूले थे।
क्या राज्य सरकार किसानों से वूसली राेक सकती है?
बैंक अधिकारियों के अनुसार राज्य सरकार राेडा के तहत कर्ज वसूली टाल तो सकती है, राेक नहीं सकती। बैंक आरबीआई के नियमों से कार्य करते हैं। राज्य कानून बनाए तो भी वसूली बेअसर रहेगी।
कर्जमाफी किसानों की कितनी मदद करती है?
किसान महापंचायत अध्यक्ष रामपाल जाट के अनुसार कर्जमाफी वाेटों के लिए हाेती है। फसल काे एमएसपी पर खरीदने की व्यवस्था हो तो उपज का पूरा पैसा मिलेगा और किसान स्वत: कर्ज मुक्त हाे जाएगा।
कर्जमाफी के लिए अब क्या रास्ता है?
सरकार ने किसानों की कुर्की को स्थगित कर कलेक्टरों से ओवरड्यू लोन की जानकारी जुटाई है। राज्य सरकार कर्ज अपने उपर ले सकती है। राज्य बजट आने को है। इसमें कोऑपरेटिव सेक्टर के किसानों के लिए भूमि विकास बैंकों में 31 मार्च तक ओवरड्यू लोन और ब्याज में छूट की अवधि 31 मार्च तक बढ़ाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है।
इन सवालों के जवाब बाकी...
- सरकार से- जो किसान नवंबर, 2018 के बाद डिफाॅल्टर हुए उनका कर्जमाफ कैसे हाेगा। कृषि यंत्र या अन्य कार्यों के लिया लोन योजना में क्यों नहीं है। क्या यह श्रेणी में नहीं है।
- किसान एसबीआई या बैंकों की सेटलमेंट योजना का लाभ क्यों नहीं ले पा रहे हैं। सरकार से ही मदद की दरकार क्याें है।
- बैंकों से- आज तक सरकार काे डिफाॅल्टर किसानों की सूची उपलब्ध क्यों नहीं कराई। वन टाइम सेटलमेंट योजना के तहत कर्ज सेटल करने के लिए सरकार से बातचीत क्यों नहीं करते।
प्रदेश में कुल एनपीए 18,519 कराेड़ रु, इसमें कृषि 8.38%
एसएलबीसी के अनुसार सितंबर 2021 तक प्रदेश में कुल लाेन राशि 4,19,042 करोड़ रुपए थी। इसमें 18,519 कराेड़ रुपए का लाेन एनपीए है। इसमें से किसानों का 3,000 कराेड़ रुपए है। किसानों काे दिए गए कर्ज की 8.38% राशि एनपीए हाे चुकी है।


