अच्छी यादों से कॉन्फिडेंस मिलता है और अनुभव से हासिल होती है शक्ति- हरमनप्रीत कौर

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अच्छी यादों से कॉन्फिडेंस मिलता है और अनुभव से हासिल होती है शक्ति- हरमनप्रीत कौर
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भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान के कंधों पर जिम्मेदारी है देश के लिए टी-20 विश्वकप लाने की। जानिए अपनी कप्तान को करीब से, उन्हीं की जुबानी..

बचपन से ही खेल मुझे अपनी ओर खींचता था। क्रिकेट इसलिए चुना क्योंकि टीवी पर वो ही दिखता था। मैं केवल इतनी तमन्ना किया करती थी कि टीवी पर दिख जाऊं। मुझे कोई अंदाजा नहीं था कि महिला क्रिकेट जैसा भी कुछ होता है, क्योंकि ये मुझे टीवी पर नहीं दिखता था।

मैं मानती हूं कि आप बिना किसी रोल मॉडल के बड़े हो जाएं, यह लगभग असंभव है। मैंने अपने पिता से प्रेरणा ली। मैं अक्सर उन्हें देखती और उन्हें फॉलो करती थी। अपनी आदतें भी उनके जैसी बना ली थीं। उन्होंने मुझे हमेशा खेल के लिए प्रोत्साहित किया। ये मोटिवेशन ही भारत के लिए खेलने को काफी था।

शुरुआती दिनों में मैं पापा के साथ क्रिकेट खेलती थी। तब मैं फील्डिंग करती थी। मुझे गेंदबाजी या बल्लेबाजी करने का मौका नहीं मिलता था। फिर भी रोज उनके साथ जाती थी। आज भी जब लो फील करती हूं तो उन दिनों को याद करती हूं। फील्डिंग से मुझे कॉन्फिडेंस मिलता है। अगर मैं फील्ड में अच्छा कर रही हूं, तो बैटिंग में वो रिदम दिखना तय है। यादें कॉन्फिडेंस देती हैं, अनुभवों से हम शक्ति पाते हैं।

मैंने उस वक्त क्रिकेट को चुना, जब भारत में महिला खिलाड़ियों के लिए कुछ भी नहीं था। कोई इन्हें खेलते हुए देखना पसंद नहीं करता था। अब तो यह खेल खेलते रहने के लिए कई चीजें हैं। अब महिलाओं की फीस भी लड़कों के बराबर हो गई है। उनकी प्रीमियर लीग की तैयारी भी हो रही है। लोग अब हमें टीवी पर खेलते देखते हैं और हमारे साथ रोमांचित भी होते हैं। उन्हें पता होता है कि आज हमारा किससे मैच है और अगला मैच हम कहां खेलने वाले हैं। ऐसे में तो बस लगता है कि खेलते ही जाइए।

मेरे दोस्त मुझसे शिकायत करते हैं कि मैं उनके साथ छुट्टियां नहीं बिताती। वो ब्रेक भी नहीं लेती, जो लगातार मैच खेलने के बाद चाहिए होता है। मुझे लगता है रिटायरमेंट के बाद मैं उन सभी जगहों को देख लूंगी, जहां जाना चाहती हूं। अभी तो मैं केवल खेलना चाहती हूं, और आराम करने के लिए घर से बढ़िया कोई जगह मुझे नहीं लगती, जहां मैं चैन से पूरे दिन लेटी रहती हूं और मनपसंद खाना खाती हूं।

लड़कों के साथ खेलने के ये फायदे होते हैं
बेहतर क्षमता वालों के साथ काम करने के फायदे हैं। मैं अपने करियर की शुरुआत में लड़कों के साथ खेलती थी। उनकी बॉलिंग मुझे तेज लगती थी। फिर भी खेलती थी। बाद में जब लड़कियों के साथ खेली तो उनकी बॉलिंग स्लो लगी। इसलिए मेरा पसंदीदा शॉट स्वीप बन गया। मैं अब हर बॉल कनेक्ट करती थी और अब बड़े आराम से शॉट लगा सकती हूं।

जिम्मेदारी से बड़ा टीचर और कोई नहीं
मैं अपना आपा जल्द खोने वालों में थी। दो-तीन साल पहले अग्रेसिव थी। अब चीजें बदली हैं। जिम्मेदारी से बड़ा टीचर कोई नहीं। अब महसूस होता है कि मैं कूल हूं और यह फायदा पहुंचा रहा है। मेरे और मेरी टीम के लिए यह बदलाव जीत ला रहा है। जो आदत आपको सफलता की ओर ले जाए, उसे तुरंत अपनाएं।

(भारतीय टीम की कप्तान बनने के बाद विभिन्न इंटरव्यू में हरमनप्रीत कौर)

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