इनोवेशन:5वीं पास मजदूर ने बनाई मेट्रो, पत्थर के 12 फुट लंबे डबल डेकर ट्रैक पर दौड़ती भी है
आइडिया और इनोवेशन। अब यही है जिंदगी का अगला भविष्य। 5वीं तक पढ़े-लिखे बेढम गांव के 56 वर्षीय मजदूर नत्थो प्रजापत को 33 साल पहले ही यह आभास हो गया था। इसीलिए वह लगातार कुछ न कुछ नया इनोवेशन कर रहा है। इसीलिए अब अपने घर में 12 फुट लंबा पत्थर का डबल डेकर ट्रैक बनाकर उस पर 4 डिब्बों वाली मेट्रो ट्रेन दौड़ाई है।
ट्रैक पर बकायदा इलेक्ट्रिक लाइन भी डाली है। यह आइडिया उसे करीब 2 वर्ष साल पहले तब आया जब वह किसी काम से दिल्ली गया था। तब मेट्रो स्टेशन और ट्रैक को देखा तो लगा कि क्यों ना इसमें कुछ और सुधार कर इसे नया रूप दिया जाए। इससे पहले वह ट्रैक्टर और हैलिकॉप्टर का इनोवेशन भी कर चुके हैं।
प्लास्टिक पाइप से बनाए कोच, मेट्रो स्टेशन और पटरियां पत्थर से
डबल डेकर (ऊपर और नीचे डबल ट्रैक) ट्रैक और स्टेशन पत्थर के हैं। नीचे पत्थर के पोल लगाए हैं। ट्रैक के ऊपर तांबे के दो तार लगाए हैं। इनमें डीसी करंट के साथ ट्रेन के इंजन का एंटीना (सिग्नल) टच किया है। 24 इंच लंबा कोच 8 इंच मोटे प्लास्टिक पाइप का है। इंजन में छोटे कूलर की मोटर के साथ बाइक के गियर बक्से की गिरारियों का उपयोग किया है। डिब्बों का निचला चेस लकडी का है। पटरियों की मोटाई 40 एमएम रखी है। ये पत्थर की बनाई है।
पहले ट्रैक्टर कंपनी ने बुलाया था, लेकिन मौका चूक गए
आर्थिक रूप से कमजोर निर्माण श्रमिक नत्थो बताते हैं कि सन् 1987 में उन्होंने ट्रैक्टर का माॅडल बनाकर इनेवोशन किया था। उसकी वजह से भरतपुर की ट्रैक्टर एजेंसी में नौकरी मिली। उसके मॉडल को देखकर 1988 में ट्रैक्टर कंपनी से बुलावा आया। लेकिन, तब एजेंसी मालिक ने नहीं भेजा था। इसके बाद ऐसा मौका नहीं मिला। अगर उसके बनाए मेट्रो ट्रेन के मॉडल पर अमल हो तो देश में 12 डिब्बों वाली दो मेट्रो ट्रेन ऊपर और दो नीचे के ट्रैक पर एक साथ चल सकती हैं। निचले ट्रैक पर 200 किमी प्रतिघंटा और ऊपरी ट्रैक पर 100 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार रखी जा सकती हैं।


