323 साल बाद फिर सत्ता के केंद्र में डीग संघर्ष की जीत डीग जिला बनने से 6 तहसील और 696 गांवों के 1.72 लाख घरों में जश्न

323 साल बाद फिर सत्ता के केंद्र में डीग संघर्ष की जीत डीग जिला बनने से 6 तहसील और 696 गांवों के 1.72 लाख घरों में जश्न

विधानसभा में बजट बहस पर जवाब देते हुए सीएम अशोक गहलोत ने डीग सहित 19 नए जिले बनाने की घोषणा की है। इससे क्षेत्र के करीब 696 गांवों के 1.72 लाख घराें में खुशी की लहर है। क्योंकि विकास के नए आयाम गठित हाेंगे। डीग में 6 तहसील डीग, कुम्हेर, नगर, सीकरी, कामां, पहाड़ी काे शामिल किया जाएगा। क्षेत्रफल 2172 वर्ग किमी, आबादी 10.72 लाख रहेगी। डीग काे जिला बनाने की मांग करीब 27 साल पुरानी है। वर्ष 1996 में डीग को जिला बनाने का प्रस्ताव पंचायत समिति द्वारा सरकार काे भेजा था। किंतु असल प्रयास कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्रसिंह के रहे।

मंत्री सिंह ने बताया कि विकास की जरुरतों काे देखते हुए सरकार ने डीग काे जिला बनाया है। इससे विकास काे गति मिलेगी। डीग के अलावा कामां, बयाना और नगर के लाेग भी डीग की मांग कर रहे थे। डीग काे जिला बनाने का प्रमुख कारण राजनीतिक ताकत है। डीग के पक्ष में मंत्री विश्वेंद्रसिंह के अलावा मंत्री जाहिदा खान और नगर विधायक वाजिब अली भी थी। जबकि बयाना के विधायक अमरसिंह काे पायलट खेमे में माना जाता है। इसलिए उनकी मांग काे बल नहीं मिला। इसके अलावा प्रशासनिक कारण दूरी भी थी। मसलन, भरतपुर से मेवात क्षेत्र का अंतिम गांव जीराहेड़ा करीब 80 किलोमीटर दूर है।

जिला बनने से किसकाे-क्या मिला फायदा
फासले मिटेंगे... जिला मुख्यालय से गांवों और कस्बों की दूरियां घटेंगी। मसलन, अभी मुख्यालय से जुरहरा की दूरी 76 किमी है। डीग से जुरहरा 39 किमी रहेगी।
कानून-न्याय... एसपी ऑफिस सहित थानाें और चाैकियाें का जाल बिछेगा। इससे क्षेत्र में गोकशी, साइबर क्राइम आदि पर राेक लगेगी। नई अदालतें खुलेंगी। इससे न्याय व्यवस्था आसान हो जाएगी।
राेजगार... रोजगार के नए अवसर बनेंगे। ऐतिहासिक जलमहल, नाैनेरा और खेडा ब्राह्मण में वन्य जीवन, कामां के मंदिर, आदिबद्री धाम से पर्यटन बढ़ेगा।

पूर्व विधायक अरुण सिंह कहते थे... डीग जिला बनने तक शादी नहीं करुंगा
डीग काे जिला बनाने की सबसे पहले मांग पूर्व विधायक अरुण सिंह ने उठाई थी। डीग से 1991, 1993, 1998 और 2003 में विधायक रहे अरुण सिंह सार्वजनिक सभाओं में कहते थे कि जब तक डीग जिला नहीं बनेगा, शादी नहीं करेंगे। 16 मार्च 2005 को वह ब्रह्मलीन हो गए।

दूसरी बार टूटा: 1982 में धाैलपुर बना

आजादी के बाद जिले का दूसरी बार विभाजन हो रहा है। 15 अप्रैल 1982 काे भरतपुर से अलग हाेकर धाैलपुर जिला बना था। धाैलपुर की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर ने थी। धाैलपुर 27वां जिला बना था।

राजनीतिक फायदा विश्वेंद्रसिंह काे

डीग जिला बनने से सबसे ज्यादा फायदा कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्रसिंह काे हाेगा। क्षेत्र के सत्ताधारी पार्टी से जुड़े नगर विधायकाें काे भी राजनीतिक लाभ मिलेगा। नगर विधायक वाजिब अली ने कहा कि नगर जिला बनता ताे ज्यादा अच्छा हाेता। फिर भी डीग जिला बनने से बहुत फायदा हाेगा। जबकि कामां विधायक एवं मंत्री जाहिदा खान काे लाेगाें की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि कामां के लाेग भी जिले की मांग कर रहे थे। वहीं भाजपा काे चुनावी साल में नए इश्यू तलाशने हाेंगे।

अब आगे क्या... गजट नोटिफिकेशन के बाद नियुक्त होंगे अधिकारी
सेवानिवृत एडीएम प्रशासन एमपी शर्मा ने बताया कि अब गजट नोटिफिकेशन जारी हाेगा। अधिकारी नियुक्त किए जाएंगेे। सीनियर आरएएस काे प्रमाेट कर कलेक्टर बनाया जा सकता है। बड़ी तादाद में अधिकारी नियुक्त हाेंगे। इसलिए प्रमाेशन और नियुक्तियां ज्यादा हाेंगी। चुनावी साल काे देखते हुए निर्णय लिया गया है। इसलिए सरकार चुनाैती के रूप में लेकर तेजी से काम करेगी।

अन्य राज्यों से ज्यादा आबादी... जिलों की औसत आबादी 14 लाख, डीग की 11 लाख
प्रदेश में एक जिले में औसत आबादी 24 लाख है। छत्तीसगढ़ में 9 लाख, हरियाणा में 13 लाख और मध्य प्रदेश में औसतन 15 लाख की आबादी पर जिला है। राजस्थान में 19 नए जिले बनने से जिलाें की औसत आबादी 13.70 लाख हा़े जाएगी। डीग जिले की आबादी 10.72 लाख, जबकि भरतपुर की 14.76 लाख आबादी रहेगी।

मंत्री विश्वेंद्र सिंह बाेले- विकास काे गति मिलेगी
जिलों का आकार जितना छोटा होगा। विकास उतना ही तेजी से हाेगा। दाैसा इसका गवाह है। विकास की रफ्तार, कानून व्यवस्था, संसाधन उपयाेग, कनेक्टिविटी, सर्विस डिलीवरी बेहतर हाेगी। सरकारी योजनाओं को आम लोगों तक ज्यादा आसानी से पहुंचाया जा सकेगा। राजस्व बढ़ेगा। प्रशासन और नागरिकों के बीच संवाद बढ़ेगा और फासले मिटेंगे। कलेक्टर, एसडीओ सहित सरकारी मशीनरी की रफ्तार भी तेज होगी। गांव, पंचायत, ब्लॉक और जिला मुख्यालय का सीधा संवाद होगा। नए कार्यालय खुलेंगे। सड़क, पानी, बिजली, सफाई में सुधार होगा।

हालात बदलेंगे: अटोरिया
साेनगांव निवासी एवं यूपी के सेवानिवृत मुख्य सचिव किशन अटाेरिया ने बताया कि मेरा अनुभव रहा है कि जब जिले छोटे होते हैं तो जिले के आखिरी गांव तक पहुंच हो जाती है। विकास को विस्तार मिलता है। जिला यूनिट बनता है तो बजट बढ़ता है। मैनपावर बढ़ती है। हालात बदलते हैं।