पाकड़ पेड़ के औषधिय गुण ।।

Aug 15, 2020 - 04:12
Aug 15, 2020 - 04:12
पाकड़ पेड़ के औषधिय गुण ।।
पाकड़ पेड़ के औषधिय गुण ।।

#पाकड़
#Ficus_virens
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पाकड़ को संस्कृत में प्लक्ष (नीचे जाने वाला), पर्कटी (सम्पर्क वाली) पर्करी, जटी,पाखर,पाकर,#पिलखन आदि नामों से जाना जाता हैं... यह लगभग सदा हराभरा रहने वाला वृक्ष है जो जाड़े के अन्त में थोड़े समय के लिये पतझड़ में रहता है.... इसका छत्र काफी फैला हुआ और घना होता है, इसकी शाखायें जमीन के समानान्तर काफी नीचे तक फैल जाती हैं...जिससे घनी शीतल छाया का आनन्द बहुत करीब से मिलता है... इसकी विशेषता के कारण इसे प्लक्ष या पर्कटी कहा गया जो हिन्दी में बिगडक़र क्रमश: पिलखन व पाकड़ हो गया... यह बहुत तेज बढक़र जल्दी छाया प्रदान करता है..शाखाओं या तने पर जटा मूल चिपकी या लटकी रहती है...फल मई जून तक पकते हैं और वृक्ष पर काफी समय तक बने रहते हैं... गूलर की तुलना में इसके पत्ते अधिक गाढ़े रंग के होते हैं जो सहसा काले प्रतीत होते हैं जिसके कारण इस वृक्ष के नीचे अपेक्षाकृत अधिक अन्धेरा प्रतीत होता है...यह घनी और कम ऊँचाई पर छाया प्रदान करने के करण सडक़ों के किनारे विशेष रूप से लगाया जाता है.... इसकी शाखाओं को काटकर रोपित करने से वृक्ष तैयार हो जाता है....।
औषधीय दृष्टि से यह शीतल एवं व्रण, दाह, पित्त, कफ, रक्त विकार, शोथ एवं रक्तपित्त को दूर करने वाला है....इस पेड से जुड़ी कई पौराणिक मान्यताये भी हैं ।।
यज्ञ कर्म के लिए इस वृक्ष की छाया श्रेष्ठ मानी जाती है, वृक्षायुर्वेद के अनुसार घर के उत्तर में पाकड़ लगाना शुभ होता हैं..।

मालवांचल के बहुत कम मित्र पाकर को जानते होंगे,क्योंकि पाकर हमारे अंचल में बहुत कम दिखाई पड़ता हैं,उत्तर भारत मे इसके पेड़ बहुत है, जिस प्रकार हमारे यहां त्रिवेणी नीम, पीपल ओर बरगद के समूह को कहते है उसी प्रकार वहाँ पाकर,पीपल ओर बरगद के समूह को त्रिवेणी या हरिशंकरी कहते है, इसे लगाना बहुत पुण्यदायी माना गया हैं... इस हरिशंकरी में तमाम पशु- पक्षियों व जीव- जन्तुओं को आश्रय व खाने को फल ओर रहने को आश्रय मिलता है, अत: हरिशंकरी के रोपण, पोषण व रक्षा करने वाले को इन जीव जन्तुओं का आशीर्वाद मिलता है, इस पुण्यफल की बराबरी कोई भी दान नहीं कर सकता....।

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Narpat Singh Shekhawat आयुर्वेद से प्रेरित, प्रकृति से जुड़ा एक पथिक। शांति, प्रेम और मानवता के विस्तार हेतु आयुर्वेदिक ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाने की साधना-यात्रा।