हरड़ एक अत्यंत लाभकारी औषधि।
हरड़, जिसे हरीतकी भी कहा जाता है, एक प्रसिद्ध जड़ी-बूटी है। यह त्रिफला में पाए जाने वाले तीन फलों में से एक है। भारत में इसका इस्तेमाल घरेलू नुस्खों के तौर पर खूब किया जाता है। आयुर्वेद में तो इसके कई चमत्कारिक फायदे बताए गए हैं। दरअसल, इसे त्रिदोष नाशक औषधि माना जाता है। यह पित्त के संतुलन को तो बनाए रखता ही है, साथ ही यह कफ और वात संतुलन को भी बनाकर रखता है। कई बीमारियों में इसे बेहद ही फायदेमंद माना जाता है, जिसमें पाचन से जुड़ी समस्याएं भी शामिल हैं।
हरड़ का नियमित रूप से इस्तेमाल सेवन आपके पाचन तंत्र को सुधार सकता है। इसे गैस, अपच और कब्ज जैसी पेट की कई समस्याओं में कारगर माना गया है। एक कप गर्म पानी में 1-3 ग्राम हरड़ का सेवन आपको पाचन संबंधी परेशानियों में राहत दिला सकता है।
वजन घटाने में भी हरड़ काफी लाभदायक माना जाता है। इसके अलावा दिल के रोगों से बचने के लिए नियमित रूप से इसका सेवन करें। ब्लड शुगर का स्तर भी नियमित बनाए रखने के लिए हरड़ का सेवन किया जा सकता है। इसका उपयोग सिर दर्द और बदन दर्द आदि में भी किया जाता है।
हरड़ का सेवन उल्टी में भी राहत दिला सकता है। अगर आपको उल्टी जैसा महसूस हो रहा है तो हरड़ का सेवन कर सकते हैं। इससे यह समस्या दूर हो सकती है। इसके अलावा दस्त की समस्या में भी हरड़ बेहद फायदेमंद होता है। आप दस्त होने पर हरड़ की चटनी बनाकर खा सकते हैं। इससे राहत मिलेगी।
1. हरीतकी को चबाकर खाने से जठराग्नि की वृद्धि होती है।
2. हरीतकी को पीसकर खाने से मल का शोधन होता है।
3. हरीतकी को उबालकर खाने से मल का स्तम्भन होता है।
4. हरीतकी को भूनकर खाने से त्रिदोष का शमन होता है।
5. हरीतकी को भोजन के साथ सेवन करने से बुद्धि, बल तथा इन्द्रियों को ताकत मिलती है , त्रिदोष का शमन तथा मल-मूत्र का विरेचन होता है।
6. हरीतकी को भोजन के बाद सेवन करने से अन्नपान सम्बन्धी विकारों तथा दोषों से उत्पन्न होने वाले विकारों का शमन होता है।
7. हरीतकी को सेंधा नमक के साथ खाने से कफज विकारों का शमन होता है।
8. हरीतकी को शक्कर के साथ खाने से पित्तज विकारों का शमन होता है।
9. हरीतकी को घृत के साथ खाने से वात सम्बन्धी विकारों का शमन होता है।
10. हरीतकी को गुड़ के साथ खाने से समस्त व्याधियों में लाभ होता है।


