ग्राम विकास अधिकारी ने कहा-विकास कार्यों का सही ऑडिट करवा दूंगा, रिकवरी भी नहीं निकालने दूंगा, 40 हजार रूपए लगेंगे
भ्रष्टाचार निराेधक ब्यूराे (एसीबी) की टीम ने मंगलवार दाेपहर करीब 12.30 बजे तिजारा पंचायत समिति कार्यालय में बड़ी कार्रवाई करते हुए सारेकलां की पूर्व महिला सरपंच के कार्यकाल में कराए गए विकास कार्यों व इससे जुड़े हिसाब की सही से ऑडिट कराने व अनावश्यक रिकवरी नहीं निकालने की एवज में 35 हजार रुपए की रिश्वत लेते चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
इनमें एक ग्राम विकास अधिकारी है और तीन ऑडिट टीम के सदस्य हैं। प्रारंभिक जांच में ग्राम विकास अधिकारी के मार्फत ऑडिट टीम के सदस्यों द्वारा रिश्वत लिया जाना सामने आया है। अतिरिक्त निदेशक स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग क्षेत्रीय कार्यालय जयपुर की तीन सदस्यीय टीम विकास कार्याे व लेखा रिकॉर्ड की जांच करने के लिए 8 दिसंबर से तिजारा पंचायत समिति कार्यालय में आई हुई है।
एसीबी के पुलिस उपाधीक्षक महेंद्र मीणा ने बताया कि सारेकलां के तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी अशाेक शर्मा पुत्र रामेश्वर शर्मा निवासी विवेकानंद नगर अलवर, अतिरिक्त निदेशक स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग क्षेत्रीय कार्यालय जयपुर के कनिष्ठ लेखाकार नवल किशाेर शर्मा निवासी नरोत्तमपुरा थाना कोटखावदा जिला जयपुर, सहायक लेखाधिकारी सुगर सिंह मीणा निवासी रोशी थाना नादौती जिला करौली हाल निवासी एस-3 महेश नगर जयपुर तथा सहायक प्रशासनिक अधिकारी गोविंद मेहरा निवासी डी-54 जनता नगर सोडाला जयपुर काे गिरफ्तार कर रिश्वत की रकम बरामद कर ली है।
पुलिस उपाधीक्षक ने बताया कि 11 जनवरी काे ताैफिक पुत्र तैयब खान निवासी सारेकलां थाना चाैपानकी ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई कि उसकी बहन जनवरी 2015 से 2020 तक सारेकलां पंचायत की सरपंच रही थी। उसके कार्यालय के दाैरान ग्राम पंचायत क्षेत्र में करवाए गए विकास कार्याें व लेखाें का ऑडिट सही से करवाने व अनावश्यक रिकवरी नहीं निकालने की एवज में सारेकलां का तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी अशाेक शर्मा 40 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा है।
अशोक शर्मा वर्तमान में फकरूद्दीनका पंचायत का ग्राम विकास अधिकारी है। अशोक ने कहा था कि यदि 40 हजार दोगे तो ऑडिट टीम से विकास कार्याें व लेखाें का सही से ऑडिट करवा दूंगा। अनावश्यक रिकवरी भी नहीं निकालने दूंगा। यह शिकायत मिलने के बाद एसीबी के अधिकारियों ने जब सत्यापन कराया तो आराेपियाें की ओर से 35 हजार रुपए की रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई।
टीम को देख जमीन पर फेंक दी घूस की रकम, भागने का भी किया प्रयास
एसीबी ने तौफिक काे केमिकल पाउडर लगे 35 हजार रुपए के नोट देकर आरोपियों के पास भेजा। उसने यह रकम ग्राम विकास अधिकारी अशाेक शर्मा काे दे दी। अशाेक ने यह राशि कनिष्ठ लेखाकार नवल किशोर शर्मा काे दे दी। तभी आरोपियों को एसीबी की भनक लग गई और उन्होंने पैसे जमीन पर फेंक दिए। एसीबी टीम ने दाेनाें आरोपियों के हाथ धुलवाए और घूस लेने की पुष्टि होने पर दाेनाें काे गिरफ्तार कर लिया।
एसीबी के पुलिस उपाधीक्षक मीणा ने बताया कि ग्राम विकास अधिकारी द्वारा परिवादी से रिश्वत की राशि लाने संबंधी बातचीत करने के बाद ऑडिट टीम के सहायक लेखाधिकारी सुगर सिंह मीणा के पास उनके कमरे में जाकर परिवादी द्वारा घूस की राशि तय की गई थी। साथ ही राशि लेकर आने के बारे में बताने पर टीम के सदस्य नवल किशोर शर्मा को ग्राम विकास अधिकारी अशोक शर्मा के साथ रिश्वत लेने के लिए कमरे से बाहर भिजवाया गया।
जांच में टीम के तीनों सदस्यों की रिश्वत में भागीदारी पाई गई। इसके बाद एसीबी ने ऑडिट टीम के सुगर सिंह मीणा और गोविंद मेहरा को भी गिरफ्तार कर लिया। एसीबी टीम काे देख सभी आरोपियों ने भागने का भी प्रयास किया, लेकिन टीम ने घेराबंदी कर सभी काे गिरफ्तार कर लिया।
सात दिन में दूसरी कार्रवाई
एसीबी ने 7 दिन पहले 6 जनवरी काे सीओ ग्रामीण सपात खान व शेखपुर अहीर थाने के कांस्टेबल अजमल खान काे परिवादी के विभिन्न थानाें में दर्ज मुकदमाें में रिलीफ दिलाने की एवज में 3 लाख रुपए लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया था।


