20 हजार रुपए में पिस्टल और 5000 रुपए में मिल रहा देसी कट्टा, जब चाहे जहां खरीद लो

20 हजार रुपए में पिस्टल और 5000 रुपए में मिल रहा देसी कट्टा, जब चाहे जहां खरीद लो

ऑनलाइन ठगी और टटलूबाजी के लिए बदनाम भरतपुर-अलवर के मेवात इलाके में अब अवैध हथियार भी खुले आम बिक रहे हैं। ग्राहकों को फंसाने के लिए तस्कर और कुछ युवा सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ अपनी तस्वीरें तक वायरल कर रहे हैं। इनमें 15-15 साल तक के किशोर भी हैं। यही वजह है कि पिछले 3 साल में अवैध हथियारों से फायरिंग के मामले बढ़े हैं।

पुलिस ने काफी अवैध हथियार पकड़े भी हैं। लेकिन, यह कारोबार रुक नहीं रहा है। मेवात के इंटीरियर गांवों और जंगलों में फैक्ट्रियां तक बन गई है। जहां से उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों और दूसरे जिलों में हथियार बनाकर बेचे जा रहे हैं।

पड़ोसी मथुरा जिले से भी हथियारों की बड़ी खेप लाकर तस्करी की जा रही है। जबकि स्थानीय पुलिस, एसओजी, जिला स्पेशल टीम के अलावा अन्य एजेंसियां लगातार हथियार तस्करों पर निगरानी रखने का दावा करती हैं।

अवैध हथियारों के इस कारोबार की जड़ तक पहुंचने के लिए भास्कर संवाददाता ने करीब 20 दिन तक मेवात के खोह, कैथवाड़ा और गोपालगढ़ क्षेत्र में कई लोगों से संपर्क किया। फिर कैथवाड़ा इलाके में रहने वाले एक तस्कर के पास संवाददाता ग्राहक बनकर पंहुचा। अलग-अलग स्थानों पर हुई दो-तीन मुलाकातों में वह हथियार उपलब्ध कराने के लिए राजी हो गया।

फिर उसने 5000 रुपए लेकर देसी कट्टा मुहैया कराया। यह कट्टा जिला पुलिस अधीक्षक को सौंपा जाएगा। भरतपुर सिटी में 28 मई को डॉक्टर सुदीप गुप्ता दंपत्ति की हत्या, 7 नवंबर को सुभाष नगर में पिता-पुत्र की हत्या, उससे पहले गोपालगढ़ मोहल्ले में युवक की हत्या, नदिया मोहल्ले में युवक को पैर में गोली मारने, आदर्श नगर कॉलोनी में हमला और रंजीत नगर में अवैध हथियार दिखाकर महिलाओं से सोने की चैन लूटने जैसी कई वारदातें हो चुकी हैं।

पहले रणधीरगढ़ और गढ़ी बाजना ही थे, अब डीग, कामां, पहाड़ी बन रहा गढ़
भरतपुर जिले में अवैध हथियार बनाने और बड़ी सप्लाई करने का खेल लंबे समय से चल रहा है। पहले तो भुसावर का रणधीरगढ़ और बयाना का गढ़ी बाजना ही इस काम के लिए मशहूर थे। अब मेवात भी इसका गढ़ बन रहा है। एसओजी और स्थानीय पुलिस टीम कई बार कार्रवाई कर बड़ी खेप पकड़ भी चुकी हैं। जैसे- कुछ दिन पहले कामां के गांव दौलावास और मूंगस्का पहाड़ों की तलहटी में पुलिस ने एक फैक्ट्री पकड़ कर कई हथियार एवं कारतूर बरामद किए थे।

दो साल पहले डीग की खोह पुलिस ने ड्रोन की मदद से रूंध पहाड़ों पर चल रही फैक्ट्री और पहाड़ी के गोपालगढ़ में पुलिस ने दबिश देकर अवैध हथियार बनाने के कारखाने पकड़े थे। खैरवा और ईखनका गांवों के खेतों में नौगांवा के एक मकान में जुरहरा पुलिस हथियार बनाने की फैक्ट्रियां पकड़ चुकी है।

तस्कर बोला- आप तो बोलो- जो चाहिए वह मिल जाएगा?

रिपोर्टर- एक हथियार खरीदना है, दिलवा सकते हो।
तस्कर- बिलकुल मिल जाएगा, आपको क्या चाहिए?

रिपोर्टर- पिस्टल और देसी कट्टा कितने तक में मिलेगा?
तस्कर- पिस्टल 20 हजार और कट्टा 6 हजार रुपए में मिलेगा।

रिपोर्टर- यार, बहुत ज्यादा पैसे मांग रहे हो?
तस्कर- देख लो, इतने ही लगेंगे। लेना हो तो बात करो।

रिपोर्टर - लेना तो है। लेकिन, दाम तो कुछ कम करो?
तस्कर - लेकिन, आपको लेना कौन सा हथियार है।

रिपोर्टर- पिस्टल तो बहुत मंहगी है, देसी कट्टा ही दिलवा दो?
तस्कर - ठीक है। आप 5 हजार दे दो। इससे कम नहीं होगा।

रिपोर्टर- ये हथियार आप खुद तैयार करते हो या मंगवाते हो?
तस्कर - आपको इससे क्या मतलब। जो चाहिए वो मिलेगा।

रिपोर्टर- मुझे इसके लिए कहां आना होगा और आपसे संपर्क कैसे होगा?
तस्कर- आपको हमारी बताई जगह और टाइम पर आना होगा, हथियार मिल जाएगा।

रिपोर्टर- अगर आपका बेचा हथियार गड़बड़ निकला तो क्या होगा?
तस्कर- यदि गड़बड़ हो तो आप हमें हथियार लौटा देना, पैसे वापस मिल जाएंगे।

मथुरा के हाथिया में ट्रेनिंग और दिल्ली के मंगोलपुरी से लाते हैं हथियार
हथियार तस्करों के मुताबिक हथियार बनाने और तस्करी में लगे लोग यूं तो अंगूठा छाप हैं। लेकिन अवैध हथियार बनाने की हर तकनीक जानते हैं। स्टिंग ऑपरेशन के दौरान बातचीत में पता चला कि ये लोग मथुरा जिले के हाथिया गांव में हथियार बनाने की ट्रेनिंग लेते हैं।

हथियार बनाने का सामान दिल्ली के मंगोलपुरी से खरीदते हैं। लकडी और लोहे का अन्य सामान अपने इलाके से ही लेते हैं। उन्नत किस्म के पचफेरा और देशी कट्टे बनाने में बहुत निपुण हैं। कुछ महंगे हथियारों में साइलैंसर भी लगाते हैं।

सीधी बात : देवेंद्र विश्नोई, एसपी

सवाल: जिले में अवैध हथियारों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, क्या वजह है?
जवाब: ये फिल्मों का इफेक्ट है। युवा शौकिया हथियार रखने लगे हैं।

सवाल: भरतपुर जिले में इतने अवैध हथियार आखिर आ कहां से आ रहे हैं?
जवाब: ज्यादातर हथियार यूपी में मथुरा, मप्र में भिंड, मुरैना से लाए जाते हैं।

सवालः मेवात इलाके में भी तो अवैध हथियार बन रहे हैं, उन पर कार्रवाई क्यों नहीं करते?
जवाबः हां, मेवात में भी अवैध हथियार बनाने की फैक्ट्रियां हैं। पुलिस ने पिछले दिनो कई पकड़ी भी हैं।

सवाल: जब सब पुलिस की नॉलेज में है तो फिर अवैध हथियारों पर अंकुश क्यों नहीं लगा रहे?
जवाब: इस वर्ष 200 से ज्यादा अवैध हथियार जब्त किए हैं। इतने ही मुल्जिमों को पकड़ा भी है।