पहली बार एक ही तस्वीर में देखिए... 18वीं सदी में बने ​​​​​​​डीग के प्रसिद्ध जल महल, किला और दोनों तालाब

पहली बार एक ही तस्वीर में देखिए... 18वीं सदी में बने ​​​​​​​डीग के प्रसिद्ध जल महल, किला और दोनों तालाब

भरतपुर | विश्व पर्यटन दिवस पर आज पहली बार देखिए एक ही तस्वीर में विश्व प्रसिद्ध डीग के जल महल, किला और दोनों तालाब। करीब 17-18वीं सदी में बने ये महल विशुद्ध जाट स्थापत्य शैली में बने हैं। इन महलों का निर्माण महाराजा बदनसिंह ने मुगलकाल में हिंदु शैली को बनाए रखने के लिए कराया था। तब वे कुम्हेर की गढ़ी में रहते थे। सन् 1725 में उन्होंने डीग को प्रथम जाट राजधानी बनाया।

इन महलों में राजा बदनसिंह के भाई रूपसिंह के नाम पर रूप सागर बना। बाद में महाराजा सूरजमल के कार्यकाल में गोपाल सागर, गोपाल भवन, किशन भवन और सूरज भवन का निर्माण हुआ। हरदेव भवन का परिवर्द्धन और बडे तलाब का निर्माण कराया। महाराजा जवाहरसिंह ने सूरज भवन को पूरा कराया और बगीचे और फव्वारे लगवाए।

गर्मियों में भी मानसून का अहसास दिलाने के लिए बने सावन-भादों भवन
डीग के महलों में चतुष्कोण बनाते हुए बीच में 475-350 फीट का एक बगीचा है। इसमें फव्वारे लगे हैं। उत्तर की ओर नन्द भवन और पश्चिम में मुख्य इमारत गोपाल भवन हैं। यह तीन ओर से दुमंजिला है और बीच में विशाल सभा भवन है। गोपाल भवन से थोडी दूर दो छोटी इमारतें हैं जो सावन-भादों भवन के नाम से जानी जाती हैं। इन्हें गर्मियों में भी चौमासे का अहसास करने के उद्देश्य से बनाया था।

यहां जब कृत्रिम फव्वारे चलते थे तो पानी का टकराव बादलों की गड़गड़ाहट का अहसास कराता था। इसी परिसर में दक्षिण की ओर उत्तर की तरफ मुंह किए दो महल हैं; पश्चिम में मकराना के संगमरमर से बना सूरज भवन और पूर्व में भूरे बलुआ पत्थर से बना किशन भवन। इन दोनों महलों के बीच इस मजबूत इमारत की छत पर एक बेजोड़ टंकी है जो इन सभी महलों और बगीचों में जल प्रवाह करती है।