शरीर में सूजन घटानी है तो एक्सरसाइज करें, मसल्स मजबूत होंगी और डैमेज होने का खतरा कम होगा
- अमेरिका की ड्यूक यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स अपनी रिसर्च में किया दावा
- कहा, मसल्स में कमजोरी के मामले घटाने हैं तो एक्सरसाइज करना जरूरी
वैज्ञानिकों ने एक्सरसाइज करने का एक और फायदा बताया है। ड्यूक यूनिवर्सिटी की रिसर्च कहती है, अगर शरीर में होने वाली सूजन से बचना है तो एक्सरसाइज करें। मसल्स को एक्टिव रखें। वैज्ञानिक नेनड बर्सेक के मुताबिक, मसल्स का ठीक से काम न करना और कमजोरी के मामले घटाने हैं तो एक्सरसाइज करना जरूरी है।
लैब में मसल्स को तैयार करके समझाया
प्रो. नेनड बर्सेक के मुताबिक, रिसर्च की शुरुआत में हमने लैब में आर्टिफिशियल मसल्स तैयार कीं। इसके बाद मसल्स पर बुरा असर छोड़ने और इंटरफेरान गामा के असर को देखा। रिजल्ट में सामने आया कि अगर मसल्स मजबूत और एक्टिव हैं तो ये इंटरफेरान गामा को ब्लॉक कर सकती हैं। इसलिए एक्सरसाइज करके मसल्स को एक्टिव और स्ट्रॉन्ग रखना जरूरी है।
मसल्स के लिए एक्सरसाइज जरूरी क्यों?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एक्सरसाइज करने से मसल्स मजबूत होती हैं और हडि्डयों के डैमेज या इंजरी होने का खतरा कम हो जाता है। मसल्स में ब्लड की सप्लाई बेहतर होती है और ऑक्सीजन का इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ती है। उम्र के साथ होने वाली मसल्स में कमजोरी का खतरा कम हो जाता है।
मजबूत मांसपेशियों और हड्डियों के लिए करें रीबाउंडिंग एरोबिक एक्सरसाइज
रीबाउंडिंग एरोबिक एक्सरसाइज का एक प्रकार है। इसे ट्रैम्पोलिन पर किया जाता है। इसमें कई प्रकार के प्रयोग भी किए जा सकते हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रीबाउंडिंग एंड हेल्थ के अल्बर्ट ई कार्टर ने दावा किया है कि 'रीबाउंडिंग' अब तक की सबसे पॉवरफुल एक्सरसाइज है। 2018 में प्रकाशित शोध के मुताबिक, हफ्ते में तीन दिन 15 से 20 मिनट का सेट करने पर इसके फायदे मिलने लगते हैं।
30 मिनट का रीबाउंडिंग वर्कआउट 200 कैलोरी बर्न करता है। जब भी ट्रैम्पोलिन खरीदें तो ध्यान रखें कि इसकी क्षमता 100 से 113 किलो वजन सहने की होनी चाहिए। इस वर्कआउट को करने के लिए ट्रैम्पोलिन पर बैलेंस बनाते हुए कूदते हैं। पहली बार कर रहे हैं तो किसी एक्सपर्ट से इसकी ट्रेनिंग ले लें।

मांसपेशियों और हडि्डयों को मजबूत बनाता है
हफ्ते में पांच दिन की रीबाउंडिंग एक्सरसाइज हडि्डयों और मांसपेशियों को मजबूत बनाती है। यह शरीर में लचीलापन लाने के साथ बॉडी को बैलेंस करना सिखाती है। इससे पेट, पैर और पीठ की मांसपेशियां टोन होती हैं।



