मेवात बना नया जामताड़ा:भरतपुर के गांवड़ी गांव से हुई थी शुरुआत सिर्फ 3 साल में जामताड़ा को पीछे छोड़ा
मेवात के लोग कभी वाहन चोरी एवं नकली सोने की ईट से ठगी करते थे। इसी दौरान भरतपुर में कुछ युवाओं की गिरफ्तारी हुई और इन्हें जेल भेजा गया। जेल में इन्हें ऐसे अपराधी मिले जो ऑनलाइन धोखाधड़ी करते थे। युवाओं ने इन्हें ही अपना गुरु मान लिया। जेल में गूगल से सर्च कर साइटों और यूट्यूब वीडियो से ऑनलाइन फ्रॉड के तरीके सीखे और सिर्फ तीन साल पहले ही भरतपुर के गांवड़ी गांव से साइबर ठगी की शुरुआत हुई।
आज इस गांव का हर दूसरा व्यक्ति यही कर रहा है। धीरे-धीरे यह पूरे मेवात में फैली और नए-नए तरीके खोज मेवात के ठगों ने बहुत थोड़े समय में जामताड़ा को पीछे छोड़ दिया। राजस्थान में भरतपुर के कामां, पहाड़ी, जुरहेड़ा, केथवाड़ा, खौ, सीकरी और नगर थाना इलाके में सबसे ज्यादा युवा साइबर अपराध से जुड़े हैं।
भरतपुर के करीब 100 गांव इस धंधे में हैं। जबकि अलवर के रामगढ़, गोविंदगढ़, नोगांवा और सदर थाना इलाके के करीब 50 गांवों के लोग ठगी में लगे हैं। पिछले एक साल में करीब एक हजार युवाओं की गिरफ्तारी इन इलाकों से हुई है लेकिन साइबर ठगी का काम घटने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है।
केस 1- रिश्तेदार बन मां-बेटे से दो किस्तों में ठगे 1 लाख रुपए
मालवीयनगर नगर के समीर दरबारी की मां के पास जुलाई, 2020 में ठग ने फोन पर कहा- मांजी पहचाना नहीं? महिला ने फोन करने वाले को रिश्तेदार ताराचंद समझा। बातों में महिला से बेटे समीर का नाम जान लिया। समीर से बात कराने की बात कही। समीर घर आया तो ताराचंद बनकर बात की और दो बार 50-50 हजार रुपए खाते व पेटीएम में ट्रांसफर कराए। इसके बाद ठग का फोन बंद हो गया।
केस 2-फौजी बन ठगे 98 हजार
वैशालीनगर की समीरा ने वॉशिंग मशीन बेचने के लिए ओएलएक्स पर विज्ञापन डाला था। एक युवक ने आर्मी अफसर बताकर फोन किया और 12 हजार में सौदा तय कर लिया। युवक ने भुगतान क्यूआर कोड भेजा। 3-4 ट्रांजेक्शन कराकर ठग ने 98 हजार रुपए उसके खाते से उड़ा लिए।


