9,400 स्कूली बच्चों की आंखें कमजोर निकली, जिले के 8 में से एक ब्लॉक में ही 188 बच्चों को चढ़ेगा चश्मा

9,400 स्कूली बच्चों की आंखें कमजोर निकली, जिले के 8 में से एक ब्लॉक में ही 188 बच्चों को चढ़ेगा चश्मा

सुविधाओं का अभाव, समझ की कमी और जानकारी के प्रति अनिच्छा कई बार छोटे से इशू को इतना बड़ा कर देती है कि फिर वह लगातार बना ही रहता है, जिसे कम करना मुश्किल हो सकता है। इस पर चाहे परिवार का मुखिया समय रहते ध्यान दें तो न केवल परिवार निरोगी रह सकता है, बल्कि बेमौसम आने वाले खर्च से भी बच सकता है। प्रदेश के कई ऐसे जिले हैं, जहां ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी स्कूलाें के बच्चों के स्वास्थ्य की जांच परिवार आमतौर पर नहीं कराते। प्रतापगढ़ में पहल करते हुए यहां स्कूली बच्चों के अभिभावक के रूप में यह जिम्मेदारी कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत यादव ने ली है।

मिशन दृष्टि में सामने आई कमजोर आंखें
कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत यादव ने बताया कि हमें महसूस हुआ कि काेराेना के दाैरान ऑनलाइन पढ़ाई व अन्य स्क्रीन टाइम बढ़ने से सबसे ज्यादा प्रभाव बच्चों की आंखों पर पड़ा। एक एनजीओ ने इस पर सर्वे भी किया। उसके आधार पर हमने दिसंबर में जिले के सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी में मिशन दृष्टि शुरू कर बच्चों की आंखों की स्क्रीनिंग का प्लान किया। दिसंबर और जनवरी में आंगनबाड़ी के करीब 93637 और स्कूली बच्चों की 145455 की जांच की गई। इस जांच के बाद 9399 बच्चे आंखों की विभिन्न बीमारियों से प्रभावित पाए गए, जिनमें दृश्यता में कमजोरी, आंखों में सूखापन, जलन, सिरदर्द आदि शामिल हैं।

80 मास्टर ट्रेनर से की शुरुआत, आंखों की जांच के लिए किट दिए
मिशन दृष्टि के तहत आंखों से संबंधित इलाज के लिए प्रारंभिक स्क्रीनिंग की जानी थी। इसके लिए एनजीओ साइट सेवर्स की मदद से 80 मास्टर ट्रेनर्स (एक ब्लॉक में 10) को प्रशिक्षित किया गया। फिर हर ग्राम पंचायत में 2 शिक्षक और दो स्वास्थ्य कार्यकर्ता आशा या एएनएम यानी 4 व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया गया। बच्चों की स्क्रीनिंग के उद्देश्य से कुल 858 व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया गया था। इन प्रशिक्षकों को आंखों की प्राथमिक जांच के लिए किट दिए गए।

एक ही ब्लॉक में निकले 1352 कमजोर आंखों वाले बच्चे : डॉ. यादव ने बताया कि एक फरवरी से चयनित स्थानों पर ब्लॉकवार शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जहां ऑप्टोमेट्रिस्ट और अन्य विशेषज्ञों की सहायता से चश्मे, दवा की आवश्यकताओं की पहचान करने या नेत्र विशेषज्ञ को रेफर करने की आवश्यकता होने पर आंखों का परीक्षण किया जा रहा है। अब तक छोटी सादड़ी ब्लॉक में शिविर लगाए जा चुके हैं। जहां 1352 बच्चों की ऑप्टोमेट्रिस्ट व विशेषज्ञों ने जांच की है। इसमें 188 बच्चों की पहचान की गई है, जिन्हें अब चश्मे लगाए जाएंगे। इनके अलावा 227 बच्चों को गंभीर बीमारी के लिए अब नेत्र रोग विशेषज्ञ की सलाह ली जाएगी।