जोशी-मोदी से पहले यहां नेहरू ने फहराया था तिरंगा: कहानी श्रीनगर के लाल चौक की; यहां तिरंगा क्यों नहीं फहराएंगे राहुल गांधी?

भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी का भाषण चल रहा था, 'ये जो तिरंगा है न, ये श्रीनगर में जाके हम इसको लहराएंगे। कोई नहीं रोक पाएगा। कोई तूफान, कोई आंधी, कुछ नहीं रोक पाएगा। ये झंडा, ये तिरंगा वहां पे जाकर लहराएगा...'

राहुल गांधी ने लाल चौक का नाम नहीं लिया था, लेकिन जनवरी 2023 की शुरुआत में पंजाब कांग्रेस के नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने दावा किया कि 30 जनवरी को राहुल गांधी लाल चौक पर तिरंगा फहराएंगे।

इसके बाद जम्मू-कश्मीर की कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने कहा कि हम लाल चौक पर तिरंगा फहराने के RSS के एजेंडे में यकीन नहीं करते। इसलिए झंडा श्रीनगर के पार्टी दफ्तर में फहराया जाएगा। राहुल गांधी की लाल चौक से दूरी बनाने पर BJP भी सवाल खड़े कर रही है।

भास्कर एक्सप्लेनर में जानेंगे श्रीनगर के लौल चौक की कहानी। क्या यहां झंडा फहराना सिर्फ RSS का एजेंडा है? ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के समापन पर राहुल गांधी पार्टी दफ्तर पर तिरंगा फहराएंगे, लेकिन उससे महज 1 किमी दूर लाल चौक पर क्यों नहीं…

मॉस्को के रेड स्क्वायर के नाम पर लाल चौक नाम पड़ा

लाल चौक का नाम नेशनल कॉन्फ्रेंस के लड़ाकों ने मॉस्को के रेड स्क्वायर के नाम पर रखा था, क्योंकि वे भी पाकिस्तानी आक्रमण से लड़ रहे थे। कहा जाता है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस पर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के मेंबर बीपीएल बेदी और उनकी पत्नी फ्रीडा का काफी प्रभाव था।

बीपीएल बेदी ने ही नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए पहला घोषणा पत्र 'नया कश्मीर' लिखा था। यह सोवियत यूनियन से प्रभावित था। बीपीएल बेदी अभिनेता और डायरेक्टर कबीर बेदी के पिता थे।

'द राइज एंड फॉल ऑफ न्यू कश्मीर' के लेखक एंड्रयू व्हाइटहेड अपनी किताब में 8 नवंबर 1947 को छपी टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के हवाले से लिखते हैं कि 'नेशनल कॉन्फ्रेंस का लाल झंडा शहर की हर पब्लिक बिल्डिंग में लगा हुआ है।

शहर के मध्य मुख्य चौक में जिसका नाम बदलकर रेड स्क्वायर यानी लाल चौक कर दिया गया है, एक विशाल लाल झंडा फहरा रहा है। इसके नीचे मजदूर और आम लोग बैठकर पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध की ताजा खबर सुन रहे हैं और सियासी गपशप में मशगूल हैं।

1980 में बजाज इलेक्ट्रिकल्स ने चौक पर एक क्लॉक टॉवर का निर्माण कराया। इसके बाद यह चौक राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है। देखा जाए तो लाल चौक पर तिरंगा फहराना देशभक्ति के साहसिक कार्य के रूप में देखा जाता रहा है। हालांकि, 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से यहां पर अब तिरंगा लगातार फहरा रहा है।