हेलिकॉप्टर से लटककर बचाईं थीं 35 जिंदगी, अब शौर्य चक्र:खिड़की से कूदे आतंकी ने ग्रेनेड फेंका; लहूलुहान हुए, लेकिन ढेर किया

हेलिकॉप्टर से लटककर बचाईं थीं 35 जिंदगी, अब शौर्य चक्र:खिड़की से कूदे आतंकी ने ग्रेनेड फेंका; लहूलुहान हुए, लेकिन ढेर किया

अलवर जिले के 2 बहादुर सैनिकों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शौर्य चक्र से सम्मानित करेंगी। यह सम्मान देने की घोषणा 26 जनवरी को की गई है। सम्मानित होने वाले सैनिकों में फ्लाइट लेफ्टिनेंट तेजपाल (30) और सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) में असिस्टेंट कमांडेंट सत्येंद्र यादव शामिल हैं।

शौर्य 1: फ्लाइट लेफ्टिनेंट तेजपाल ने 35 लोगों को बचाया था

शौर्य चक्र के लिए नामित होने वाले तेजपाल यादव अलवर जिले के बहरोड़ के गांव रैवाणा के रहने वाले हैं। फ्लाइट लेफ्टिनेंट तेजपाल यादव ने झारखंड के देवघर में रोप-वे हादसे में 35 लोगों की जान बताई थी। अपनी जान दांव पर लगाकर तेजपाल ने 300 से 1500 फीट की ऊंचाई पर बचाव राहत कार्य को अंजाम दिया।

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गरुड़ टीम से सीधा संवाद किया था और बचाव-राहत कार्य की तारीफ की थी। तेजपाल गरुड़ टीम का हिस्सा थे।

विंच डाउन करने वाले पहले व्यक्ति थे तेजपाल

लेफ्टिनेंट तेजपाल के छोटे भाई अमित यादव ने बताया कि 11 अप्रैल 2022 को झारखंड के त्रिकूट हिल्स पर रोप-वे की ट्रॉलियां अचानक हवा में झूलने लगी। बचाव राहत के लिए गरुड़ टीम मौके पर पहुंची। फ्लाइट लेफ्टिनेंट तेजपाल यादव इस टीम में थे। वे टीम को लीड कर रहे थे।

1500 फीट की ऊंचाई पर ट्रॉली में फंसे 35 लोगों को बचाना चुनौती वाला काम था। हवा में अधरझूल लोगों को सुरक्षित जमीन पर लाना बड़ा टास्क था। हेलिकॉप्टर से ट्रॉली तक पहुंचना खतरनाक काम था। विंच डाउन (हेलिकॉप्टर से रस्सी के सहारे ट्रॉली तक पहुंचना) के लिए तेजपाल सबसे पहले आगे आए।

हेलिकॉप्टर से रस्सी के सहारे वे हवा में झूलती हुई केबल कार (रोप-वे ट्राली) की छत तक पहुंचे। इसके बाद ट्रॉली के गेट तक पहुंचे। ट्रॉली का दरवाजा सिर्फ बाहर से ही खोला जा सकता था। उन्होंने दरवाजा खोला और एक यात्री को साथ लेकर सुरक्षित जमीन पर पहुंचाया। इस तरह उनकी यूनिट ने 35 लोगों की जान बचाई।

यह सब रिस्की इसलिए था, क्योंकि रोप-वे की केबल और हेलिकॉप्टर से विंच करने वाली रस्सी हवा से आपस में उलझ सकती थी। दोनों केबलों के बीच सिर्फ 6 फीट की दूरी थी। ऐसे में 35 लोगों की जान जाने के साथ हेलिकॉप्टर के क्रैश होने का भी खतरा था। इस मिशन को सफलता पूर्वक अंजाम दिया गया। लेफ्टिनेंट तेजपाल को इसी शौर्य के लिए सम्मानित किया जाएगा।

शौर्य 2 : गोली लगने के बावजूद डटे रहे, आतंकियों को ढेर किया

शौर्य चक्र के लिए नामित होने वाले एक और जवान CRPF में असिस्टेंट कमांडेंट सत्येंद्र यादव भी अलवर जिले के मुंडावर उपखंड़ के गांव भिखावास के रहने वाले हैं। उनकी कहानी भी रोंगटे खड़े कर देने वाली है। सत्येंद्र ने अपनी बहादुरी से लश्कर के खूंखार आतंकी कमांडर को जिंदा पकड़ा था।

इस कमांडर की निशानदेही पर हथियार बरामद करने वे एक मकान में गए। जहां पहले से छिपे आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। सत्येंद्र के हाथ व कंधे पर दो गोलियां लगी। इसके बावजूद लहूलुहान हालत में वे गोलीबारी करते रहे और आखिर आतंकियों को ढेर कर दिया। सत्येंद्र गृह मंत्री अमित शाह की सुरक्षा में भी रह चुके हैं।

बड़े भाई ने बताई सत्येन्द्र के शौर्य की पूरी कहानी

सत्येंद्र के बड़े भाई महेंद्र यादव आयकर विभाग में जोनल अकांउट ऑफिसर हैं। वे सूरत (गुजरात) में जॉब करते हैं। उन्होंने बताया - बात 28 जून 2021 की है। तब सत्येंद्र की ड्यूटी जम्मू कश्मीर में थी। आतंकवादी हमले की खुफिया सूचना के आधार पर श्रीनगर-बारामूला राष्ट्रीय राजमार्ग पर गश्त करते समय शाल्टैंग और नरबल के बीच CRPF वैली QAT के 4 HTS ने खुद को रणनीतिक बिंदुओं पर तैनात किया। ताकि आतंकवादियों के नापाक मंसूबों को ध्वस्त किया जा सके। सत्येंद्र व उनके जवानों ने गाड़ी में घूम रहे लश्कर के कमांडर को पकड़ा था।

कमांडर से जानकारी मिली कि उसके पास बड़ी मात्रा में हथियार व बारूद है। उसने बताया कि गांव मलूरा के एक घर में उसने हथियार व बारूद रखा है। फोर्स मलूगा गांव पहुंची। वहां जिस मकान को टारगेट करना था उसमें पहले से 2 आतंकी थे। जवान घर में घुसे और आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी।

जवानों ने भी जवाबी फायरिंग की। भयंकर गोलीबारी हुई। एक आतंकी ने खिड़की से छलांग लगा दी और यूबीजीएल (गोला) छत पर फेंक दिया। इस हमले में सत्येंद्र की टीम के एसयूजीडी शिवम चौहान और सीएजीडी मोहम्मद वसीम को छर्रे लग गए। सत्येंद्र ने हार नहीं मानी। उसने आतंकवादी का पीछा किया। सत्येंद्र को भी बायें हाथ और कंधे में गोली लगी थी। इसके बावजूद उसने टीम के साथ आतंकियों के डायरेक्शन में फायरिंग जारी रखी और आखिर दोनों आतंकी ढेर हो गए।

क्लोज क्वार्टर की लड़ाई के दौरान AC सत्येंद्र सिंह घायल होने के बावजूद आतंकवादी को घेरे रखा। तलाशी के दौरान 2 AK-47 राइफल, 13 AK राउंड और 1 यूबीजीएल के साथ दो आतंकवादियों के शव बरामद किए गए।

परिवार को सुरक्षित बचाया

बड़ी बात ये है कि दो आतंकवादियों के अलावा मलूरा गांव के इस मकान में एक परिवार भी था, जिसे सेना ने सुरक्षित बचा लिया। परिवार में एक पुरुष, दो महिलाएं और एक बच्चा था। एक आतंकी घर से बाहर निकल आया था। इसके तुरंत बाद दूसरे आतंकवादी ने फायरबेस पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी थी।

मुठभेड़ में दोनों आतंकी मारे गए। उनकी पहचना अबरार नदीम भट। जिसे आतंकी संगठन की ओर से A+ श्रेणी की सुरक्षा मिली थी। दूसरा, बाबर नदीम उर्फ हाफिज उर्फ उकाशा उर्फ मुस्लिम था जिसे A++ श्रेणी सुरक्षा मिली थी। ये दोनों लश्कर-ए-तैयबा के खूंखार आतंकी थे।

राठ इलाके (पश्चिमी अलवर) के जवानों ने हमेशा दिखाया शौर्य

जिला सैनिक कल्याण अधिकारी शिवराम वर्मा ने बताया कि 1947 से लेकर 2022 तक अलवर जिले के बहरोड़, नीमराना, मुंडावर एवं बानसूर क्षेत्र से भारतीय सेना, वायु सेना, नौसेना और पैरामिलिट्री फोर्स (BSF, CRPF, ITBP, CISF, SSB) के कुल 154 जवान शहीद हुए।

जिनमें नीमराना में 52, बहरोड़ में 49, मुंडावर में 33 और बानसूर में 20 शहीद शामिल हैं। 31 जवान एवं अधिकारी सेना मेडल से सम्मानित हैं। इसके अलावा शहीदों के नाम से 44 स्कूल चल रहे हैं। वहीं 20 शहीदों के नाम राज्य सरकार को भेजे गए हैं। जिनके नाम से स्कूल, वेटरनरी हॉस्पिटलों का नामकरण होगा।