9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए नवंबर में खुल सकते हैं स्कूल
प्रदेश में नवंबर माह से 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को एक या दो दिन छोड़कर स्कूल बुलाया जा सकता है। इसके बाद अन्य कक्षाओं के लिए भी धीरे धीरे स्कूलों को खोला जा सकता है। प्रदेश में स्कूल खोलने को लेकर बुधवार को शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें सामने आया कि जीरो सेशन करने की नौबत नहीं आए।
इसके लिए बच्चों की पढ़ाई होना जरुरी है। इसलिए विभाग गाइडलाइन तैयार करे। अधिकारियों का मानना था कि जीरो सेशन करने से 9वीं से 12वीं तक के 25 लाख विद्यार्थियों को नुकसान होगा। इसलिए जीरो सेशन विद्यार्थियों के हित में नहीं है।
बैठक में अन्य राज्यों में स्कूलों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही स्कूल खुलने पर सिलेबस कम करने और परीक्षाओं को लेकर भी चर्चा की गई। अब पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजी जाएगी। इसके बाद स्कूल खुलने को लेकर अंतिम निर्णय होगा।
कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए यह हो सकती है गाइडलाइन
- बोर्ड कक्षाओं का पाठ्यक्रम कम कर दिया जाए। इस पर कवायद शुरू हो गई है।
- 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को नवंबर से स्कूल बुलाया जाए।
- अब तक पढ़ाई के जितने कार्यदिवस कम हुए हैं। इसकी कुछ हद तक भरपाई के लिए बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन देरी से किया जाए।
- शीतकालीन अवकाश की अवधि को घटा दिया जाए।
- अगले साल मार्च की बजाय अप्रैल या मई में बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन कर लिया जाए। जून में परिणाम जारी कर दिया जाए।
पहली से आठवीं तक के बच्चों को दिसंबर में बुलाया जा सकता है स्कूल
- दिसंबर से आठवीं के बच्चों को स्कूल बुलाया जाए। अन्य कक्षाओं के बच्चों को भी धीरे धीरे बुलाया जाए।
- टेस्ट, अर्द्धवार्षिक परीक्षा, वार्षिक परीक्षा के स्थान पर एक ही परीक्षा ले ली जाए। उसी के आधार पर बच्चों को प्रमोट किया जाए।
- अलग से वर्क बुक बनाई जाए। इस वर्क बुक के आधार पर छोटे बच्चों की पढ़ाई करा ली जाए और उसी आधार पर परीक्षा ले ली जाए।


