जयपुर मंडल ने टीए जैसे भत्ते नहीं देने पड़ें इसलिए 100 लोगों का नियम विरुद्ध जबरन फुलेरा ट्रांसफर किया
उत्तर पश्चिम रेलवे का जयपुर मंडल विवादों का स्टेशन बनता जा रहा है। मंडल अधिकारियों द्वारा आए दिन कोई ना कोई विवादित आदेश निकाले जा रहे हैं। ऐसा ही एक विवादित आदेश यांत्रिक और कार्मिक विभाग के अधिकारियों ने निकाला है। इसके बाद रेलवे श्रमिक संगठन और प्रशासन आमने-सामने हैं।
जयपुर मंडल प्रशासन ने शुक्रवार देर शाम एक ट्रांसफर आदेश जारी किया। इसमें जयपुर में कार्यरत कैरिज एंड वैगन (सी एंड डबल्यू) के सीनियर सेक्शन इंजीनियर से लेकर ग्रुप डी श्रेणी के 100 कर्मचारियों का ट्रांसफर फुलेरा कर दिया। इसकी सूचना ना तो श्रमिक संगठनों को थी और ना ही कर्मचारियों को। लिस्ट जारी होते ही पूरे जयपुर स्टेशन पर सनसनी फैल गई।
ऐसा इसलिए भी क्योंकि सभी लोगों के ट्रांसफर नियमों के विरुद्ध किए गए हैं। रेलवे ने खर्चों में कटौती के लिए ये आदेश निकाले हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि अभी जिन कर्मचारियों को फुलेरा ड्यूटी पर भेजा जा रहा है, उन्हें ट्रैवलिंग अलाउंस (टीए) देना पड़ रहा है। ऐसे में रेलवे ने सभी का प्रशानिक हित में अस्थाई तौर पर एक साल के लिए ट्रांसफर कर दिया।
इससे जहां रेलवे को टीए नहीं देना पड़ेगा वहीं अस्थाई आदेश होने के कारण ट्रांसपोर्टेशन एंड पैकिंग अलाउंस (टीपीए) पर भी मिलेगा। फुलेरा में जयपुर की बजाय एचआरए भी 16 की बजाय 8 प्रतिशत ही देना पड़ेगा। लिस्ट जारी होने के बाद पूरे मंडल में विरोध शुरू हो गया।
नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एम्पलॉइज यूनियन के मंडल अध्यक्ष मुकेश चतुर्वेदी और उत्तर पश्चिम रेलवे मजदूर संघ के मंडल अध्यक्ष सौरभ दीक्षित ने डीआरएम और मंडल के अन्य अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। श्रमिक संगठनों ने प्रशासन पर आरोप लगते हुए कहा कि कर्मचारियों को परेशान किया जा रहा है।


