एक इंजेक्शन की कीमत ‌40 हजार रुपए, मुख्यमंत्री ने नि:शुल्क लगाने के लिए भेजे

एक इंजेक्शन की कीमत ‌40 हजार रुपए, मुख्यमंत्री ने नि:शुल्क लगाने के लिए भेजे

कोरोना मरीजों और उनके बेहतर स्वास्थ्य को लेकर प्रशासनिक कवायद नाकाफी साबित हो रही है। मामला एसएमएस मेडिकल कॉलेज से मिले 5 जीवनरक्षक टोसिलिजुमेब इंजेक्शन से जुड़ा हुआ है। आप भी पढ़कर हैरान होंगे कि स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी जद्दोजहद से मिले इन 5 इंजेक्शनों को सरकार को वापस सिर्फ इसलिए भेज दिया कि 4 हजार रुपए की जांच का इंतजाम प्रशासन स्थानीय स्तर पर नहीं कर सका।

चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि हमने इस संबंध में कलेक्टर को पत्र लिख दिया। कलेक्टर ने कहा है कि जांच के लिए आवश्यक मशीन उपलब्ध करवाने के लिए सरकार को लिखा गया है। आपको बता दें कि टोसिलिजुमेब वह जीवनरक्षक इंजेक्शन है जो मरीज को गंभीर परिस्थितियों में उसकी जान बचाने के लिए दिया जाता है।

अब तक इसका प्रयोग सिर्फ चीन, स्विटरजरलैंड, आस्ट्रेलिया, मुंबई, दिल्ली, जयपुर सहित बड़े शहरों में मरीजों के लिए हो रहा था, लेकिन सीएम अशोक गहलोत ने पिछले दिनों यह इंजेक्शन जिला स्तर पर भी उपलब्ध करवाए थे ताकि मरीजों को जयपुर या कहीं आगे इलाज के लिए नहीं जाना पड़े। इस इंजेक्शन को लगाने से पहले मरीज के 6 अलग-अलग तरह के टेस्ट किए जाते हैं।

अधिकारियों व प्रशासनिक लापरवाही व उदासीनता का यह परिणाम रहा कि इन 6 टेस्टों की सुविधा अलवर में होते हुए नहीं ली गई और 40 हजार का जो एक इंजेक्शन था ऐसे 5 इंजेक्शन सरकार को वापस भिजवा दिए। यह 6 तरह की जांचे यदि प्राइवेट लैब पर कराएं तो करीब 10 से 12 हजार का खर्चा आता है, लेकिन सरकारी करार होता तो यह जांचे सिर्फ 4 से 5 हजार रुपए में हो जाती।

रिन्यू नहीं किया टेंडर, वरना इंजेक्शन लगाने से पहले की सभी जरूरी जांच उपलब्ध थींभास्कर पड़ताल में यह सामने आया है कि जो जांच उन जीवन रक्षक इंजेक्शन के लिए जरूरी थी वो अलवर में उपलब्ध हैं, लेकिन सरकारी खाते में इनकी उपलब्धता नहीं है। पूर्व में सामान्य चिकित्सालय के साथ हुए करार में क्योरवैल डायग्नोस्टिक सेंटर इन 6 जांचों सहित विशिष्ट तरह की 40 जांचें कर एसएमएस की दरों व उससे भी कम दरों पर उपलब्ध करवा रहा था, लेकिन विभाग द्वारा न तो नए टेंडर किए गए और न ही टेंडर रिन्यू किए गए।

ऐसे में इन जांचों पर संकट आ गया और सभी अधिकारी अपना पल्ला झाड़ते नजर आए। नतीजा जांचे नहीं हो पाई और हमें 2 लाख रुपए के 5 इंजेक्शन वापस भिजवाने पड़े।