गौरेया

Mar 20, 2021 - 04:42
Mar 1, 2023 - 21:20
गौरेया
गौरेया

#गौरैया

क्या हमें अपना बचपन याद है ? क्या वो भूरी छोटी सी चिड़िया भी याद है जो बार-बार हमारे आंगन में फुदकती रहती थी ? याद करके देखिये कि कितने दिनों से आपने उस छोटी सी गौरैया को नहीं देखा है ? कुछ याद आया ? वो आंगन में उसे पकड़ने के लिए तरह के उपाय करना फिर उसका फुरर से उड़ जाना? ज्यादा कर गौरेया को हमेशा शरदकालीन एवं शीतकालीन फसलों के दौरान, खेत-खलिहानों में अनेक छोटे-छोटे पक्षियों के साथ फुदकते देखा जा सकता था अब तो कुछ याद आया ही होगा ?  वह गौरैया भी अब लुप्त होने वाले हैं। इसलिए इस बेहद शर्मीली और घरेलू चिड़िया के जीवन पर ही संकट आ गया है। दुनिया में इस तरह विलुप्त होने को बचाने के लिए जुटी संस्थाएं 20 मार्च को विश्व गौरवैया दिवस के रूप में मनाते हैं । हो सकता है कि हमारे आस पास भी कहीं पर ये चिड़िया बची हो ?

कुछ प्रयास करके हम इसे बचाने में काफी मदद कर सकते हैं। सबसे पहले अपने घरों के पास खाने की जूठन को थोड़ी मात्रा में खुली जगह पर रखना चाहिए जिससे उन्हें खाने के लिए बहुत दूर तक न जाना पड़े। घर में अगर किसी तरह का पेड़ लगाया जाता है तो कुछ धब्बेदार संयंत्र भी जा सकते हैं जिससे उनमें से अपना घर बनाने में सक्षम हो सके। यदि हमारे पास और कुछ नहीं हैं तो कम से कम अपने घरों में हम लकड़ी के एकाद जा सकते हैं तो रख सकते हैं जिनमे ये आपका घोंसला बना हुआ पर्याप्त है। आज के समय में उनके सामने खाने और रहने की बहुत बड़ी समस्या है अगर इस तरह से कोई माहौल मिलने लगेगा तो बहुत जल्द ये फिर से हमारे आंगन में फुदकती हुई नजर आएगी।

गौरैया की घटती संख्या को लेकर मेरा निजी अनुभव ये है कि आज से करीब 15 साल पहले ये मेरे खेत के पास एक पेड़ पर सैड़कों की संख्या में रहती थी, लेकिन आज ये शायद ही कभी दिखती है। ये पहले लगभग हर कच्चे घर तिबारी झोपड़ी के अंदर अपना घोसला बना लेती थी, लेकिन आज शायद ही कहीं इसका घोसला देखने को मिलता है। 

गौरैया की लगातार घटती संख्या को लेकर देश प्रदेश की कई संस्थानों ने कहा कि इस पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट करने के लिए इंसान ही जिम्मेदार है, क्योंकि गौरैया की घटती संख्या के पीछे जो कारण सामने आए हैं वो उनके रहवास की समस्या के साथ साथ मोबाइल रेडिएशन हैं, रहवास ना होने से गौरैया करंट या तीव्र ध्वनि की चपेट में आने से विलुप्त हो रही है तो वहीं मोबाइल रेडिएशन की वजह से मादा गौरैया की प्रजनन क्षमता खत्म होने की भी बात सामने आई है 

आने वाले वर्ष गौरेया दिवस मनाए, उसी तरह दाना पानी की व्यवस्था भी सुनिश्चित करें...।

Narpat Singh Shekhawat Traditional Yoga instructor , A volunteer nature lover, clean environment health world, tree our friend, social work since 2015, encouraging youth. One World One Meditation - Continuing efforts to spread the message of unity, peace and love. (Master of Arts)