शादी का वादा झांसा नहीं, लिव-इन कपल बातों का रखें ध्यान

शादी का वादा झांसा नहीं, लिव-इन कपल  बातों का रखें ध्यान

सवाल: क्या होता है लिव इन रिलेशनशिप?
जवाब:
 जब कोई कपल शादी किए बिना एक ही घर में पति पत्नी की तरह रहता है तो इस रिश्ते को लिव-इन रिलेशनशिप कहते हैं। लेकिन वो दोनों एक-दूसरे के साथ शादी के बंधन में नहीं बंधे होते हैं।

सवाल: क्या लिव इन रिलेशनशिप को कानून की नजर में मान्यता प्राप्त है?
जवाब:
 हां मान्यता प्राप्त है। लाइव लॉ के मुताबिक, सन् 1978 में बद्री प्रसाद बनाम डायरेक्टर ऑफ कंसोलिडेशन केस में सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार लिव-इन रिलेशनशिप को वैध माना था।

कोई भी एडल्ट कपल एक साथ रहने या शादी करने के लिए स्वतंत्र है। कोर्ट के इस फैसले के बाद भारत में लिव-इन-रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता मिल गई थी।

लिव-इन रिलेशनशिप की जड़ कानूनी तौर पर संविधान के अनुच्छेद 21 में ही है। अपनी मर्जी से शादी करने या किसी के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने की को अनुच्छेद 21 से अलग नहीं माना जा सकता।

ऐसे रिलेशन को लिव इन नहीं माना जाएगा जिसमें वो कभी साथ रहें और कभी अलग या कुछ दिन साथ रहने के बाद अलग हो जाएं।

लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले कपल के अधिकार

देश की संसद ने लिव-इन रिलेशनशिप पर कोई कानून नहीं बनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसलों के जरिए लिव-इन वाले रिश्तों को कानूनी दर्जा दिया है।

पैदा होने वाले बच्चे को सुरक्षा का अधिकार: लिव-इन-रिलेशन से पैदा होने वाले बच्चे को भारतीय न्यायपालिका की तरफ से सुरक्षा का अधिकार है।

महिला पार्टनर को भरण पोषण का अधिकार: CrPC की धारा-125 के तहत शादीशुदा महिलाओं को भरण-पोषण का अधिकार है। इसी धारा में लिव-इन वाली महिलाओं को भी भरण-पोषण का अधिकार है।

पैदा हुए बच्चे को पैतृक संपत्ति में अधिकार: बालसुब्रमण्यम Vs सुरत्तयन मामले में लिव इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चे को पहली बार वैधता मिली थी। उस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि कोई महिला या पुरुष काफी सालों तक साथ रहते हैं, तो एविडेंस एक्ट की धारा-114 के तहत इसे शादी माना जाएगा। इसलिए लिव-इन में पैदा हुए बच्चे को भी वैधता मिलेगी और पैतृक संपत्ति में अधिकार भी मिलेगा।

सवाल: लिव-इन रिलेशन में रहने के लिए क्या कोई कंडीशन भी होती हैं?
जवाब: 
हां बिल्कुल होती है। 

सवाल: दोनों में से कोई भी एक पार्टनर पहले से शादीशुदा है और वो बिना तलाक लिए लिव-इन में रहता है, तो उस कंडीशन में क्या होगा?
जवाब:
 बिना तलाक लिए लिव-इन रिलेशनशिप में रहने पर IPC यानी भारतीय दंड संहिता की धारा-494 के तहत अपराध माना जाएगा।

सवाल: IPC की धारा-494 है क्या?
जवाब:
 पति या पत्नी के जिंदा रहते हुए या बिना तलाक लिए दोबारा शादी करने पर IPC की धारा-494 के तहत अपराध माना जाता है।

इसमें अपराधी को 7 साल तक की जेल या जुर्माना या फिर दोनों की सजा मिल सकती है।

सवाल: लिव-इन में रहने वाला मेल पार्टनर अगर महिला पार्टनर के साथ मारपीट करे, तो क्या होगा?
जवाब:
 महिला पार्टनर ऐसी सिचुएशन में घरेलू हिंसा एक्ट की धारा-12 के तहत उस पर केस दर्ज करा सकती है। इसकी शिकायत डायरेक्ट मजिस्ट्रेट को की जा सकती है। इसके अलावा घरेलू हिंसा एक्ट की धारा-18 के तहत महिला पार्टनर प्रोटेक्शन ऑर्डर की भी डिमांड रख सकती है।

मजिस्ट्रेट पूरे मामले को सुनकर, जो भी फैसला सुनाते हैं। अगर उस फैसले को पुरुष नहीं मानता है, तो उसे 1 साल की जेल या 20 हजार का जुर्माना या दोनों सजा धारा-31 के अंतर्गत हो सकती है।

सवाल: लिव-इन में रहते हुए रिश्ते खराब हो जाएं, या पार्टनर शादी करने से मना कर दे, तो क्या रेप केस दर्ज किया जा सकता है?
जवाब:
 रेप केस नहीं दर्ज किया जा सकता है। लंबे समय से दो लोग एक साथ रहते हैं। इस दौरान अगर उनका रिश्ता खराब हो जाता है तो इस कंडीशन में रेप का आरोप लगाना गलत है। यहां महिला अपनी मर्जी से सालभर से अपने पार्टनर के साथ रह रही थी। ऐसे में पुरुष शख्स के खिलाफ रेप केस नहीं बनता है।

सवाल: लिव इन में रहते हुए अगर पुरुष ने महिला पार्टनर को छोड़ दिया, तो महिला के पास क्या अधिकार है?
जवाब:
 लिव इन में रह रही महिला को पत्नी की ही तरह अपने साथी पुरुष से भरण पोषण की मांग करने का अधिकार है।

कोर्ट के मुताबिक महिला को ये कहकर भरण पोषण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है कि वो कानूनी तौर पर पति-पत्नी नहीं हैं।

CrPC की धारा 125 के तहत लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली वो महिलाएं जिन्हें उनके पार्टनर ने छोड़ दिया है, उन्हें भरण पोषण अधिकार है। वो अपने पुरुष पार्टनर से कोर्ट के जरिए भरण पोषण के लिए आर्थिक सहायता की मांग कर सकती हैं।

लिव इन रिलेशन में रहना लड़का और लड़की दोनों के लिए जिंदगी का बहुत ही बड़ा फैसला होता है। जिसमें सिर्फ उन दोनों का ही निर्णय होता है। इसलिए सोच-समझकर ही ये फैसला लेना चाहिए। कपल को कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए।