नाकाम सिस्टम परिजनों ने खुद के खर्चे से बनवाया शहीद स्मारक, दो साल बाद भी भागीरथ के नाम से नहीं हुआ स्कूल का नामकरण

नाकाम सिस्टम परिजनों ने खुद के खर्चे से बनवाया शहीद स्मारक, दो साल बाद भी भागीरथ के नाम से नहीं हुआ स्कूल का नामकरण

सीमा पर युद्ध हो या देश के अंदर आतंकी हमले। हमारे सैनिक सर्वोच्च बलिदान देने से कभी पीछे नही हटते। पूरा देश वीर शहीदों को सिर-माथे पर रखता है। उन्हें मान-सम्मान और परिवार को सहारा मिलता तो है, लेकिन कई बार सरकारी जटिलताएं पूरी करते-करते उनके परिजन हिम्मत हार जाते हैं। आज पढ़िए, ऐसी ही परिस्थिति से जूझ रहे शहीद भागीरथ सिंह गुर्जर के परिवार की कहानी।

जम्मू कश्मीर के पुलवामा में दो साल पहले आज ही के दिन (14फरवरी, 2019) सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमला हुआ। इस दौरान धौलपुर जिले में राजाखेड़ा उपखंड के जैतपुर गांव का भागीरथ सिंह गुर्जर भी था। शहीद के वृद्ध पिता परशराम जवान बेटे के चले जाने से उतने नही टूटे, जितने कि सरकारी तंत्र की वादाखिलाफी से टूटे हैं। वे कहते है भागीरथ जब शहीद हुआ तो सरकार के मंत्री, बडे अफसर और नेता हमारे घर आए थे। सभी ने भरोसा दिलाया था कि हम आपके साथ हैं। चिंता मत करना।

भागीरथ तो देश के लिए शहीद हो गया, लेकिन हमें अपना बेटा ही समझना। हम आपके परिवार का हमेशा ध्यान रखेंगे। लेकिन, ध्यान रखने की बात तो दूर कोई दोबारा लौटकर भी नहीं आया। अभी तक भी घर में थ्री फेज का कृषि कनेक्शन नहीं हुआ। सभी नेताओं और अधिकारियों ने हमें कहा था कि सरकार से तय पैकेज तो मिलेगा ही उसके अलावा अन्य कोई दिक्कत हो तो हमें बताना। हम पूरी मदद करेंगे। तब मैंने कहा था कि किसी स्कूल, अस्पताल या सार्वजनिक स्थान का नामकरण मेरे बेटे के नाम कर देना। दो साल गुजर गए। लेकिन, इनमें से एक भी वायदा सच नहीं निकला। हालात जस के तस हैं। पुलवामा हमले में 14 फरवरी, 2019 को शहीद हुए थे भागीरथ सिंह गुर्जर

चाचा बोला- पुलवामा हमले की जांच के बारे में कुछ नहीं पता

शहीद भागीरथ सिंह के चाचा जरदान सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार ने वीरांगना रंजना देवी को 50 लाख रुपए और राजस्थान सरकार द्वारा 50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी गई। लेकिन जयपुर में फ्लैट देने की घोषणा अभी पूरी नहीं हुई। रिलायंस फाउंडेशन की तरफ कोई मदद नहीं मिली हैं। फ्री कृषि बिजली का कनेक्शन नहीं हुआ हैं और शहीद भागीरथ का एक पुत्र पांच वर्षीय विनय और चार वर्षीय पुत्री शिवानी बचपन प्ले स्कूल राजाखेड़ा में नि:शुल्क पढ़ रहे हैं। पुलवामा हमले की जांच के बारे में शहीद के परिजनों को कोई जानकारी नहीं हैं, ना लोकल पुलिस बताती है।

शहीद के नाम पर नहीं रखा स्कूल का नाम

जरदान सिंह ने बताया कि परिजनों ने खर्चे से शहीद स्मारक बनवाया और शहीद भागीरथ सिंह की मूर्ति का अनावरण भी करवाया। लेकिन भागीरथ के नाम से किसी भी स्कूल या फिर अस्पताल का नामकरण नहीं हुआ है।

शहीद के परिजनों की आवाज बनेगा समाज

अखिल भारतीय युवा गुर्जर महासभा प्रदेश अध्यक्ष जयवीर पोसवाल के नेतृत्व में गुर्जर समाज शहीद हुए युवा भागीरथ केेे लिए आवाज उठाएगी। जिलाध्यक्ष संजय कंषाना ने बताया कि शहीद भागीरथ सिंह गुर्जर के नाम से स्कूल, अस्पताल आदि करवाने के लिए राज्य सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया जाएगा। फिर अगर सुनवाई नहीं हुई तो इसके लिए जल्द ही धरना-प्रदर्शन भी किया जाएगा।