ज्वार कफ और पित्त को शांत करता है
#ज्वार #Sorghum_bicolor
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ज्वार का खेत केवल किसान का नही अपितु उसके चारों ओर रहने वाले #पक्षियों का भी पेट पालती हैं...
ज्वार की कड़प (चारा)एक ओर जहां पशुओं को प्यारी होती थी वही हमारे रीति रिवाज में भी शामिल थी.. आज से कुछ बरस पहले शादी का हर #मंडप ज्वार की कड़प से ही ढकता था पर अब लोगो ने खेती के साथ साथ अपने रीति रिवाज भी बदल लिये... ।
दीपावली हो या करवा चौथ आज भी कई मित्र ज्वार का पुंखडा ढूंढते हुए मिल जाते है.. अलवर में तो ज्वार का मिलना किसी आश्चर्य से कम नही...कोई नही लगाता अब ओर जो लगाने का मन करते है उन्हें पक्षियों के डर मन मे बैठ जाता हैं... एक समय किट पतंग पक्षियों के लिए आहार स्थल बनाये जाते थे पर आज का गरीब आदमी पक्षी दाना न चुग जाए इस कारण ज्वार की खेती नही करता...सच कहूं तो यही बदलते भारत की सच्ची तस्वीर हैं जिसमे व्यक्ति अपने परिवार से आगे किसी की नही सोचता..!!
ज्वार में मिनरल, प्रोटीन, और विटमिन बी कॉम्प्लेक्स जैसे कई पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं..इसके अलावा ज्वार में काफी मात्रा में पोटेशियम, फॉस्फोरस, कैल्शियम और आयरन भी होता है..
ज्वार काफी कम कैलोरी में अधिक पोषण देता है..लोग ज्वार का प्रयोग अनाज के रूप में करते हैं...।
ज्वार कफ और पित्त को शांत करता है, वात को बढ़ाता है.. शरीर को बल प्रदान करता है, थकान दूर करता है। वीर्य बढ़ाता है.. यह जलन, मोटापा, गैस, घाव, बवासीर तथा रक्तपित्त को नष्ट करता है.. इसके फल पौष्टिक, पाचक, खून साफ करने वाले तथा कफ को निकालने वाले होते हैं...।
अभी ज्वार का सीजन हैं खरीद कर रख लीजिए..कभी कभार इसकी रोटी का आनंद लीजिये..।


