कोरोना के बाद चुनौती पैदा हुई तो अवसर में बदल डाला, प्राइवेट कॉलेजों व यूनिवर्सिटी में बन गए स्मार्ट क्लास रूम

कोरोना के बाद चुनौती पैदा हुई तो अवसर में बदल डाला, प्राइवेट कॉलेजों व यूनिवर्सिटी में बन गए स्मार्ट क्लास रूम

कोरोना के बाद चुनौती पैदा हुई तो शिक्षण संस्थानों ने इसे अवसर में बदल डाला। जी हां प्राइवेट कॉलेजों व यूनिवर्सिटी ने स्मार्ट क्लास रूम के जरिए पढ़ाई शुरू करा दी है। आधुनिक तकनीक से लैस इन क्लासरूम में वो तमाम जरूरी उपकरण हैं जिनसे अध्यापन को बेहतर बनाया जा सके। अलवर में संचालित निजी क्षेत्र की तीन और सरकारी क्षेत्र की एक यूनिवर्सिटी ने भी नए कोर्स लॉंच करते हुए इसकी तैयारी शुरू कर दी है।

इन यूनिवर्सिटी में क्लासेज को ऑनलाइन करने की पूरी तैयारियां हैं और दो से लेकर तीन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग स्टूडियो भी तैयार किए गए हैं। हालाकि कोरोनाकाल शिक्षा जगत के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है, लेकिन इस चुनौती में संस्थानों के सामने बड़ा अवसर भी निकलकर सामने आया है।

हायर एजुकेशन के हब अलवर में हजारों विद्यार्थियों को घर से पढ़ने का मौका मिलापढ़ाई के लिए विदेशों की ओर से रुख करने वाले कदम अब ठहरने लगे हैं और स्थानीय को प्राथमिकता देते हुए पिछले दिनों में अलवर में संचालित लॉड्र्स यूनिवर्सिटी, सनराइज यूनिवर्सिटी और रेफल्स यूनिवर्सिटी में एडमिशन जारी हैं।

विदेश जाने वाले बच्चों के लिए देश में ही अच्छे संस्थान तलाश रहे हैं। अभिभावकों की यह तलाश देश से लेकर राज्य और राज्य से लेकर जिला स्तर पर जारी है और कई मामलों में अधिकांश बच्चे अपने आगामी दो या तीन साल का कॅरियर अलवर में ही बनाने की ठान चुके हैं। एनसीआर में स्थित अलवर में अब हायर एजुकेशन का स्वरूप तेजी से उभरकर सामने आया है। यही कारण रहा है कि सरकारी व निजी क्षेत्र में कॉलेजों के बाद अब यूनिवर्सिटी भी अलवर में बेहतर कोर्स मुहैया करा रही हैं।

वर्तमान में अलवर में 3 निजी यूनिवर्सिटी स्थापित हैं और यहां हजारों की संख्या में बच्चे अध्ययन कर रहे हैं। इन विश्वविद्यालयों में बीए, बीएससी, बीकॉम सहित बीएड, एलएलबी, एलएलएम, पांच वर्ष के डिपलोमा, फार्मेसी, बीसीए, एग्रीकल्चर जैसे कोर्स संचालित हैं। लॉकडाउन की अवधि से ही अब तक ये संस्थान देश के बेहतर व अनुभवी शिक्षकों द्वारा अध्ययन करवा रहे हैं। यह अध्ययन फिलहाल ऑनलाइन चल रहा है, लेकिन परिस्थितियां सामान्य होने के साथ ही क्लासरूम स्टडी शुरू हो जाएगी।

खास बात यह भी है कि परिस्थितियों को देखते हुए कुछ संस्थानों ने होनहार बच्चों को उनकी मेहनत के अनुसार फीस में भी रियायतें देने की घोषणा की हुई है। लॉड्‌र्स यूनिवर्सिटी में ऐसे बच्चों को फ्री एडमिशन दिया जा रहा है जिनकी 12वीं कक्षा में 80 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हैं। जाहिर है होनहारों के लिए यह बड़ी सौगात से कम नहीं है। क्योंकि कोरोना के बाद अब बड़े पैमाने पर आर्थिक स्थितियां प्रभावित हुई हैं। ऐसे में शिक्षण संस्थानों का यह कदम बड़ी राहत देगा।

यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ी है। रोजाना बड़ी संख्या में इंक्वायरी भी मिल रही हैं। अभिभावकों की पहली पसंद अब यही है कि उनका बच्चा अलवर में रहकर ही अपनी पढ़ाई करे और कॅरियर बनाए। कोरोना को लेकर कोई भी अभिभावक रिस्क लेना नहीं चाहते हैं। यूनिवर्सिटी ने भी पैटर्न में आधुनिकता का समावेश करते हुए बेहतर प्लेटफार्म के जरिए एजुकेशन देने का सिस्टम तैयार किया हुआ है और अध्ययन जारी भी है। बाहर से एक्सपर्ट को हायर करते हुए पढ़ाई का मेटेरियल बच्चों तक पहुंचाया जा रहा है। स्मार्ट क्लासरूम के जरिए बच्चे सीधा जुड़कर अध्ययन कर रहे हैं। जो कोर्स बाहर महंगी फीस में होते थे वो अब अलवर में ही किए जा सकते हैं। होनहार बच्चों को फ्री एडमिशन व एजुकेशन सहित कई नवाचार भी किए जा रहे हैं।