सरकार का फैसला: बहानेबाजों को अब नहीं लगेंगे टीके, रिकॉर्ड में होगी रिफ्यूज की एंट्री
देशव्यापी अभियान के तहत भरतपुर जिले में भी 16 जनवरी से सबसे बड़ा वैक्सीनेशन अभियान शुरु हो चुका है। इसके लिए पहले चरण के तहत 13050 हेल्थ वर्करों को चिन्हित करके उन्हें रजिस्टर्ड भी किया जा चुका है। अब तक 6 दिन में 1738 वर्करों को ही वैक्सीन लगाई जा सकी है। जबकि इस दौरान 3109 वर्करों को वैक्सीन लगनी थीं। यानि, अभी सिर्फ 55.90 प्रतिशत वर्करों को ही टीका लगा है। बाकी 44.10 फीसदी ने वैक्सीन लगवाने से इनकार कर दिया है।
इसकी बड़ी वजह वैक्सीन के साइड इफेक्ट संबंधी फैली कुछ भ्रांतियों से हेल्थ वर्करों में डर हैं। जबकि भरतपुर जिले में अभी तक वैक्सीन से साइड इफेक्ट का एक भी केस सामने नहीं आया है। हालांकि सीएमएचओ डॉ. कप्तान सिंह बार-बार एक ही तर्क दे रहे हैं, कि वैक्सीनेशन के लिए आशा वर्करों के नाम मांगे गए थे। लेकिन, उनका कार्य बहिष्कार चल रहा है। इसलिए वैक्सीनेशन का प्रतिशत कम है। उल्लेखनीय है कि अब तक निर्धारित दिन और समय पर नहीं उपस्थित नहीं होने के कारण 6 दिन में 83 डोज बेकार हो चुकी हैं। वह भी तब जब केंद्र सरकार ने नियमों में ऐसे हेल्थ वर्करों को भी टीका लगाने की छूट दे दी है, जिन्हें 2 या 3 दिन बाद टीका लगना है।


