स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड की मीटिंग:मुख्यमंत्री ने सुझावों पर गंभीरता की नसीहत दी, पूछा- विलेज रीलोकेशन धीमा क्यों?

स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड की मीटिंग:मुख्यमंत्री ने सुझावों पर गंभीरता की नसीहत दी, पूछा- विलेज रीलोकेशन धीमा क्यों?

जयपुर: राजस्थान स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड की पहली मीटिंग गुरुवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में हुई। मीटिंग में सरिस्का टाइगर रिजर्व को प्रमोट करने और बाघ संरक्षण, विलेज रीलोकेशन, टूरिज्म प्रमोशन करने के जो मसले “दैनिक भास्कर” ने उठाए थे उन पर चर्चा हुई।

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सदस्यों सुनील मेहता, धीरेंद्र गोधा, मिनी संपतराम ने इस मसले पर सीएम का ध्यानाकर्षण किया और पुरजोर पैरवी की गई कि सरिस्का को प्रमोट करके बाघ संरक्षण की दिशा में काम हो। मेहता ने सरिस्का में बाघ संरक्षण के साथ ही पूरे टूरिज्म सर्किट और ‘गोल्डन रूट’ से जोड़कर प्रदेश के लिए फायदे उठाने की बात कही तो मिनी संपतराम ने विलेज रीलोकेशन को समय सीमा में तय करने पर जोर दिया।

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बोर्ड मेंबर धीरेंद्र गोधा बोले सरिस्का में ज्यादातर बाघ कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही लाए गए हैं, वहीं अब जीन पूल सुधारने के लिए एमपी से बाघ लाने पर विचार किया जाना चाहिए। साथ ही कुंभलगढ़ को चौथे टाइगर रिजर्व के तौर पर प्रोजेक्ट करके बाघ शिफ्ट करने की बात कही। खास यह कि मुख्यमंत्री ने सुझावों को गंभीरता से सुनकर विभाग को नसीहत भी दी।

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उन्होंने कहा कांग्रेस के कार्यकाल में ही ज्यादातर परिवारों को सहमति से जंगल से शिफ्ट किया गया है। शुरुआत में 975 परिवार चिन्हित किए गए थे, उसमें से 677 परिवार अब तक शिफ्ट किए गए हैं। इन 677 परिवारों में से 534 परिवार 2008 से 2013 के बीच में अशोक गहलोत सरकार में हो पाए।इनके बाद गहलोत ने पूछा कि आखिर यह काम धीमा क्यों हो गया? उनकी मंशा साफ तौर पर सरिस्का टाइगर प्रोजेक्ट से जुड़ी समस्याओं के समाधान निकाल कर बाघ संरक्षण की दिखी।

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साथ ही उन्होंने बाघ संरक्षण, पर्यावरण आदि को लेकर पूर्व स्व. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को श्रेय दिया। बैठक के दौरान सांगोद विधायक भरत सिंह ने बोर्ड के उद्देश्य आदि को लेकर गंभीरता दिखाई। साथ ही उन्होंने प्रदेश में चीता शेर लाने जैसे बड़े मुद्दों पर ध्यानाकर्षण कराया।