करवा चौथ का शुभ मुहूर्त:करवा चौथ का त्योहार चार नवंबर काे

करवा चौथ का शुभ मुहूर्त:करवा चौथ का त्योहार चार नवंबर काे
चतुर्थी तिथि 4 नवंबर को अपराह्न 3:24 पर आरंभ होकर 5 नवंबर को 5:14 समाप्त होगी

शुभ मुहूर्त शाम 5:29 से 6:48 बजे तक, चंद्राेदय रात 8:24 बजे के बाद

काेराेनाकाल में इस बार करवा चौथ 4 नवंबर कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सर्वार्थ सिद्धि व शिव योग में मनाया जाएगा। यह शुभ संयोग सुहागिनों के लिए शुभ फलदायी होगा। ये पर्व कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी के दिन करना चाहिए।

जानकारों का कहना है कि जब उदियात के समय तृतीया तिथि और चंद्रोदय के समय चतुर्थी तिथि हो, तब यह व्रत किया जाता है। करवा चौथ पूजा मुहूर्त शाम 5:29 से 6:48 बजे तक है। चतुर्थी तिथि 4 नवंबर को अपराह्न 3:24 पर आरंभ होकर 5 नवंबर को 5:14 समाप्त होगी। चतुर्थी गणेशजी की तिथि है और इस दिन बुधवार होने के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग, शिव योग भी रहेगा। ऐसा संयोग बहुत कम आता है। यह संयोग महिलाओं की मनोकामनाएं पूरी करने में शुभ रहेगा।

मनवांछित वर पाने के लिए कुंवारी युवतियां भी व्रत रखेंगी

पंडितों ने बताया कि मनवांछित वर पाने के लिए कुंवारी युवतियां भी इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं। विधि-विधान से माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करती हैं। करवा चौथ की कथा सुनती हैं। फिर रात को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खाेलती हैं। पहली बार करवा चौथ व्रत करने वाली नव विवाहिताओं में विशेष उत्साह है। वे घर की बुजुर्ग महिलाओं मां, सास, ननंद आदि से घर की परंपरानुसार इस व्रत को करने का विधि विधान समझ रही हैं। मान्यता है कि इस दिन महिलाओं को सोलह शृंगार करके ही पूजा में शामिल होना चाहिए।

इस दिन विवाहित महिलाओं के लिए 16 शृंगार का विशेष महत्व माना गया है। करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखकर शाम के समय प्रदोष काल (गोधुली बेला) में एवं निशीथ काल (मध्य रात्रि) के मध्य भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश, कुमार कार्तिकेय आदि देवताओं की षोडशोपचार विधि से पूजन करने के साथ-साथ सुहाग के वस्तुओं की भी पूजा की जाती है। रात को चांद देखकर उसे अर्घ्य देकर महिलाएं पति के हाथ से जल ग्रहण करने के बाद ही व्रत पूर्ण करना चाहिए।