हे सरकार! कोरोनाकाल में मजदूरों के साथ यह कैसा मजाक...:मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी सिर्फ 1 रुपए बढ़ाई, मैट को वो भी नहीं, महंगाई के इस दौर में कैसे पालेंगे परिवार
काेरोनाकाल में आसमान छूती मंहगाई और बढ़ती बेरोजगारी के बीच सरकार मनरेगा श्रमिकों के साथ मजाक कर रही है। राज्य में महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम (मनरेगा) श्रमिकों की मजदूरी नए सत्र से सिर्फ एक रुपए प्रतिदिन की बढ़ोत्तरी की है।
मनरेगा योजना के तहत श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी देने में देश में राजस्थान 16वें स्थान पर है। वर्ष 2020-21 के दौरान जहां मनरेगा श्रमिकों के लिए 220 रुपए दिहाड़ी मजदूरी तय थी। वहीं इस नए वित्तीय वर्ष में उनकी दिहाड़ी मजदूरी 221 रुपए प्रतिदिन होगी। जबकि मेट को पहले की तरह 235 रुपए ही मिलते रहेंगे।
अगर अन्य राज्यों से तुलना करें तो मजदूरी बढ़ाने में राजस्थान का 29वां स्थान है। केवल केरल ही ऐसा राज्य है, जिसने इस बार न्यूनतम मजदूरी में कोई इजाफा नहीं किया है। जबकि अन्य राज्यों ने श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी अपने-अपने हिसाब से बढ़ाई है। मनरेगा दिहाड़ी मजदूरी में सबसे अधिक वृद्धि मेघालय ने 23 रुपए की है।
इस समय देश में करीब 60 लाख मनरेगा श्रमिक कार्य कर रहे हैं। हालांकि यह संख्या बदलती रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना से गरीब परिवारों को रोजगार मिलता है। इधर,अब कोरोनाकाल में वापस मनरेगा के कार्यों में तेजी आने की संभावना है। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का यह सबसे बड़ा साधन है। दैनिक मजदूरी नहीं बढ़ने से अब इस योजना से मजदूर अपना रुख बदल सकते हैं।
हरियाणा में सर्वाधिक और एमपी-छत्तीसगढ़ में सबसे कम मजदूरी
मनरेगा मजदूरों को वर्तमान में सबसे ज्यादा मजदूरी हरियाणा दे रहा है। यहां 315 रुपए प्रतिदिन की दर से मजदूरी मिलेगी। क्योंकि हरियाणा ने इस बार 6 रुपए बढ़ाए हैं। वहीं सबसे कम मजदूरी मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के श्रमिकों को 193-193 रुपए मिलेगी।


