अभेद्य दुर्ग बना राजस्थान:अब असम के प्रत्याशी पहुंचे जयपुर; पहले हो चुकी महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात और राजस्थान के विधायकों की बाड़ाबंदी
किलों और अभेद्य दुर्गों के लिए मशहूर राजस्थान एक बार फिर से सियासी बड़ाबंदी का केंद्र बन गया है। असम में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद कांग्रेस के सहयोगी एआईयूडीएफ के विधायकों को राजस्थान भेज दिया गया है। प्रदेश में मौजूदा गहलोत सरकार के कार्यकाल में 5वीं बड़ी बाड़ेबंदी है। नवबंर 2019 में महाराष्ट्र के विधायकों की जयुपर के दिल्ली रोड स्थति रिसोर्ट में बाड़ेबंदी की गई।
इसके बाद फरवरी 2020 में मध्यप्रदेश और गुजरात के विधायकों की दिल्ली रोड के होटल और रिसोर्टस में बाड़ेबंदी की गई थी। इसके अलावा पिछले पहले साल राज्यसभा चुनाव व उसके बाद राजस्थान कांग्रेस में पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट व उनके 18 समर्थक विधायकों की बगावत के बाद खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पिछले साल 34 दिन तक बाड़े में बंद रहना पड़ा था। इसमें विधायकों को तोड़फोड़ से बचाने के लिए सरकार को जयपुर से लेकर जैसलमेर तक के चक्कर लगाने पडे थे।
राजस्थान में सियासत के इन अभेद्य किलों ने बीते दो दशकों में कई सरकारों को गिरने से बचाया है। कांग्रेस और भाजपा ने पांच अलग-अलग राज्याें में अपनी सरकारें बनाने और दूसरे दलाें की सत्ता का खेल बिगाड़ने के लिए राज्य में बाड़ाबंदी की गई। 2005 से अब तक यहां झारखंड, उत्तराखंड, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात व मध्यप्रदेश के विधायकों की बाड़ाबंदी हो चुकी है।
शुरुआत झारखंड से: 2005-06 में दो बार बचाई गई थी भाजपा की सरकार
2005-06 में भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी और अर्जुन मुंडा कैंप के बीच सीएम की कुर्सी को लेकर झगड़ा हुआ। दिल्ली में बैठे भाजपा के नेता अर्जुन मुंडा के नेतृत्व वाली सरकार बचानी थी, इसलिए करीब 25 विधायक यहां भेजे गए थे। इनके साथ कुछ निर्दलीय विधायक भी थे। झारखंड के विधायक दो बार आए थे। दाेनाें बार सरकार बच गई। इन्हें उस समय जयपुर के पास अजमेर रोड स्थित सनराइज रिसोर्ट में ठहराया गया था।
उत्तराखंड : रावत सरकार में भाजपा का रेस्क्यू सेंटर बना था जयपुर
2016 में जब उत्तराखंड में कांग्रेस की हरीश रावत की सरकार संकट में आई। उस समय भाजपा के 27 विधायक दो समूहों में जयपुर भेजे गए और उन्हें जयपुर ग्रीन रिसॉर्ट में ठहराया गया था। टूट-फूट से अपने विधायकाें काे भाजपा ने ताे बचा लिया, लेकिन उत्तराखंड में हरीश रावत सरकार फ्लाेर टेस्ट पास कर गई थी।
महाराष्ट्र : हॉर्स ट्रेडिंग रोकने को 44 विधायकों की गई थी बाड़ेबंदी
2019 में महाराष्ट्र में शिवसेना और कांग्रेस गठबंधन में सरकार बनाने जा रही थी, तब कांग्रेस ने अपने 44 विधायकों को हॉर्स ट्रेडिंग से बचाने के लिए जयपुर में बाड़ाबंदी करवाई थी। भाजपा की सरकार गिरी और नए गठबंधन की सरकार बनी।
गोवा : पर्रिकर सरकार बनाने के लिए राजस्थान बुलाए थे एमएलए
वसुंधरा राजे पहली बार राजस्थान की सीएम बनी तब राजनीतिक रूप से अस्थिर माने जाने वाले गोवा के विधायक राजस्थान आए थे। गोवा में भाजपा को सरकार बनाने का दावा पेश करना था, इसलिए विधायकों को यहां भेजा गया। पार्रिकर ने तब सरकार बनाई थी।


