साइबर ठगों की बड़ी गैंग पकड़ी, नेटवर्क पूरे देश में:MBA और बीटेक करने वाले छात्रों की करतूत, पुराने नंबरों को खोजते और उनसे अटैच पेटीएम, फोन-पे वॉलेट से करते थे बैंक खाते साफ

साइबर ठगों की बड़ी गैंग पकड़ी, नेटवर्क पूरे देश में:MBA और बीटेक करने वाले छात्रों की करतूत, पुराने नंबरों को खोजते और उनसे अटैच पेटीएम, फोन-पे वॉलेट से करते थे बैंक खाते साफ

जयपुर ग्रामीण पुलिस ने साइबर क्राइम से जुड़ी एक बड़ी गैंग को पकड़ा है। इस गैंग का नेटवर्क पूरे भारत में है, जो फोन-पे, पेटीएम, गूगल-पे जैसे मनी वॉलेट एप से लोगों के खाते साफ करने में माहिर थे। बंद हुई पुराने मोबाइल सिम के नंबरों को खोजकर उनसे लिंक इन वॉलेट एप के जरिए साइबर क्राइम को अंजाम देते थे। पुलिस ने इस मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया है।

जयपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक शंकर दत्त शर्मा ने बताया कि पकड़ी गई गैंग का मास्टर माइंड मनोज महापात्र (22) उड़ीसा का निवासी है। इसके अलावा इस गैंग में लखीमपुरखीरी उत्तर प्रदेश के रहने वाले रचित वर्मा (21), सनी शर्मा (26), अंकित शर्मा, शाहजहांपुर उत्तर प्रदेश निवासी पवन कुमार (27) और कटूम्बर अलवर का रहने वाला अखिल कुमार (23) को पकड़ा है। इसमें मनोज MBA किया हुआ है और इंजीनीयरिंग का डिप्लोमा कर रहा है, जबकि अखिल कुमार कंप्यूटर साइंस से बीटेक किया हुआ है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस ऑपरेशन को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र यादव, गोविंदगढ़ डिप्टी एसपी संदीप सारस्वत और साइबर सैल ग्रामीण के एएसआई रतनदीप ने अंजाम दिया।

यूं देते थे वारदात को अंजाम

पुलिस अधीक्षक शंकर दत्त ने बताया कि दो माह पहले फरवरी में सामाेद थाने में राजीव चौधरी नाम के व्यक्ति ने मुकदमा दर्ज करवाया कि उसके खाते से बिना कोई ओटीपी पूछे अलग-अलग ट्रांजेक्शन से 7.19 लाख रुपए निकल गए। इस मामले की जांच के लिए टीम का गठन किया। टीम ने जब जांच कि तो पता चला कि साइबर ठग करने वाले ये लोग सिम बेचने वाले डिस्टीब्यूटर को उपलब्ध करवाए जाने वाले विशेष एप पर वे मोबाइल नंबर सर्च करते हैं, जिनकी सिम बाजार में बिकने के लिए उपलब्ध है। फिर इन नंबरों में से उन नंबरों को ढूंढते हैं, जिन पर पहले कभी फोन-पे, गूगल-पे या पेटीएम के खाते खोले गए हो। ऐसे नंबरों की पूरी डिटले निकालने के बाद इन नंबरों से जुड़े ईमेल एड्रेस को सर्च कर उसे हैक करते। इसके अलावा इन नंबरों से जुड़े व्यक्ति और उनके पैन नंबर भी सर्च करके वारदात को अंजाम देते। ईमेल एड्रेस पर आने वाले ओटीपी नंबर के जरिए ही ये लोग फोन-पे, गूगल-पे या पेटीएम से पैसे अपने वॉलेट पर ट्रांसफर करते और उन्हें उपयोग में लेते।

देशभर के साइबर ठगों को उपलब्ध करवाते हैं सिम और डाटा

पुलिस को प्रारम्भिक पूछताछ में ये पता चला कि ये गिरोह साइबर ठगी करने के अलावा देशभर के अन्य साइबर ठगों को भी मोबाइल नंबर, सिम कार्ड सहित अन्य डेटा उपलब्ध करवाते थे। इसके लिए ये बड़ी संख्या में वे सिम कार्ड रखते थे। ये सिम कार्ड 2 से ढाई हजार रुपए में बेचते थे। सिम एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाने के लिए कोरियर करवाते थे और खुद फ्लाइट से सफर करते, ताकि पुलिस या अन्य एजेंसियों की नजर में न आएं। जिस राज्य में कोरियर करवाते वहां खुद पहुंचकर कोरियर के पैकेट को रिसिव करते। पुलिस अब इन गिरोह से और गिरोह के बारे में जानकारी जुटाने में लगी है।