अपामार्ग ऋषिपंचमी पर्व विशेष।

Aug 23, 2020 - 05:10
Mar 1, 2023 - 21:54
अपामार्ग ऋषिपंचमी पर्व विशेष।
अपामार्ग ऋषिपंचमी पर्व विशेष।

#अपामार्ग
#Achyranthes_aspera
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आज ऋषिपंचमी पर्व हैं..... आज महिला व बालिकायें व्रत कर अपामार्ग की 108 ठंठल की गठरी शरीर पर आवेश है और 108 वापस या फिर पानी सिर पर आरोप स्नान करता है... कहीं न कहीं इसकी दातून भी की जाती है..... इसकी दातून करने से दांत काफी मजबूत होता है और कई सालों तक उनमें से किसी का कोई पता नहीं चलता है.. वहीं इसके विनाश से स्नान करने पर मस्तिष्क में जाम कफ निकल जाता है साथ ही बालों में विशेष कीड़े भी निकल जाते हैं...।।

अपामार्ग को #चिरचिटा, #लटजीरा, #चिरचिरा, #चिचड़ा आदि नामों से जाना जाता है...।

इस समय सड़क हो या नदी-तालाब किनारे या बंजर भूमि हर जगह अपामार्ग का पौधा आसानी से दिखाई देगा.... हमारे सरिस्का अभयारण्य के आस पास में तो हर गांव कस्बे में यह बड़ी मात्रा में पैदा होता है.... पर इसका अपामार्ग के नाम कोई नहीं जानता, हर कोई #चिचड़ा कहता है, जो कहीं से भी नहीं दिखता है गुणों की खान "अपामार्ग"

अपामार्ग एक बहुओषधीय वृक्ष हैं, जिसका तना,जड़,पत्ते,बीज सभी औषधीय मूल्य हैं....
अपामार्ग को अघाडा,लटजीरा या चिरचिटा आदि नामों से जाना जाता है....।
इसके पत्ते ऋषिपंचमी, गणेश पूजा, हर रचना पूजा, मंगला गौरी पूजा आदि समय काम आते हैं। शारे पूजा में ही इसलिए उपयोग होता है ताकि हम उनके आयुर्वेदिक रूप से परिचितों में सक्षम हों और ज़रुरत के समय उन्हें सदोपयोग करना ना भूले....।

इसके पत्ते को पीसकर लगाने से फोड़े फुंसी और किंक तक ठीक हो जाता है ...अपामार्ग की जड़ बेहद काम आने वाली होती हैं जो हमारे शरीर में मौजूद जहर को खतम करती है 
ज़हरीले कीट के काटने पर इसके पत्ते को पीसकर देने से राहत मिलती है ...वहीं इसकी 5-10 ग्राम जड़ को पानी के साथ घुलने से पढ़ने से पथरी निकल जाती है .... इसकी बीज चावल की तरह दीखते है , जिनहें # तंदुल कहते हैं ..... यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति तंदुल की खीर खा ले तो भूख-प्यास आदि समाप्त हो जाता है, पर इसकी खीर उनके लिए वरदान है जो गंभीर गड़बड़ी के बाद भी भूख को नियंत्रित नहीं कर पाती है, कालवर्ण ऋषि मुनि में इस प्रकार की खीर का उपयोग कर लंबी साधना को पूर्ण करते हैं।

Narpat Singh Shekhawat आयुर्वेद से प्रेरित, प्रकृति से जुड़ा एक पथिक। शांति, प्रेम और मानवता के विस्तार हेतु आयुर्वेदिक ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाने की साधना-यात्रा।