जरा इन पर भी गौर कीजिए सरकार!: आधार नंबर नहीं होने के कारण 2164 असहायों को नहीं लग पा रही वैक्सीन, इनसे दूसरों के भी संक्रमित होने का खतरा
सरकार ! भरतपुर के बझेरा स्थित अपनाघर आश्रम में रह रहे देशभर के 2164 निराश्रित और असहायों पर भी जरा गौर कीजिए। क्योंकि हालात और परिस्थितियों ने इन्हें पहले ही अपनों से अलग कर दिया था। दर-दर की ठोकरें खाने और भटकने के बाद जैसे-तैसे अपनाघर में सहारा मिला। लेकिन, अब कोरोना काल में भी इन्हें वैक्सीन तक नहीं लग पा रही है। वजह, इनके पास आधार नंबर नहीं है। आधार कार्ड इसलिए नहीं बन पा रहा है, क्योंकि इनका स्थाई पता-ठिकाना नहीं है।
जबकि इम्युनिटी कमजोर होने के कारण इन्हें वैक्सीनेशन की ज्यादा जरूरत है। अपनाघर में नेपाल समेत सभी प्रांतों के 3359 आवासी रह रहे हैं। इनमें से 2164 लोग ऐसे हैं जिन्हें आयु वर्ग में पात्रता होने के बावजूद वैक्सीन नहीं लग पाई है। इनमें अधिकांश मानसिक रूप से अस्वस्थ, मंदबुद्धि, मूक बधिर, एड्स, टीबी, पोलियो, अंग विहीन और अंग-भंग है। केवल 149 लोग ही पूरी तरह स्वस्थ हैं। इनमें भी 106 बच्चे हैं।
संस्थापक अध्यक्ष डॉ. बीएम भारद्वाज ने बताया कि केवल 1188 के पास ही आधार कार्ड हैं। इनमें से 188 प्रभुजी (रहवासी) 45 प्लस आयु वर्ग के हैं। इन सभी को वैक्सीन लगवा दी गई है। बाकी 1000 को एक मई से शुरू हो रहे अभियान में टीके लगवाएंगे। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती 2164 प्रभुजी की है। इन्हें अपना अता-पता भी मालूम नहीं है। इसलिए इनके आधार कार्ड अथवा अन्य कोई आईडी नहीं बन पाई है। हमने जिला कलेक्टर को पत्र लिखा है। इसमें इन्हें विशेष केटेगरी में मानकर वैक्सीनेशन करवाए जाने का आग्रह किया है।
भरतपुर के अपनाघर में रह रहे इन लोगों का वैक्सीनेशन इसलिए जरूरी
अपनाघर में 40% आवासियों की दिनचर्या दूसरों पर निर्भर है। प्रशासनिक अधिकारी बबीता गुलाटी बताती हैं कि आश्रम में 1868 मानसिक अस्वस्थ, 178 मंदबुद्धि, 104 मूक बधिर, 70 एचआईवी, 113 टीबी, 92 पोलियो ग्रस्त, 108 अंग-भंग, 38 अंग विहीन लोग हैं। इनमें अधिकांश की इम्युनिटी पावर काफी कमजोर है। कोविड संक्रमण को देखते हुए आश्रम में बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी है।


