टिप्स:काम पर समस्या खड़ी कर सकती है आपकी व्याकुलता और बेचैनी

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टिप्स:काम पर समस्या खड़ी कर सकती है आपकी व्याकुलता और बेचैनी
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जब कभी आपके दिमाग में कोई नया विचार आता है तो सबसे पहले क्या आप यह सोचते हैं कि इसमें क्या गलत हो सकता है? जब कभी संवाद अस्पष्ट होता है, तो क्या सबसे पहले आपके मन में नकारात्मक विचार आते हैं? अगर ऐसा है, तो आप अपने विचारों को बदलना सीख सकते हैं जिससे कि वो आपकी सोच को सीमित न कर दें। काम के दौरान होने वाली व्याकुलता और बेचैनी कैसे परेशानी का सबब बनती हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है, यहां जानिए...

1) लोगों के प्रति मन में गलत धारणा बनाते हैं
ज्यादातर बेचैन लोगों के मन में यह चलता रहता है कि लोग उन्हें पसंद नहीं करते हैं और न ही उनके हुनर की कद्र करते हैं। उनके मन में खुद को लेकर कोई न कोई शंका हमेशा बनी ही रहती है। जरूरी है कि हमेशा अपने विचारों पर पहरा रखें। देखें कि कब आपके विचार बिना किसी वजह के ही नकारात्मक हो रहे हैं। ध्यान दें कि कब आप बिना किसी ठोस सबूत के ही अपनी धारणाएं बनाने लगते हैं।

2) फीडबैक से हमेशा बचने की कोशिश करते हैं
बेचैन लोग फीडबैक को विपत्ति की तरह देखते हैं। वो उसे अपनी असफलता का सूचक भी मानते हैं। वो मानते हैं कि फीडबैक उनकी नाकामी को साबित करने का एक जरिया मात्र है। यह देखें कि आप किस तरह फीडबैक लेना पसंद करते हैं। ओपन फीडबैक लेने का सबसे आसान तरीका खोजें। अगर फीडबैक आपको असहज या उदास करे तो कहें- अच्छी बात है, मैं इन बिंदुओं पर विचार करूंगा।

3) सबकी नजर में मुश्किल व्यक्ति बन जाते हैं
बेचैन लोग अक्सर उन चीजों से बचना चाहते हैं, जो उन्हें असहज करती हैं और फिर वो अपने रवैए से शर्मिंदा भी होते हैं। जैसे किसी ईमेल का जवाब देने में असहज महसूस कर सकते हैं तो टालमटोल करने लगते हैं। इससे आपके गैर जिम्मेदार होने की धारणा भी बन जाती है। अच्छा ये होगा कि आप जिस चीज से असहज हो जाते हैं उसके बारे में सबको पहले ही ईमानदारी से बता दें।

4) नए विचारों पर नकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं
अगर नए विचारों पर आपकी पहली प्रतिक्रिया रिस्क और फेल्युअर से जुड़ी है, तो लोग आपको एक नकारात्मक व्यक्ति की तरह देखने लगेंगे। इसके बजाय यह देखने की कोशिश करें कि उस नए विचार से क्या बेहतर हो सकता है। इसके बाद ही अपनी चिंता व्यक्त करें। लेकिन आखिर में अपनी बात को सकारात्मक नोट पर खत्म करें। प्रतिक्रिया देने की जल्दी कभी न करें। बहुत सोच-समझकर जवाब दें।